“तन्हाई कि दीवारों पे घुटन का पर्दा झूल रहा है…
बेबसी की छत के निचे, कोई किसी को भूल रहा है…”
– गुलज़ार

 

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  • Mahtab posted an update 8 hours, 43 minutes ago

    Har baat pe kehte ho ,ki ek baat hai.
    par wo baat nhi kehte, jo baat hai,.
    jhut pe jhut bolteho, ye jhut baat hai.
    par sach bhi nhi kehte, ye sach baat hai..
    wo tapak se milta hai,ittefak ki baat hai.
    par baat nhi hoti ,ye aur baat hai.
    khud ko dhunta hai mere ghazlo me, baat hai.
    par mushko bhi dhunta hai apni samo me,wah kya baat hai.
    kausar…[Read more]

  • छोड़ कर घरबार अपना,
    सीने पर गोली झेली

    बहा के अपने रक्त को,
    बचा ली मांगों की रोली

    खेल सकें हम सब होली,
    सीने पर झेली गोली

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • शिव की पूजा करते हो ,
    शक्ति की करते हो हत्या

    समाज देश पर आती है,
    नित नयी विपदा

    मान रखो नारी का,
    नारी सम्मान करो

    मत मारो गर्भ में इसको,
    धरती पर कन्या आने दो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • दुर्गा काली लक्ष्मी का,
    शिव ने भी सम्मान किया

    नतमस्तक होकर शिव ने,
    इनको ही प्रणाम किया

    शिव ने ही नारी को,
    शक्ति का है नाम दिया

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मानवता तुम खो चुके,
    बस पैसा दिखता है

    क्या लाया था तू इस जग,
    जिसके लिए तू रोता है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • चारो और है फैला,
    आखिर ये कसा मोह

    इंसान खुद को है मार रहा,
    लगी ये कैसी होड़

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • कान्हा ओ कान्हा,
    मेरा भी माखन चुरा ले

    माखन चुरा के कान्हा प्यारे,
    चित भी मेरा चुरा ले

    जो हो मन में मेरे विकार,
    इनको भी तू चुरा ले

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • प्रेम की डोरी से,यशोदा की लोरी से
    बंध गए नन्द किशोर

    छल कीन्हे बड़े कान्हा,प्यारी मईया से,
    बहुत प्रेम है इनको, ग्वाल औ गैया से

    माखन चोरी से,ब्रज की होरी से
    बंध गए नन्द किशोर

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • ऊँचे ऊँचे पर्वत ,
    पर्वत पर ये रास्ते

    किसने बनाये ये सब,
    और बनाये किसके वास्ते

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • जल उठी क्रांति मशाल,
    क्रांति के तुम दूत बनो

    मातृ भूमि से प्यार है तो,
    भारत माँ के दूत बनो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • अर्पण तन मन धन कर दो,
    स्व मातृ भूमि के लिए

    रहे वर्चश्व स्व का सदा,
    ना हो बंधन,मुक्ति के लिए

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • काल कलवित काल में,
    मशाल जो जलाएगा

    वन्दन अभिनन्दन है उसका,
    वह वीर कहलायगा

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • श्वेत माँ का आँचल है,
    दाग नहीं लगने देना

    निर्दोषों का रक्त,बहे का कभी
    भारत का मान सदा रखना

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • पर्वत से भाल,
    नदियों की चाल
    ये तरु विशाल,
    मन मेरे बसे हैं

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मेरा देश प्रेम,मन है बेचैन
    कब शांति सन्देश मिलेंगे

    माटी से प्रेम,
    इसकी सुगंध में रमे हैं

    होऊं निहाल,
    जब भारत दर्श किये हैं

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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