“इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद”
– कैफ़ी आज़मी

 

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  • Jalte hue abr ko zehar se bacha lo
    Fiza ye meharban, kal rahe na rahe

    Aab ko tezab ke kahar se bacha lo
    Dariya ki fariyad, kal rahe na rahe…

    Azadi ka saaz bulandi se saja lo
    Inqalabi ye awaaz, kal rahe […]

  • एक प्रश्न है मुझे,
    ये इंसान क्या हो गया है तुझे?
    क्यों कर रहा है ऐसे काम,
    जिससे हो रहे हो बदनाम।
    क्या हक़ है तुझे,
    कर रहा इस सृष्टि को नष्ट,
    ये इंसान होगा तुझे ही कष्ट।
    मैंने तम्हे बनया ह […]

  • तुम शान थी मेरी ,
    तुम मान थी मेरी ,
    तुम अभिमान थी मेरी ,
    इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी !
    जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने ,
    परिवार में बेटो के चाह में पागल ,
    पर […]

  • हाँ, नहीं हो तुम साथ मेरे ,
    पर क्यों लगता है तुम पास हो मेरे !
    हर घड़ी हर पहर जिंदिगी लगाती है अब ज़हर,
    तेरी ये नाराज़गी, और कहर लगती है धुप की दोपहर!
    तो क्या हुआ तुम ने छोड़ दिया साथ मेरा ,
    अब मान लिया […]

  • मेरी पहली कविता
    बेनाम बच्चे
    एक सुबह , स्कूल की सैर,
    उस दिन रुक गये मेरे पैर।
    देखा कुछ ऐसा,
    विश्वास नहीं हुआ वैसा।
    छोटे – छोटे हाथों में बड़े – बड़े प्याले,
    खोटे सिक्कों से भरे हुए थाले।
    आखों में झलकती पेट की भूख,
    परिवार के जिम्मेदारी में निभाते सुख – दुख।
    ऐसे बच्चें जिनके शौक नहीं होते,
    हां, हां वहीं बच्चे…[Read more]

  • No matter what you do , not even how you do .
    Life always has a clue , to let your sky blue.

    All matters are the days ,when soul and mind says .
    To burn the life thine, and let the world shine .

    Day night […]

  • मैं नन्ही प्यारी बच्ची थी , दिलो दिमाग से सच्ची थी।

    दो लड़के मेरे साथी थे ,
    मेरे दीपक के बाती थे।

    पायल मै खनकाती थी,
    संग उनके नाचती गाती थी।

    संग उनका रास ही आता था , समाज का भय ना सताता था।

    उम […]

  • हमेशा किसी की तलाश रहती है मुझे
    लगता है जो कुछ है वो अधूरा है
    अल्फ़ाजों में कहां समाता है
    जो जहन में गूंजता है वो ही पूरा है

  • सब कुछ अपना छूट गया है छूट गई लरिकाइं भी
    बचपन जिसके साथ गुजारा छूट गया वो भाई भी
    माँ का प्यारा आँचल छूटा छूट गई अँगनाइ भी
    पोखर ताल तलैय्या छूटे छूट गई अमराई भी
    क्या क्या छूटा क्या बतलाऊँ रोजी रोटी पान […]

  • हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का
    एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का
    बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते
    यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िंदगी का
    जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से बिताओ
    रोने का समय कहां, सिर्फ मुस्कुराओ
    चाहे य […]

  • जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे,
    कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे,

    जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे,
    सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये थे,

    सच की ताक […]

  • साहिर तेरी आँखों का जो मुझपर चल गया,
    खोटा सिक्का था मैं मगर फिर भी चल गया,

    ज़ुबाँ होकर भी लोग कुछ कह न सके तुझसे,
    और मैं ख़ामोश होकर भी तेरे साथ चल गया।।

    समन्दर गहरा था बेशक मगर डुबो न सका,
    के तेरे […]

  • Kabhi kabhi Mai sochta hoon
    Mai kya kar Sakta hoon
    Samaj ki rudhiyo se
    Bandkar jee Sakta hoon
    Julm sah Sakta hoon yaa
    Julm karke khus ho Sakta hoon
    Sach bataye Gaye jhooth Ko
    Apna Sakta hoon yaa
    Soup […]

  • मोहब्बत के ख्वाब ने ये कैसा इत्तेफ़ाक कर दिया,

    दिल्लगी ने धड़कन को ही दिल के खिलाफ़ कर दिया,

    अच्छी ख़ासी तो चल रही थी ज़िन्दगी ‘राही’ अपनी,

    फिर क्या हुआ जो इस नशे ने तुम्हें ख़ाक कर दिया।।

    राही (अंजाना)

  • मैं ख़ुद को ख़ुद से बाहर निकालना चाहता हूं,
    मैं कुछ करके दिखाना चाहता हूं।
    कोई मेरा साथ दे ना दे,
    मैं ख़ुद का साथ ख़ुद पाना चाहता हूं।

    मेरा दिल बहुत डरता है,
    कभी कभी
    दिमाग भी उलझता है।
    कभी कभी
    दिल और दिमाग […]

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