Mithilesh Rai

  • मैं तेरे दर्द को ईनाम समझ लेता हूँ!
    मैं तेरी याद को पैगाम समझ लेता हूँ!
    ढूढता हूँ जब भी मदहोशी पैमानों की,
    मैं तेरी अदाओं को जाम समझ लेता हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तुम कभी दिल से न रिश्ता तोड़ देना!
    तुम कभी तन्हा न मुझको छोड़ देना!
    मुश्किल है अब तुम बिन मेरी जिन्दगी,
    #राहे_दर्द पर न मुझको मोड़ देना!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मैं तेरा कबतलक इंतजार करता रहूँ?
    तेरी आरजू को बेकरार करता रहूँ?
    थक गयी हैं कोशिशें मेरी उम्मीदों की,
    मैं तेरे प्यार पर ऐतबार करता रहूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जब कभी तुम मेरी यादों में आते हो!
    धूप सा ख्यालों को हरबार जलाते हो!
    घुल जाती हैं साँसें चाहत के रंग में,
    चाँद की शकल में सामने आ जाते हो!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जब कभी तुम मेरी यादों में आते हो!
    धूप सा ख्यालों को हरबार जलाते हो!
    घुल जाती हैं साँसें चाहत के रंग में,
    चाँद की शकल में सामने आ जाते हो!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • हर शख्स जमाने में बदल जाता है!
    वक्त की तस्वीरों में ढल जाता है!
    उम्मीद मंजिलों की होती है मगर,
    गमों की आग से ख्वाब जल जाता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जो मस्तियों का दौर था वो आज नहीं है!
    अब जिन्दगी में शौक का मिजाज नहीं है!
    टुकड़ों में नजर आती हैं वस्ल की रातें,
    अब जुस्तजू में जोश का अंदाज नहीं है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आज अपने गम को मिटाने निकल पड़ा हूँ!
    आज तेरी याद को भुलाने निकल पड़ा हूँ!
    जाग उठी हैं रौनकें शामे–मयकदों की,
    आज लबों की प्यास बुझाने निकल पड़ा हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आज हवा भी जरा सी नम हो गयी है!
    गमे–जुदाई भी बेरहम हो गयी है!
    धड़कनों में उठ रही है दर्द की लहर,
    आँखों में नींद भी कुछ कम हो गयी है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मैं कभी-कभी निकलता हूँ ज़माने में!
    शामे–गुफ्तगूं होती है मयखाने में!
    थक जाती है महफिल भी सब्र से मेरे,
    वक्त तो लगता है दर्द को भुलाने में!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • मत करो तुम कोशिश जब वो आसान हो!
    खोज लो उजाले जब कभी वीरान हो!
    चाँद खींच लेना प्यार से आगोश में,
    राहे–जिन्दगी न तेरी सूनसान हो!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
    (#मात्रा_भार_22)

    • बहतरीन जी मेरी रचना वतन पर भी कमेन्ट करें जो प्रतियोगिता में है

  • अब दर्द ही तेरा बहाना रह गया है!
    ख्वाबों का ख्यालों में आना रह गया है!
    वक्त ने धुंधला दिया है यादों को मगर,
    दिल में चाहतों का फसाना रह गया है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तन्हा रात हुई है फिर कुछ होने को है!
    किसी की यादों में जिन्दगी खोने को है!
    चाँद तमन्नाओं का फिर आया है नजर,
    मेरी जुस्तजू इरादों की रोने को है!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • कभी न कभी हमको हमारा मिल ही जाता है!
    कभी न कभी हमको सहारा मिल ही जाता है!
    जब भी चल पड़ते हैं कदम हिम्मत की राह पर,
    डूबती कश्ती को किनारा मिल ही जाता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आप जबसे जिन्दगी में मिल गये हैं!
    रास्ते मंजिल के फिर से खिल गये हैं!
    जागे हैं ख्वाबों के पल निगाहों में,
    जख्म भी जिगर के जैसे सिल गये हैं!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • क्यों तुम भटक गये हो वस्ल की राहों में?
    क्यों तुम बिखर गये हो दर्द की आहों में?
    ढूँढती हैं मंजिलें रफ्तार हिम्मत की,
    क्यों तुम नजरबंद हो खौफ की बाँहों में?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जबसे तेरे दर्द का पैगाम आ गया है!
    तबसे मेरी जिन्दगी में जाम आ गया है!
    मैं क्या करूँ नुमाइश अपनी तमन्नाओं की?
    जब तेरा बेवफाओं में नाम आ गया है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तुम मेरी जिन्दगी में खास बन गये हो!
    तुम मेरी मंजिलों की प्यास बन गये हो!
    हर वक्त तड़पाते हो आकर यादों में,
    तुम मेरे दर्द का एहसास बन गये हो!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय (23)

  • तेरा ख्याल मुझको तड़पाकर चला गया!
    अश्कों को निगाहों में लाकर चला गया!
    नींद भी आती नहीं है तेरी याद में,
    करवटों में दर्द को जगाकर चला गया!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • दर्द तन्हा रातों की कहानी होते हैं!
    तड़पाते हालात की रवानी होते हैं!
    कभी होते नहीं जुदा यादों के सिलसिले,
    दौरे-आजमाइश की निशानी होते हैं!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

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