गुम गया इंसान

जिंदगी की होड़ में कहीं,
गुम गया इंसान,
कभी जमीं को खोदता,
तो पाताल की सोचता,
फिर आसमाँ को रौंदता,
चाँद-तारे  नक्षत्रों में खुद को ढूँढता
थक हार गया इंसान,
जिंदगी की होड़ में कहीं,
गुम गया इंसान ।
मृग तृषित इंसान,
अपनी पहचान ढ़ूँढता,
मिसाईलो को दागता,
विस्फोटक बना कर चौंकता,
ताकत अपनी जताने को,
सत्ता अपनी जमाने को,
सारी ताकत झोंकता,
विक्षिप्त हुआ  इंसान,
जिंदगी की होड़ में,
कहीं गुम गया इंसान ।
अगर-मगर से झूझता,
डगर-डगर है घूमता,
लोक-परलोक से जोड़ता,
आपस में सिर फोड़ता,
खुद से हो अंजान,
अभिशिप्त हुआ इंसान,
जिंदगी की होड़ में कहीं,
गुम गया इंसान ।।

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Comments

8 responses to “गुम गया इंसान”

  1. Ushesh Tripathi Avatar
    Ushesh Tripathi

    लाज़वाब

  2. Divya Jain Avatar
    Divya Jain

    bahut sundar ritu ji

    1. Ritu Soni Avatar
      Ritu Soni

      Thanks Divya

  3. Dev Kumar (DK) Avatar
    Dev Kumar (DK)

    Asm

    1. Ritu Soni Avatar
      Ritu Soni

      Thanks Dev

  4. Ritu Soni Avatar
    Ritu Soni

    Thanks ushesh

  5. Purav Goyal Avatar
    Purav Goyal

    laajwab likhaa aapne ritu ji badhai ho aapko khubsurt poem ke liey

    1. Ritu Soni Avatar
      Ritu Soni

      Thanks Pura ji

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