Mithilesh Rai

  • मुझको फिर भूली हुई बात याद आयी है!
    चाहत की सुलगी हुई रात याद आयी है!
    मैं मुन्तजिर हूँ आज भी दीदार का तेरे,
    मुझको फिर तेरी मुलाकात याद आयी है!

    #महादेव_की_कविताऐं’

  • तेरी याद जब भी आस पास होती है!
    मेरी जिन्दगी खामोशी से रोती है!
    घेर लेता है मुझे बेबसी का मंजर,
    आरजू खुद को अश्कों में डूबोती है!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • जो साथ नहीं देते वे रूठ जाते हैं!
    रास्तों में अक्सर हमसे छूट जाते हैं!
    दूरियाँ बन जाती हैं दिलों के दरमियाँ,
    हौसले भी जिन्दगी के टूट जाते हैं!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • मैं भूला था कभी तेरे लिए जमाने को!
    मैं भूला था कभी अपने आशियाने को!
    भटक रहा हूँ जबसे गम के सन्नाटों में,
    हर शाम ढूँढता हूँ जामे-पैमाने को!

    मुक्तककार-#महादेव'(24)

  • तेरी चाहत मेरे गुनाह जैसी है!
    तेरी चाहत दर्द की आह जैसी है!
    आँखों में आहट है ख्वाबों की लेकिन,
    तेरी चाहत सितम की राह जैसी है!

    मुक्तककार- #महादेव'(22)

  • यूँ ही दर्द हमें राहों में कबतक मिलेंगे?
    हम खौफ के सन्नाटों में कबतक चलेंगे?
    कदम आरजू के कभी रुकते नहीं मगर,
    हम शाम की तन्हाई में कबतक जलेंगे?

    मुक्तककार- #महादेव’

  • मेरी कोशिश तुमको पाने की है!
    अपने करीब तुमको लाने की है!
    कबतक सह पाऊँगा बेताबी को?
    तेरी हर अदा तो सताने की है!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • मैं जिन्दगी को तन्हा बिताता रहता हूँ!
    मैं दर्द को पलकों में छिपाता रहता हूँ!
    चारों तरफ हैं आन्धियाँ हालात की मगर,
    तेरी शमा चाहत की जलाता रहता हूँ!

    मुक्तककार-#महादेव’

  • उठती हुई नजर में एक आशा भी होती है!
    मंजिल को छूने की अभिलाषा भी होती है!
    रोशनी मौजूद है अभी जिन्दगी में लेकिन,
    जज्बों के टूटने की परिभाषा भी होती है!

    मुक्तककार- #महादेव'(27)

  • तेरा ख्याल जख्म के रंगों से भर गया है!
    रूठे हुए नसीब की आहट से डर गया है!
    यादों की जंजीर से जकड़ी है जिन्द़गी,
    चाहत की जुत्सजू से तन्हा मुकर गया है!

    मुक्तककार- #महादेव'(25)

  • उठती नजर में तेरा चेहरा नजर आता है!
    मुझपर तेरे प्यार का पहरा नजर आता है!
    ख्वाबों के दायरे में ठहर जाती है जिन्दगी,
    ख्वाहिशों का हर आलम गहरा नजर आता है!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • कैसे कहूँ कि तेरा दीवाना नहीं हूँ मैं!
    कैसे कहूँ कि तेरा परवाना नहीं हूँ मैं!
    जब छलक रही है मदहोशी तेरे हुस्न से,
    कैसे कहूँ कि आशिके-पैमाना नहीं हूँ मैं!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • Mithilesh Rai commented on the post, 2 weeks, 4 days ago

    बहुत खूब

  • Mithilesh Rai commented on the post, 2 weeks, 4 days ago

    बेहतरीन

  • Mithilesh Rai commented on the post, 2 weeks, 4 days ago

    बे

  • Mithilesh Rai commented on the post, 2 weeks, 4 days ago

    बहुत खूब

  • क्या हुआ अगर मैं खामोश हो गया हूँ!
    जाम के नशे में मदहोश हो गया हूँ!
    भटके हुए पलों में खोया हूँ इसतरह,
    महफिलों में खानाबदोश हो गया हूँ!

    मुक्तककार- #महादेव'(22)

  • बंद हैं आँखें मगर कुछ बोलती रहती हैं!
    राह तमन्नाओं की कुछ खोलती रहती हैं!
    जिन्दा है तेरी आरजू मेरे जेहन में,
    दर्द की लहरें जिगर में डोलती रहती हैं!

    मुक्तककार- #महादेव'(25)

  • Load More