Tariq Azeem Tanha

  • इश्क़ में हैं गुज़रे हम तेरे शहर से तनहा,
    महब्बत के उजड़े हुए घर से तनहा!

    हम वो हैं जो जीये जिंदगी भर से तनहा,
    और महशर में भी जायेंगे दहर से तनहा!

    तख़्लीक़े-शेर क्या बताऊ कितना गराँ हैं,
    होना पडे हर महफ़िल-ओ- […]

  • पैदा कलम से कोई कहानी की जाए,
    फिर जज़्बातों की तर्जुमानी की जाए!

    खिलावे हैं खुद भूखे रहकर बच्चों को
    माँ-बाप के नाम ये जिंदगानी की जाए!

    ग़म से तो हाल ही में ही बरी हुए हम,
    मुब्तिला होके बर्बाद जवानी […]

  • बिछड़ा जो फिर तुमसे तनहा ही रह गया,
    ग़म-ए-हिज़्र मे अकेले रोता ही रह गया।

    मुसलसल तसव्वुर में बहे आँसू भी खून के
    शब् में तुझे याद करता, करता ही रह गया!

    मैंने शाम ही से बुझा दिए हैं सब चराग,
    शाम […]

  • साहब की हवाई सैर पर एक
    मतला और एक शेर देखे।

    कू-ए-वतन में उड़न तश्तरी मोड़िये ना,
    साहब विदेश घूमने की जिद छोड़िये ना!
    इंसाफ दिलाके आसिफा की रूह को फिर,
    अनशन स्वाति मालिवाल का तोड़िए ना!

    तारिक़ अज़ीम ‘तनहा’

  • वाह वाह क्या कहने मोहतरमा। बहुत खूब

  • Tariq Azeem Tanha‘s profile was updated 6 months ago

  • सोज़िशे-दयार से निकल जाना चाहता हूँ,
    हयात से अदल में बदल जाना चाहता हूँ!

    तन्हाई ए उफ़ुक़ पे मिजगां को साथ लेके,
    मेहरो-माह के साथ चल जाना चाहता हूँ!

    आतिशे-ए-गुज़रगाह-ए-चमन से हटकर,
    खुनकी-ए-बहार में बदल जा […]

  • मयस्सर कहाँ हैं सूरते-हमवार देखना,
    तमन्ना हैं दिल की बस एक बार देखना!

    किसी भी सूरत वो बख्शा ना जायेगा,
    गर्दन पे चलेगी हैवान के तलवार देखना!

    सज़ा ए मौत को जिनकी मुत्ताहिद हुए हैं हम
    आ जायेगी उनक […]

    • तेरे ख्याल में दिन रात एक है हमारे
      जुस्तुजु है ख्याल को हकीकत होते एक बार देखना