“मिट्टी का तन,मस्ती का मन,
क्षण भर जीवन-मेरा परिचय !”
– हरिवंशराय बच्चन

 

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  • भटकते फिर रहे हैं जंगलों में शांति के पंछी,
    इन्हें दो आसरा मत व्यर्थ में बातें बनाओ तुम,

    सरकते जा रहे इन पेड़ों के घरोंदों से ये पंछी,
    इन्हें दो सहारा मत अर्थ की रातेँ बनाओ तुम,

    हो चुकी कैद ऐ बा-म […]

  • कभी दिल से दिल मिलाकर तो देखो
    उस के लिए अपने अरमान जगाकर तो देखो
    जालिम आंखों से तो हर कोइ मुमुस्कुरा लेता है
    लेकिन कभी मोहब्बत की राहो मे आकर तो देखो

    जो बात खामोसी मे है वो बात लब्ज़ों में कहा
    दिल के अरमा […]

  • ये झुकी हई आंखों से मानो सुनहरी शाम सी लगती हो
    ये हसीन चेहरा एक खिलता गुलाब सी लगती हो
    किसी की जान न ले लेना आपकी मुसकान की तलवार से
    हर मेहखाना का कभी न उतरने वाला शराब सी लगती हो

  • ये प्यारी मुस्कान आपकी पहचान बन जाए
    खिलता चेहरा लोगो के लिए ये शराब बन जाए
    ये होठ ये पलकें और ये गाल मानो मुझसे यह कह रहे हैं
    की खोजा इन सब में और तू मेरा गुलाम बन जाए

    ये झरने ये परिंदे और हवा के झोंके, […]

  • पतंगे को दीपक की आहोशी में जाकर अच्छा लगा,
    ज़िन्दगी को मौत की मदहोशी में आकर अच्छा लगा,

    बन्द रही थी सर्द रातों में कहीं वीराने में जो मोहब्बत,
    आज खुलेआम उसे गर्मजोशी में आकर अच्छा लगा,

    टोकते रहे सभी मेर […]

  • बस यूँही हम मिले और मिलते रहे,
    थे कली फिर भी फूलों से खिलते रहे,

    रिश्ते जितने ही हमसे उलझते रहे,
    उतना ही प्रेम में हम सुलझते रहे,

    रोका हमको बहुत हम रुके ही नहीं,
    हम तुम्हे हमसफ़र अपना बुनते रहे, […]

  • अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं,
    खुद ही के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं,

    हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के,
    वहीं हर मौसम में सरहद पर लहराता रहा हूँ मैं,

    सो […]

  • एक माँ की गोद में एक माँ के लाल आ गए,
    दोनों ही माँ की आँखों में आसूँ हाल आ गए,

    रंग माथे दुरंगा लगा कर ख़ुशी से भेजा जिन्हें,
    वो लिपटकर तिरंगे में आज बदली चाल आ गए,

    सरहद पे रहे हथेली पर सांसों का द […]

  • “नव वर्ष की शुभकामनाएं ”
    —————————
    नव वर्ष की शुभकामनाएं /
    बच्चों में उत्साह जगाएं |
    प्रांगन मंदिर संस्कृति अपनाएँ /
    देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ ||

    भगवा ध्वज की पताकायें | […]

  • “पुलवामा शहीदों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली”

    पीठ पे वार करना, तुम्हारी पुरानी कुनीति है।
    आमने – सामने की रण, तुमने कब जीती है।

    कायरता के प्रमाण से तुम्हारे, अनभिज्ञ नहीं,
    पराजय की, सदैव तुम्हारे […]

  • सच की दीवारों पर झूठ की तस्वीरें दिखाई गईं,
    जब भी सर उठाया तो बस शमशीरें दिखाई गई,

    बैठा ही रहा मैं भी शहंशाहों सा चौकड़ी लगाकर,
    एक के बाद एक मुझे सबकी तकदीरें दिखाई गईं।।

    राही अंजाना

  • इक पूरा इंसान था ये सारा जहान
    एक हाथ काट गया बंगाल
    और दूसरे हाथ पाकिस्तान
    बिच में रह गया मेरा भारत महान

    कश्मीर पर हमला करके क्या करता है तू खुद पे गुमान
    दूध के बदले जो खीर देता वही है मेरा हिंदुस्थान

  • हसीनों से क्या माँगे कोई जो नज़र ही नहीं मिलाती
    मर मिटे उसके लिए कोई जो जहर ही नहीं पिलाती !

  • प्यार करने की कोई वजह नहीं होती
    दिलजलों के लिए कोई जगह नहीं होती !

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