• Welcome to Saavan

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  • Saavan: Redefining Poetry

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  • To get the altitude,
    Its vital to leave the attitude,
    To get rid off Solitude,
    Its vital to be with multitude,
    To get the gratitude,
    Its vital to have fortitude,
    To get the amplitude
    Its vital to have rectitude.
    Rahi (Unknown)

  • देख कर ही मेरे घर की टूटी हुई खिड़की,

    जो फेर लिया मुँह तो अच्छा ही किया तुमने,

    छोड़ दिया साथ जब इतनी सी ही बात पर,

    अच्छा ही किया मेरा टूटा हुआ मकाँ देखा ही नहीं तुमने॥

    राही (अंजाना)

  • हर एक कश के साथ धुंए में अपनी ज़िन्दगी उड़ाते हैं,
    देखो आजकल के मनचले कैसे अपने कदम भटकाते हैं,

    पाते हैं कितने ही संस्कार अपने घरों से मगर,

    हर सिगरट के साथ वो रोज उनका अंतिम संस्कार कर आते हैं,

    जिस दिन हो ज […]

  • हर एक कश के साथ धुंए में अपनी ज़िन्दगी उड़ाते हैं,
    देखो आजकल के मनचले कैसे अपने कदम भटकाते हैं,

    पाते हैं कितने ही संस्कार अपने घरों से मगर,

    हर सिगरट के साथ वो रोज उनका अंतिम संस्कार कर आते हैं,

    जिस दिन हो ज […]

  • तोड़नी है

    खरगोश की तरह छलाँगें मारते

    हजार- हजार प्रपातों को

    कोख में दबाये खड़ी चट्टान

    गर्वीली !अनुर्वरा !!

    तोड़नी हैं

    जेवरा की धारियों सी सड़कों पर पसरी

    गतिरोधक रेखाएँ

    अनसुलझे प्रश्नो […]

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खिड़की

देख कर ही मेरे घर की... »

ये कैसी ज़िद

हर एक कश के साथ धुंए... »

कैसी ये ज़िन्दगी

हर एक कश के साथ धुंए... »

गर्वीली चट्टान

तोड़नी है खरगोश की तर... »

पचास साल बाद

मैं वहीं हूँ जहाँ तु... »

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