ღღ_आज ना ही आओ मिलने, ये मुलाकात रहने दो;
कुछ देर को मुझको, आज मेरे ही साथ रहने दो!
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अन्धेरों की, उजालों की, हवाओं की, चिरागों की;
या अपनी ही कोई बात छेड़ो, मेरी बात रहने दो!
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मैं सोया कि नहीं सोया, मैं रोया कि नहीं रोया;
और भी काम हैं तुमको, ये तहकीकात रहने दो!
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यूँ तो सैकड़ों रात जागा हूँ, तुम्हारे ही ख्यालों में;
पर सोना चाहता हूँ अब, आज की रात रहने दो!
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जाते-जाते ‘अक्स’, मेरा इक मशविरा है तुमको;
कि इश्क़ करो तो बे-हद, यूँ एहतियात रहने दो!!…#अक्स
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Month: October 2016
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“मुलाकात रहने दो”
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”भौरे गायें “
अब गीत कुसुम कमनीय सूना
मंद -मंद मत मुस्का
रंग -चित्र रच -रच के
इठला और बल खा |
तेरी -मेरी गढ़ी कहानी
उल्लासों से भरी जवानी
कविता में आ गई रवानी
हुआ सबेरा अब कुछ सोचो
क्षणिक विभव है पानी -पानी |
विमल धरा का रूप रंग रस
भू पर पैर की रही निशानी |
रसिक रसीले भौरे आते
प्रीति-प्रतीति पथ दिखलाते
यहाँ वहाँ उपभोग में लेकर
छले-डाले कहाँ तुम जाते ?
बन कोमल कमनीय- कलेवर
देवों के भी मन को भाते |
रसिकों का श्रृंगार सहज बन
आते-जाते औ इतराते
रसिक -रसीली रसिकाओं संग,
हार और उपहार बन जाते |
खुलकर गीत ‘मंगल ‘गाते
अपना रूप -आभार दिखाते ||
https://plus.google.com/collection/kFnskB -
मुक्तक
तेरा ख्याल मुझको सताता रहता है!
तेरा ख्वाब मुझको रुलाता रहता है!
किसतरह भुला दूँ यादों को महादेव?
चाहत का हर मंजर आता रहता है!मुक्तककार- #महादेव’
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सौ सवाल करता हूँ..
सौ सवाल करता हूँ..
रोता हूँ..बिलखता हूँ..
बवाल करता हूँ..
हाँ मैं……….
सौ सवाल करता हूँ..फिर भी लाकर उसी रस्ते पे पटक देता है..
वो देकर के जिंदगी का हवाला मुझको..
और चलता हूँ उन्ही दहकते अंगारों पर..
जब तक..किसी अंगारे सा दहकने न लगूँ..
महकने न लगूँ इत्तर की खुशबू की तरह..
तपकर किसी हीरे सा चमकने न लगूँ..फिर क्यों भला इतना मलाल करता हूँ..
रोता हूँ..बिलखता हूँ..
बवाल करता हूँ..
हाँ मैं……….
सौ सवाल करता हूँ..
– सोनित
www.sonitbopche.blogspot.com -
“हलाला देती बरबादी ?”
“हलाला देती बरबादी ?”
मुद्दा तलाक का तीन तलाक लाना |
बिना विचार किये महिला को हटाना ||
हजरत उमर का था वह रहा ज़माना |
तीन तलाक पर चालीस कोड़ा लगाना ||
किस्सा था पुराना जब दुल्हन का लाना |
खोलकर नकाब उसका घर उसे लौटाना ||
मजहवी बहाना करता रहा है मनमाना |
महिला को अधिकार जनता को दिलाना ||
उपयोग की वस्तु नही! बदला नव ज़माना |
तरक्की पसंद जहां है कुछ करके दिखाना ||
आओ मिल बैठकर परिवार को है बचाना |
परसनलला पुराना . तरक्कीनुमा खजाना ||
साहस से राहत मिले महिला हक़ है लाना |
हिम्मत ले आगे आ खड़ा है अपना ज़माना ||
तलाक की दंश झेलती अगले निकाह की तैयारी |
साहस में राहत मिलती हलाला देती है बर्बादी || -
अपना क्या है
जीवन में अपना क्या है,
एहसासों का सपना जो है,
खट्टी-मीठी यादों की जाल,
और कुछ सुनहरे भविष्य की आस,
मन में संजोए जीने की प्यास,
बुनते हम नित्य नए अरमानों के जाल ,
जीवन में अपना क्या है,
सोते -जगते सपनो की खान,
नित्य कर्मों में भरते प्राण. ,
अरमानों की हवाई उड़ान,
बनी रहे ज़ज्बातों की शान,
जीवन में अपना क्या है,
चंद साँसो में उलझी जान,
बुझी-अनबुझी सी प्यास,
ख्यालों के भँवर में रमती,
बनती- बिगड़ती आस,
जीवन में अपना क्या है,
एहसासों का सपना जो है ।।
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टूटा तारा
°°°°°°°°°°°°°°°°°
*टूटा तारा*?
