Saavan

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Poet:

काली छाया    ख़ुद को पाने की राह में, ध्यान लगा जो ख़ुद में खोया, अन्तर मन में उतरा मैं जब, अंधकार में ख़ुद को पाया , अन्दर काली छाया देख के, ख़ुद को गर्त में डूबा पाया , खुद…

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जब से तुझको पाया है , जिव देखो तुझ्सा लगता है , दुनियाँ मानो शीश महल , हर चेहरा ख़ुद का लगता है I                                                                                                                                          …… यूई

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रिश्तों की मौत   रिश्तों के मरने का है अपना ही अंदाज़ तासीर मरे रिश्तों की है लम्बी बीमारी सी पल पल मारती पर मरने नही देती मरा हुआ रिश्ता मरा हुआ इनसान जान दोनों में नही होती फर्क सिर्फ़…

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अधूरे ख्वाब   थे ख्वाब जो चुन-बुन सजाए हमनें पा मुझको तन्हा , बहुत तड़पाते हैं . कारवाँ तेरी यादों का लंबा है , या मेरे ग़मों की रात गहरी है , दशकों बीते, ना क्योँ यह मिटते हैं .…

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चौराहा   बीच चार राहों के , वोह मुकाम , रुक कर जहां, एक राह चुनता इंसान . ऐसे कितने चौराहों से, गुजरती जिंदगी़ , चुनते हुए राहें, लिखती दास्ता अपनी .   कितने चौराहों पे, ख़ुद छोड़ दी जो…

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Poet:

मैं कभी-कभी निकलता हूँ जमाने में! शाँम-ए-गुफ्तगूं होती है मयखाने में! #पैमाने थक जाते हैं सब्र से मेरे, वक्त तो लगता है ख्वाब को जलाने में! Written By #महादेव

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दिल-ए-ज़िगर ……              मेरी गुस्ताखिॅया अंदाज़–ए–इश्क थी मेरी मेरी शोखियाँ दीदारे–ए–खुदा थी तेरी मेरी वही दिल-ए-ज़िगर की शोखी पे क्यों आज बिखर गये सब जज़्बात   कहीं ऐसा तो नहीं, तू आज इंतज़ार में था अपने दिल-ए-कायर की बेवफ़ाई को…