“अश्क आंखों में कब नहीं आता
लहू आता है जब नहीं आता”
– मीर तक़ी मीर

 

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‘शहीदी’ काव्य प्रतियोगिता

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Latest Activity

  • कब तक जिए हम तेरी यादों के सहारे
    तेरे बिना नींद भी आती नहीं यादों के सहारे
    तेरे बिना जीना नहीं ये माना था मैंने
    पर तेरे बिना पड़ेगा जीना ये न जाना था मैंने,
    तेरे ख्वाबों को सजा कर एक-एक पल संजोए थे म […]

  • Poonam singh wrote a new post, Pulbama 9 hours ago

    छोड़कर मुझे तुम इतनी जल्दी क्यों चले गए ,
    अभी तो सुख के पल आए ही थे अभी ही चले गए ,
    जाने किसकी बुरी नजर लगी सब सपने अधूरे कर चले गए,
    जी रही हूं तुझ बिन अधूरी अधूरे सपने लिए ,
    जी रही हूं तेरी यादों क […]

  • देवी changed their profile picture 9 hours, 57 minutes ago

  • देवी‘s profile was updated 10 hours ago

  • Lotus Bee became a registered member 11 hours, 35 minutes ago

  • फिर वही संगी हमारा फिर वही साथी मिले

    हो जनम यदि पुनः तो, मुझे फिर वही सहपाठी मिले |

    लड़ता ही रहता है वह हर समय हर मोड़ पर

    संघर्ष में संग रहता सदर ,जाता न मुझको छोड़ कर |

    हिम्मत -हौसले में है ,उसका त […]

  • क्यों तुम मेरी यादों में ग़म कर जाते हो?
    आकर मेरी निगाह को नम कर जाते हो।
    दर्द की आहट से डर जाती है ज़िन्दग़ी-
    मेरी ख़ुशियों के पल को कम कर जाते हो।

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • क्यों तुम मेरी यादों में ग़म कर जाते हो?
    आकर मेरी निगाह को नम कर जाते हो।
    दर्द की आहट से डर जाती है ज़िन्दग़ी-
    मेरी ख़ुशियों के पल को कम कर जाते हो।

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • Yeh jo kismat ke mansube jane kya ye soch rahe hain
    Akele milu jo inse kabhi mai lagta hai ye noch rahe hain
    Raah badi thi lambi yaaron mar mar kar ye kaat rahe hain
    Humbhi kuch sapne lekar jiwan rekha jaanch rahe hain

  • utkarshsingh became a registered member 1 day, 8 hours ago

  • मजबूरियों से भरे कटोरे के चुल्लू भर पानी को देख,
    समन्दर भी हार कर एक दिन आंसुओं में डूब गया।

    राही अंजाना

  • तारीफ़ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है ।
    नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है ।

    इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है,
    तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है ।

    माना बरसों पुराना, इश्के-फसाना हमारा,
    पर आज […]

  • नक़ाब से जो चेहरा, छिपा कर चलती हो।
    मनचलों से या गर्द से, बचा कर चलती हो।

    सरका दो फिर, गर जो तुम रुख से नक़ाब,
    महफिल में खलबली, मचा कर चलती हो।

    तेरे आने से पहले, आने का पैगाम आता है,
    पाज़ेब की छन – […]

  • अदम्य साहस की पहचान,
    भारत के ये वीर जवान ,
    मातृभूमि की रक्षा के लिए,
    जान हथेली पर रखकर,
    ये कर देते जीवन कुर्बान,
    ये है अभिनंदन जैसे वीर जवान ,
    हमारे पूज्य है ये वीर जवान,
    पर है कुछ लोग यहां […]

  • उसकी आँखों में मेरी आँखें उतर कर भूल गईं,
    दिल ओ जिगर के पैमाने पे असर कर भूल गईं,

    गहरा समन्दर था ये गुमान टूट कर बिखर गया,
    उस रोज़ उसकी अलकों से सफर कर भूल गईं।।

    राही अंजाना

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