°°°°°°°°°°°°°°°°°टूटे तारों को मैं छु जाऊंगा
झूठे वादों को मैं खो जाऊंगातेरी बातों को मैं भूला दूंगा
अपनी आंखों को मैं छुपा लुंगाचलती सांसे रूक तो जाऐंगी
टूटे तारों को जो छू जाऊंगा..
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
✍? *अभिमन्यु तिवारी*
? *२५-१०-२०१६*
☎ *८०८४४७२६४९* -
मैं छत्तीसगढ़ बोल रहा हूँ
https://youtu.be/Y79WeR6uFjIhttps://youtu.be/Y79WeR6uFjI
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Meri jindagi uske aane se..
Main kuch kuch rutha rutha tha..
main kuch kiya kiya tha.
kisi me mujhko pehchana
kisi ne bnaya diwana.
chahat hazaro hoti h bedardi ke bzaar me.
pehla eshshaas mujhe hua.
duza uska purana koi diwana tha.
Uski chahat bhi badli.
Aaj hum sath h dosto ko tarah.
are dosti to ek bahana tha -
मुक्तक
सामने है साकी मंजिल भी शराब है!
मेरी हसरतों में तेरा ही शबाब है!
तेरी प्यास जल रही है कब से जिगर में,
हुस्न का निगाहों में फैलता महताब है!मुक्तककार- #महादेव’
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ज़िंदगी अभी तक थमी हुई है
उसका हुस्न – ए – तसव्वुर जैसे ज़िंदगी थमी हुई है
ज़ियारत -ए -रुख़-ए -अनवर आज सुबह ही हुई है
उसकी सोहबत से फ़ुरक़त हैं ‘मियाँ ‘
फिर भी दयार -ए -दिल की क़िस्मत तो देखो
ज़िंदगी अभी तक थमी हुई है
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कैसे भुला दूँ
कैसे भुला दूँ खाना -ए-दिल से
कैसे भुला दूँ उसकी ज़ीशान निगाहें
कैसे भुला दूँ उसकी रेशमी ज़ुल्फें
मुमकिन नही भुलाना अब उसकी यादों को
जब थी करीब न किया तवज्जो उसके प्यार का
उसके जाने के बाद हुआ एहसास उसके प्यार का
हाल -ए -दिल हुआ यूँ
की हम आईने मे खुद से नज़र मिला न सके
सिसकते रहे उसकी यादो में
अब कैसे भुलाएं उसकी यादों को
जब भी उसका नाम आता है होठों में
यही दुआ करता हूँ रब से की भुला दे उसकी यादों को
– AMIT PRAJAPATI
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ग़ज़ल
वो ख़्वाब; वो ख़याल, वो अफ़साने क्या हुए ।
सब पूछते हैं लोग; वो दीवाने क्या हुए ॥अपनों से जो अज़ीज़ थे आधे—अधूरे लोग ।
‘पहचान’ दी जिन्होंने; वो ‘बेगाने’ क्या हुए ॥किसने चुरा ली ‘धूप’ तुम्हारी ‘मुंडेर’ की ।
मिलने की वो कसक; वो पैमाने क्या हुए ॥क्यूँ; आग निगाहों की, लग रही बुझी—बुझी ।
जलवा—ए—हुस्न क्या हुआ; परवाने क्या हुए ॥दरवाज़े सारे बंद हैं; चुप के मकान के ।
लबरेज़ शोखियों के; वो ठिकाने क्या हुए ॥हम तो सफ़र में थे; चलो, बे-घर नसीब था ।
तुम्हारे हसीन चाँद से; आशियाने क्या हुए ॥तुमसे वो दिलकशी—वो हँसी; रूठ गई क्यों ।
ऐसे ‘गुनाह’ सोचो तो; अनजाने क्या हुए ॥खाई थी ये कसम जहां; न होंगे हम ज़ुदा ।
चश्मदीद वफ़ा के; वो बुत—ख़ाने क्या हुए ॥यादों का तेरी; सीने में, ‘जंगल दहाड़ता है’ ।
अहसास की नाज़ुक कली—याराने क्या हुए ॥काटी थीं हमने ‘हिज़्र’ की; रातें जहां कई ।
‘अनुपम’ जरा कहो तो; वो ‘मैख़ाने’ क्या हुए ॥
#anupamtripathi #anupamtripathiG
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शाम दिखा देना
जरा सोचना पल भर के लिए,
दफन वो सारे जज्बात जला देना..
आना बस एक बार और मेरी कलम को,
ग्रहण की वो शाम दिखा देना..
सुन लेना मेरे मुंह से सत्य सराहना, तुम उन्ही शब्दों से मेरी पहचान बता देना..
