चमकता जिस्म, घनी जुल्फ़े, भूरी भूरी सी आंखे
यही है वो मुज़रिम जिसने कत्ल ए दिल किया है |

सावन काव्य प्रतियोगिता : मुखौटा का परिणाम

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  • Unknown writer became a registered member 6 hours, 4 minutes ago

  • मैं तेरी मुहब्बत को पाना चाहता हूँ!
    मैं तेरी निगाहों में आना चाहता हूँ!
    दीवानगी मचल रही है तेरी जिगर में,
    मैं तुमको जिन्दगी में लाना चाहता हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • सोंचा नहीं था समन्दर के इतना किनारे निकल जाऊंगा,
    जिनसे डरता था उन्हीं लहरों के सहारे निकल जाऊंगा,

    जहाँ बनाता ही नहीं बह जाने के खौफ से रेत के मकाँ कोई,
    वहीं शौक से किरदार को अपने यूँही जमाकर निकल जाऊंगा॥
    राही (अंजाना)

  • वक़्त ख़राब हो सकता है , पर किस्मत कभी ख़राब नहीं होती !
    क्युकी किस्मत हम खुद बनते है , पर वक़्त पहले से बना होता है !
    इसलिए अपने पर भरोसा रखो , दुसरो पर नहीं !

  • मैं तेरे दर्द को ईनाम समझ लेता हूँ!
    मैं तेरी याद को पैगाम समझ लेता हूँ!
    ढूढता हूँ जब भी मदहोशी पैमानों की,
    मैं तेरी अदाओं को जाम समझ लेता हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तिरंगे के नीचे शान्ती के घोष में,

    मिशाले जलाली खूब हमनें!!

    मान मर्यादा स्वाभिमान का आवाहन,

    हाथो में बंदूके तलवारें उठाना हमकों!!

    इतियास दुहरा रहा गजनी की चाल,

    फिर से वगदाद […]

  • जब मेरी तेरी बात हो, लब्ज़ों को आराम हो
    बस आँखों ही आँखों में,अपनी दुआ सलाम हो

    कभी दूर से देख के मुझको, मन ही मन मुस्काती है,
    और बुलाती पास मुझे, पलकों के परदे सरकाती है
    जैसे हर निमिष के संग, ढली सुबह से […]

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