“हरेक चहरे को ज़ख़्मों का आइना न कहो,
ये ज़िंदगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो|”
– राहत इंदौरी

 

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  • बातों में से बात निकलती है,
    चुप रहता हूँ आवाज़ निकलती है,
    शब्दों का ही खेल है मानो,
    जैसे समन्दर से सौगात निकलती है।

  • सड़कों पर खेल खुलेआम खेले जाते थे,
    होकर मिट्टी के रंग हम घर चले जाते थे,

    पिता की डाँट जब पड़ती थी अक्सर,
    माँ के आँचल में चुपके से हम छिप जाते थे,

    मुँह मोड़ लेते हैं जहाँ आज ज़रा सी बात पर,
    वहीं दोस् […]

  • तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे,

    तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे,

    साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी,

    रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा करते थे,

    एक तुम तकिये पर सर […]

  • मैं प्यादा हूँ मुझे प्यादा ही रहने दो,
    यूँ हाथी और घोड़ों से न भिड़ाओ तुम,
    मैं तो शतरंज का खिलाड़ी हूँ दोस्त,
    मुझे सांप सीढ़ी में न उलझाओ तुम।।
    राही (अंजाना)

  • जब तुमने मिलना छोड़ दिया,
    दिल ने धकड़ना छोड़ दिया,

    राह फ़िज़ाओं ने बदली
    पुष्पों ने खिलना छोड़ दिया,

    बहक उठा मन का पंछी
    कदमों ने लहकना छोड़ दिया,

    जब से रुस्वा हुई मन्ज़िंल
    “राही” ने मचलना छोड़ दिया।।

    राही (अंजाना)

  • Badalna nahi aata humein mausam ki tarah,
    Har ek mausam mein tera intezaar karte hain..
    Na tum samjh sako
    jise Kasam tumhari tumhe itna pyaar karte hain.

  • खुदा ने जब इश्क़ बनाया होगा,.,.,
    तो खुद आज़माया होगा,.,.,
    हमारी तो औकात ही क्या है,.,.,
    इस इश्क़ ने खुदा को भी रुलाया होगा

  • तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे,

    तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे,

    साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी,

    रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा करते थे,

    एक तुम तकिये पर सर […]

  • लड़ते लड़ते ज़माने की रीतिरिवाजों से थक गया हूँ,
    मगर कमाल ये ही की मैं अब भी किताब पढ़ता हूँ।।
    राही (अंजाना)

  • सोंचता हूँ अपनी एक नई दुनियाँ बना लूँ,
    जिसमे अपनी ही मनचाही तस्वीरें लगा लूँ,
    खुशियों के बिस्तर बिछा लूँ और दुखों को अपने घर का रस्ता भुला दूँ,
    सूरज चँदा को अपनी छत पर लटकाकर,
    जब चाहे ब […]

  • न दिन खरीद पाओगे न रात बेच पाओगे,

    इन हाथों में न तुम अपने हालात बेच पाओगे,

    खरीदने की चाहत जो तुम दिल में सजाये हो,

    इन आँखों से तुम न ये ख्वाब बेच पाओगे,

    खरीद लो सरे बाजार तुम मेरी यादें मगर,

    मेरे […]

  • अपनी मोहब्बत की इन्तहा तुम्हें क्या बताऊँ,
    गर हवा भी तुम्हें छूकर गुजरे तो शोले भड़कते हैं।।
    राही (अनजाना)

  • गीत होठो पे समाने आ गये है
    प्रीत भावो के सजाने आ गये है
    🖋
    चाह ले के आस छाके गा रही है
    साज ओढे ताल लुभाने आ गये है
    🖋
    रीत गाने के सदाये दे रहे है
    भाव ले के तान भाने आ गये है […]

  • आँखों की पहुंच से बाहर देखना होगा,
    एक बार तो समन्दर पार देखना होगा,
    मेरे आईने में वो मुझे नज़र नहीं आती,
    उसके आईने में मुझे यार देखना होगा,
    राही (अंजाना)

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