बरसते सावन में कभी तो भीगती होगी वो
इन बादलों की बूंदो में एक अश्क हमारा भी हो

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  • वर्जिन

    मैं वर्जिन हूँ

    विवाह के इतने वर्षों के पश्चात् भी

    मैं वर्जिन हूँ

    संतानों की उत्पत्ति के बाद भी।

    वो जो तथाकथित प्रेम था

    वो तो मिलन था भौतिक गुणों का

    और यह जो व […]

  • तन्हा रात हुई है फिर कुछ होने को है!
    किसी की यादों में जिन्दगी खोने को है!
    चाँद तमन्नाओं का फिर आया है नजर,
    मेरी जुस्तजू इरादों की रोने को है!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • “**प्रात:अभिवादन”**
    ****^^^^***
    तेरी इक मुसकराहट पर बहारें
    लौट आती हैं ।
    तेरी इक मुसकराहट पर बहारें ,
    गुल खिलाती हैं ।
    महक जाता है तन मन और
    हर उजड़ा हुआ उपवन ,
    प्यार की वसंती र […]

  • पीली-पीली भीनी-भीनी सरसों की खुशबू ले कर आया है,

    गुलशन के फूलों पर जैसे रंग बसन्ती छाया है,

    ठिठुर रहे थे सर्दी से जो सिकुड़ -सड़क किनारों पर,

    उजला उजला सूरज सबको राहत देने आया है,

    खबर मिली है पीपल पर कोपल, नीम बौर पर छाया है,

    छिपकर बैठे थे जो पंछी सबने मिल पंख फैलाया है,

    कोयल के स्वर ने हर जन के कानों को सहलाया है,

    हर्षित मन फुलवारी में…[Read more]

  • जिंदगी का खेल अब तक समझ न आया
    वो दाव खेलते रहे, मैं हारता रहा

  • सुनो अमृता!

    सुनो अमृता!
    अच्छा हुआ
    जो तुम लेखिका थी
    क्योंकि अगर तुम लेखिका न होती
    तो निश्चित तौर
    तुम्हें चरित्रहीन और
    बदलचलन की श्रेणी में रखा जाता।

    अच्छा हुआ तुम असाधारण थी
    क्योंकि साधा […]

  • आपके-गीत-क्रमांक-20- दिनांक-16 -01-2018
    खूँटी और दीवार
    गीतकार-जानकी प्रसाद विवश
    साथ तुम्हारा मेरा…साथ तुम्हारा मेरा जैसे
    खूँटी ओर दीवार का। […]

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