Saavan

Season of poetry

anu

मैं तो सन्नाटा हूं

ये तो मुमकिन नही यूं ही फ़ना हो जाऊं मैं तो सन्नाटा हूं फैलूं तो सदा हो जाऊं

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सलाखें ग़ज़ल गाती हैं

अब तो उनके घर से सदायें आती हैं ,जो कभी मेरे न थे उनकी भी दुआएं आती हैं … सुना है उन मकानों में हज़ारो कत्लखाने हैं , जहाँ दिल चूर होते हैं , सलाखें ग़ज़ल गाती हैं… …… …atr

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मैं आइना हूँ……

न मैं उसके जैसा हूँ ,न मैं तेरे जैसा हूँ , जो देखेगा मुझे जैसा ,यहाँ मैं उसके जैसा हूँ.. न मेरी जाति है कोई ,न मज़हब से है मेरा नाम, न मंदिर की मुझे चिंता ,न मस्जिद से मुझे है काम. मैंने देखा है उसे प्यार की रंगीन मुद्रा में, मगर मैं फिर भी […]

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आज फिर कोई रो रहा है….

आज फिर कोई रो रहा है… फिर कहीं किसी किसी गली से आवाज़ आ रही है, फिर आज कोई बैठा समंदर पिरो रहा है.. आज फिर कोई रो रहा है…. फिर कहीं कोई कसक नैनों में आ गयी, फिर वादो की टूटी माला कोई पिरो रहा है, आज फिर कोई रो रहा है.. आँखों से […]

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एक प्रश्न

आँखों से झरते आंसू ने थमकर पूछा आखिर सजा क्यों मिली मुझे ख़ुदकुशी की? दिल रो पड़ा पुराना जखम फिर हरा हुआ, कहा, गुनाह उसी ने किया जिस छत से तू गिरा .. ..atr

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मंज़िलें नज़दीक है…

सफर शुरू हुआ है मगर मंज़िलें नज़दीक है… ज़िंदगी जब जंगलोके बीच से गुजरे, कही किसी शेर की आहट सुनाई दे, जब रात हो घुप्प ,चाँद छिप पड़े, तब समझ लेना मुसाफिर मंज़िलें नज़दीक है.. जब सावन की बदली तुम्हारी ज़िंदगी ढक ले, पड़ने लगे बूंदे रात में हौले हौले, हो मूसलाधार जब बरस पड़े […]

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बस प्यार चाहिए

हथियार न बन्दूक न तलवार चाहिए , इंसान से इंसान का बस प्यार चाहिए. है बंद गुलिस्ता ये मुद्दतो से मीर, इस में फकत गुल ओ बहार चाहिए. नेकी की राह बड़ी बेरहम है ना, नेकी के मुसाफिर को तलबगार चाहिए. न भीड़ हो अन्धो की,गूंगो की,और बहरों की यहाँ, जो हो शरीफ उनका मुश्कबार […]

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Place Mat

Rush matting, spiralling and tightly coiled, knitted and bound, wanting to unravel and experience the freedom of wheat, blowing in the wind; loosening the threads like strands of golden hair.

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Pigalle reverie

Tender with violence you said. Present circumstance I say. Pedestal idols are those who idle, play and create. Forget the struggle! Bums guzzle beaujolais. Shopping cart nuns.

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Homeless children arrive to sleep under a flyover in New Delhi

ठिठुरता बचपन

सर्दी में नंगे पांव कूड़ा बटोरते बच्चे ठिठुरता बचपन उनका सिकुडी हुई नन्ही काया टाट के थैले की तरह उनके रूदन का क्या जिक्र करू मैं लफ़्जों के कुछ दायरे होते है नहीं फैल सकते वह उनके रूदन की तरह

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इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं

इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं   (कफ़स  = cage) हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में अब इन पर नये पत्ते, मैं कहॉ से लाऊं जले हुए गांव में अब बन गये है नये घर अब इन घरों में रखने […]

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hold my hand

When you hold my hand

When you hold my hand When your hairs spread over my face When your deep ecstatic eye see me My heart remain no longer with me When your lips touch my hand When you put your head on my shoulder When you whisper in my ear I feel I am where I should be I […]

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You know that I stare at you often

You know that I stare at you often Look at your lively smile with frozen eyes I sit behind you just few aisles away Dream about our friendship in fairy skies When I see you my sensations become silent Heart hosts an incessant whine in silence Crazy feelings move over my mind Takes me in […]

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…पुरानी नजरों से

उनको हर रोज नये चांद सा नया पाया हमने मगर उन्होने हमें देखा वही पुरानी नजरों से

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शागिर्द ए शाम

जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें

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अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा

अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा राहों में रोशनी के लिए न कोई आफताब रहा उनकी महोब्बत के हम मकरूज़ हो गए उनका दो पल का प्यार हम पर उधार रहा वेवफाई से भरी दुनिया में हम वफा को तरस गए अब तो खुद पर भी न हमें एतबार रहा शम्मा के दर […]

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कैसे करें शिकवे

कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे उनकी हर मासूम खता के हम खिदमतगार है

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वो आये कभी पतझङ कभी सावन की तरह

वो आये कभी पतझङ कभी सावन की तरह जिंदगी हमें मिली हमेशा बस उनकी तरह फूलों के तसव्वुर में भी हुआ उनका अहसास आये वो मेरी जिंदगी में खिलती कली की तरह जब से दी जगह खुदा की उनको दिल में हमने याद करना उनको हो गया इबादत की तरह डूब गया दिल दर्द ए […]

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एक मुलाकात की तमन्ना मे

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे आप हमारी हकीकत तो बन न सके ख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल का बिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के […]

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poem --aaj ki shaam

आज की शाम

कटती रही जिंदगी सूखी द्ररारों से होकर, अब की सावन में डूब जाने को जी करता है, कोई मस्तानी बारिश आ जायें कहीं से, उसमें घुल जाने को जी करता है | आज की शाम आज की शाम शमाँ से बाते कर लूं उसके चेहरे को अपनी आखों में भर लूं फासले है क्यों उसके […]

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