Mithilesh Rai

  • तेरे बगैर आज मैं तन्हाई में हूँ!
    तेरे बगैर दर्द की गहराई में हूँ!
    डूबा हूँ कबसे जाम के पैमाने में,
    मयकशी की झूमती अंगड़ाई में हूँ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • तेरे बगैर आज मैं तन्हाई में हूँ!
    तेरे बगैर दर्द की गहराई में हूँ!
    डूबा हूँ कबसे जाम के पैमाने में,
    मयकशी की झूमती अंगड़ाई में हूँ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • मेरी तन्हाई में जब भी गुजर होती है!
    मेरे ख्यालों में ख्वाबों की सहर होती है!
    दर्द की कड़ियों से जुड़ जाती है जिन्दगी,
    यादों की दिल में चुभती सी लहर होती है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • मेरी तन्हाई में जब भी गुजर होती है!
    मेरे ख्यालों में ख्वाबों की सहर होती है!
    दर्द की कड़ियों से जुड़ जाती है जिन्दगी,
    यादों की दिल में चुभती सी लहर होती है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • मेरे गम को मेरा ठिकाना मिल जाता है!
    तेरे ख्यालों का आशियाना मिल जाता है!
    जब दिल को सताती है प्यास तमन्नाओं की,
    मेरी तिश्नगी को मयखाना मिल जाता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • हवा सर्दियों की पैगामे-गम ले आती है!
    वक्ते-तन्हाई में तेरा सितम ले आती है!
    तूफान नजर आता है अश्कों में यादों का,
    तेरी चाहत को पलकों में नम ले आती है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • हवा सर्दियों की पैगामे-गम ले आती है!
    वक्ते-तन्हाई में तेरा सितम ले आती है!
    तूफान नजर आता है अश्कों में यादों का,
    तेरी चाहत को पलकों में नम ले आती है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • कबतक देखता रहूँ तुमको देखकर?
    कबतक सोचता रहूँ तुमको सोचकर?
    हर साँस गुजरती है मेरे जिस्म की,
    मेरे लबों की राह से दर्द बनकर!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • कभी तो किसी शाम को घर चले आओ!
    कभी तो दर्द से बेखबर चले आओ!
    रात गुजरती है मयखाने में तेरी,
    राहे-बेखुदी से मुड़कर चले आओ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
    #मात्रा_भार_22

  • मेरा हरेक आलम ख्वाब तेरा लगता है!
    तेरा ख्याल सर्दियों में धूप सा जलता है!
    जब भी सताती हैं सरगोशियाँ इरादों की,
    नींद के आगोश में दर्द तेरा चलता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ!
    तेरी तमन्नाओं की जागीर से मिलता हूँ!
    नजरों को घेर लेता है यादों का समन्दर,
    चाहत की बिखरी हुई तकदीर से मिलता हूँ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • तेरी याद में तन्हा होकर रह जाता हूँ!
    तेरी याद में तन्हा रोकर रह जाता हूँ!
    जब भी तीर चुभते हैं तेरी रुसवाई के,
    जाम के पैमानों में खोकर रह जाता हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तेरी याद में तन्हा होकर रह जाता हूँ!
    तेरी याद में तन्हा रोकर रह जाता हूँ!
    जब भी तीर चुभते हैं तेरी रुसवाई के,
    जाम के पैमानों में खोकर रह जाता हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • यादों की राह में सवाल आ जाता है!
    तेरी रुसवाई का ख्याल आ जाता है!
    जब भी ख्वाब आते हैं मेरी आँखों में,
    तेरी जुदाई का मलाल आ जाता है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • मुझसे किसलिए तुम रिश्ता तोड़ गये हो?
    मेरी चाहत को तन्हा छोड़ गये हो!
    यादों की आहट रुला देती है मुझको,
    #साँसे_जिस्म को गमों से जोड़ गये हो!

    #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं

  • कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है!
    हरपल तेरी याद में खुद को तड़पाना है!
    मैं कैसे रोक सकूँगा नुमाइश जख्मों की?
    जब शामे-तन्हाई में खुद को जलाना है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मुझको याद फिर तेरा जमाना आ रहा है!
    मुझको याद फिर तेरा फसाना आ रहा है!
    चाहत की मदहोशी से जागी है तिश्नगी,
    मुझको याद तेरा मुस्कुराना आ रहा है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • होते ही शाम तेरी प्यास चली आती है!
    मेरे ख्यालों में बदहवास चली आती है!
    उस वक्त टकराता हूँ गम की दीवारों से,
    जब भी यादों की लहर पास चली आती है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • पास हो कर भी जरा सा दूर हो तुम!
    हुस्न पर अपने बहुत मगरूर हो तुम!
    तेज हैं तलवार सी तेरी निगाहें,
    बेवफाओं में मगर मशहूर हो तुम!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • जब से लबों पे आया है तेरा नाम फिर से!
    जैसे लबों पे आया है कोई जाम फिर से!
    तेरी याद बंध गयी है साँसों की डोर से,
    मुझको तरसाती हुई आयी है शाम फिर से!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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