“बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए
इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए”
– कैफ़ी आज़मी

 

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‘फ़ोटो पर कविता’ : साप्ताहिक कविता प्रतियोगिता

पिछले सप्ताह के विजेता – राही अंजाना(कविता-फुलझड़ियाँ)

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Latest Activity

  • बन्द मुट्ठी में हैं मगर कैद में नहीं आने वाली,
    हाथों की लकीरों की नर्मी नहीं जाने वाली,

    आलम सर्द है मेरे ज़हन का इस कदर क्या कहूँ,
    के ये बुढ़ापे की गर्मी है यूँही नहीं जाने वाली,

    जमाकर बैठा हूँ आज मैं भ […]

  • मैं तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ?
    मैं तड़पाती यादों की जागीरों का क्या करूँ?
    मैं अश्कों को पलकों में रोक सकता हूँ लेकिन-
    मैं दर्द की लिपटी हुई जंजीरों का क्या करूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मैं तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ?
    मैं तड़पाती यादों की जागीरों का क्या करूँ?
    मैं अश्कों को पलकों में रोक सकता हूँ लेकिन-
    मैं दर्द की लिपटी हुई जंजीरों का क्या करूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • पत्थरों की नगरानी में शीशे के दिल रख दिए,
    इस नज़्म ऐ जवानी में ये किसने कदम रख दिए,

    मशहूर अँधेरे बाज़ार में जो मोल लग चुका था मेरा,
    इस ज़ख्म ऐ निशानी में ये किसने मरहम रख दिए,

    आहिस्ता-आहिस् […]

  • तरकीब कोई और ढूंढो ऐसे तो नज़र नहीं आने वाला,
    छुप कर बैठा है जो अंदर वो तो बाहर नहीं आने वाला,

    गहरा समन्दर है बहुत मन के भीतर हम सबके कोई,
    बिना डूबे तो देखो अब कोई तैर कर नहीं आने वाला,

    फांसला है मीलों […]

  • दिल के मेरे ताले की अजीज़ चाबी ले गया कोई,
    उम्र भर के लिए जैसे बेताबी दे गया कोई,

    शरारत कुछ ऐसी मुझसे छिप कर गया कोई,
    के अच्छे खासे दिल को खराबी दे गया कोई,

    महफूज़ रखे थे जो मन के दरवा […]

  • जितना भी देखा है मनो उतना ही कम देख है,
    मैंने इस दुनियाँ की आँखों में कितना कम देखा है,

    सड़कों पर पनपती इन बच्चों की कहानी से,
    किरदार जब भी देखा अपना मैंने विषम देखा है,

    बेबस रिहाई की उम्मीद में ज़िन्दगी […]

  • बहारों को रहने के लिए पतझड़ की जरूरत होती हैं ‌
    खुशियों को पाने के लिए दुख सहने की क्षमता होती है
    सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत की जरूरत होती है
    हमें जिंदगी में साथ की अहमियत समझनी होगी क्योंकि हमारे जनाजे […]

  •  

    आसमाँ छोड़ जब ज़मी पर उतरने लगती हैं फुलझड़ियाँ,
    हाथों में सबके सितारों सी चमकने लगती हैं फुलझड़ियाँ

    दामन अँधेरे का छोड़ कर एक दिन ऐसा भी आता है देखो,
    जब रौशनी में आकर खुद पर अकड़ने लगती हैं फुलझड़ियाँ, […]

  • chhavi wrote a new post, love 1 week, 6 days ago

    tujhe paya to ye jana h
    aaj tak sab pakr bhi kuch na paya tha
    mile hai tujhe to pyar samajh aaya
    jis din se tumne humne apna mana h
    iss dil ne bas tujhe he aapnaya

  • सच होते जा रहे हैं मेरे ख्वाब आहिस्ता आहिस्ता,
    वो दे रही मेरी बातों के जवाब आहिस्ता आहिस्ता,

    सालों से बेकरार किया है  मेरे दिल को जो उन्होंने,
    लूँगा मैं उनसे अपना यह हिसाब आहिस्ता आहिस्ता, […]

  • हाथों की लकीरों की आवाज़ सुनानी होगी,
    अब दिल में छुपी जो हर बात बतानी होगी,

    खामोश रहने से कुछ मिलता नहीं सफ़र में,
    अब खुद से ही खुद को पुकार लगानी होगी,

    अंदाज़ यूँही तेरा समझ जाये वो महफ़िल ये नहीं,
    म […]

  • तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका,
    तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका,

    बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर,
    तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं उतार न सका।।
    राही (अंजाना)

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