“इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद”
– कैफ़ी आज़मी

 

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  • तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका,
    तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका,

    बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर,
    तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं उतार न सका।।
    राही (अंजाना)

  • तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका,
    तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका,

    बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर,
    तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं उतार न सका।।
    राही (अंजाना)

  • चाहे बिक जाएँ मेरी सारी कविताएं पर,
    मैं अपनी कलम नहीं बेचूंगा,

    चाहे लगा लो मुझपर कितने भी प्रतिबन्ध पर,
    मैं अपने बढ़ते हुए कदम नहीं रोकूँगा,

    बिक ते हैं तो बिक जाएँ तन किसी के भी,
    पर मैं अपनी सर ज़मी […]

    • वाह बहुत सुन्दर रचना!
      और सपत इसी पर अटल रहे और निरंतर प्रयास करते रहे लेखन का जिससे समाज को एन नया ऐना (दर्पन) मिल सके।।

  • Loving you endlessly
    broke my heart ruthlessly

    Little was I aware
    you were someone to beware

    Once my heart danced in joy
    now my heart bleeds in pain

    You were the centre of my universe
    and I was […]

  • मेरे दर्द को तेरा अफ़साना याद है।
    मेरे ज़ख्म को तेरा ठुकराना याद है।
    लबों को खींच लेती है पैमाने की तलब-
    हर शाम साक़ी को मेरा आना याद है।

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • ज़माने के आईने में चेहरे सभी अजीब दिखते हैं,
    सच से विलग मानों जैसे सभी बेतरतीब दिखते हैं,

    जब भी खुद को खुद ही में ढूंढना चाहते हैं हम,
    अपने ही चेहरे पर गढे कई चेहरे करीब दिखते हैं,

    ये कैसी ता […]

  • यार दफन करना मुझे
    आग तोह तेरे पास भी नहीं
    होता तोह आज यह नौबत ना आती

    यार फूलों से सजाना नहीं
    कुछ तोह अपने पास रख देना
    कुचलने पढ़ अपने मरहम पढ़ ओढ़ लेना

    यार रोना नहीं मेरे मौत पढ़
    खुश तोह अपने मौत पढ़ भी ह […]

  • Jalte hue abr ko zehar se bacha lo
    Fiza ye meharban, kal rahe na rahe

    Aab ko tezab ke kahar se bacha lo
    Dariya ki fariyad, kal rahe na rahe…

    Azadi ka saaz bulandi se saja lo
    Inqalabi ye awaaz, kal rahe […]

  • एक प्रश्न है मुझे,
    ये इंसान क्या हो गया है तुझे?
    क्यों कर रहा है ऐसे काम,
    जिससे हो रहे हो बदनाम।
    क्या हक़ है तुझे,
    कर रहा इस सृष्टि को नष्ट,
    ये इंसान होगा तुझे ही कष्ट।
    मैंने तम्हे बनया ह […]

  • तुम शान थी मेरी ,
    तुम मान थी मेरी ,
    तुम अभिमान थी मेरी ,
    इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी !
    जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने ,
    परिवार में बेटो के चाह में पागल ,
    पर […]

  • हाँ, नहीं हो तुम साथ मेरे ,
    पर क्यों लगता है तुम पास हो मेरे !
    हर घड़ी हर पहर जिंदिगी लगाती है अब ज़हर,
    तेरी ये नाराज़गी, और कहर लगती है धुप की दोपहर!
    तो क्या हुआ तुम ने छोड़ दिया साथ मेरा ,
    अब मान लिया […]

  • मेरी पहली कविता
    बेनाम बच्चे
    एक सुबह , स्कूल की सैर,
    उस दिन रुक गये मेरे पैर।
    देखा कुछ ऐसा,
    विश्वास नहीं हुआ वैसा।
    छोटे – छोटे हाथों में बड़े – बड़े प्याले,
    खोटे सिक्कों से भरे हुए थाले।
    आखों में झलकती पेट की भूख,
    परिवार के जिम्मेदारी में निभाते सुख – दुख।
    ऐसे बच्चें जिनके शौक नहीं होते,
    हां, हां वहीं बच्चे…[Read more]

  • No matter what you do , not even how you do .
    Life always has a clue , to let your sky blue.

    All matters are the days ,when soul and mind says .
    To burn the life thine, and let the world shine .

    Day night […]

  • मैं नन्ही प्यारी बच्ची थी , दिलो दिमाग से सच्ची थी।

    दो लड़के मेरे साथी थे ,
    मेरे दीपक के बाती थे।

    पायल मै खनकाती थी,
    संग उनके नाचती गाती थी।

    संग उनका रास ही आता था , समाज का भय ना सताता था।

    उम […]

  • हमेशा किसी की तलाश रहती है मुझे
    लगता है जो कुछ है वो अधूरा है
    अल्फ़ाजों में कहां समाता है
    जो जहन में गूंजता है वो ही पूरा है

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