शब्द दे दिये सारे तुम्हें उपहार में, तुम अपने शब्द आभूषणों का दाम बता देना..
ले जाना मेरी उजङी इस किताब को,
करना दफन या नफरत की आग में जला देना..
मिले न किसी को जो वो रोये इनको पढकर,
तुम सारी निशानियों का नामोनिशान मिटा देना..
~कविश कुमार
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Tasked, Taxed
Crunching through the trees,
Holding, waiting.
Holding his breath.
Even rows of gnarled wood
stretch like crooked teeth in the distance
And, finally, with great pleasure,
he dies.
The estate sale was a fucking gong show.
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मुक्तक
तुमको मेरी याद कभी तो आती होगी!
तेरी रूह को कभी तो तड़पाती होगी!
जब नज़र आता होगा रंग बहारों का,
कुछ-कुछ तेरी जान कभी तो जाती होगी!
मुक्तककार-#महादेव’
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DUNYA(The Universe)
Umeedon Ki Umar Hai Kitni.
Do Din Ki Phulwar Hai Duniya.
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Peetal Sona Ban Jata Hai.
Dhoky Ka Beyopaar Hai Duniya.
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Waqt Pary To Kam Na Aye.
Lakri Ki Talwaar Hai Duniya. -
मेरे अहसास लफ़्जों को तरस गये
मेरे अहसास लफ़्जों को तरस गये
वो क्या गये, हमे खुद के लिये तरस गयेMere Ahasaasa Lafzo Ko Taras Gaye
Vo Kya Gaye Hum Khud Ke Liye Taras Gaye
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दास्ता ए जिंदगी
चंद पन्नों में सिमट गयी दास्ता ए जिंदगी
अब लिखने को बस लहू है, और कुछ नहीं| -
Meaow
I not sure what I want to do
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मुक्तक
मेरी शाम जब तेरा इंतजार करती है!
धड़कनों में यादों को बेशुमार करती है!
खुली हुयी सी रहती हैं हसरतें पलकों की,
ख्वाहिशों को जिगर में बेकरार करती है!
मुक्तककार- #महादेव’
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Aap-bitii
Khushboo ki jawaani nahi hoti
Kisi kisi ki kahaani nahi hoti
Kuch logon ko kabhi pyaar nahi milta
Apna keh saken aisa yaar nahi milta
Saans lene se pehle hawaa ruk jaati hai
Maut aane se pehle zindagi ruth jaati hai
Aise logon ki kahaani nahi hoti
Kuch kuch logon ki jawaani nahi hoti.
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याद
था बे हरकत ऐसे मैं
कि ज़िंदा लाश हो जैसे ,
तेरी उन यादों के ख़ब्त से
जीना सीख आया हूँ-vijay
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विचारों को जब
विचारों को जब बाँध रही थी,
अरमानों के साँचे ढाल रही थी,
खिन्न हुई, उद्वगिन हुई जब,
खुद को मैं आँक रही थी ।
विचारों को खोल चली जब,निरन्तर प्रवाह से जोड़ चली जब,
आशा-निराशा छोड़ चली जब,
जीवन संग आन्नदित हूँ।
कर्तव्यो की जो होली है,रंग-बिरंगी आँख मिचोली है,
संग मैं हूँ, जीवन की जो भी बोली है ।।
https://ritusoni70ritusoni70.wordpress.com/2016/10/15/
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कुछ रिश्ते भुलाए नही जाते
कुछ रिश्ते भुलाए नही जाते
कुछ नाम मिटाए नही जाते
बस जाते हैं जो लोग दिलों में
वो लोग कभी भुलाए नही जाते… -
बचपन की याद
जब भी बैठता हूं किसी सिरहाने से सटकर, बहुत सी यादें याद आ जाती हैं…
इस आधुनिकता के खेल में भी मुझे, अपने बचपन की याद आ जाती है..
रसना खुश नही इन मंहगे पकवानो से, बस बचपन की वो ‘मलाई’ याद आती है…
नही मिलता जब चैन ठंडे आशियानों में भी, तो नीम के नीचे पङी वो ‘चारपाई’ याद आती है…
अकेले जब किसी सफर में थक जाता हूं मैं, तो सुकून देने वाली वो मां की गोद याद आती है…
तसल्ली महसूस न होती खुद की कमाई से जब, तो पापा के पैसे देने वाली वो ‘आदत’ याद आती है…
बीमार पङते हैं अब खुद चुन लेते हैं दवाई, फिर भी बिस्तर पर लेटे हुए अपनो की ‘इबादत’ याद आती है…
दौङ धूप में गुजर जाते हैं दिन अब तो, खेलकर लौटते थे वो ‘शाम’ याद आती है…
आशियाने जलाये जाते हैं जब तन्हाई की आग से, तो बचपन के घरौंदो की वो मिट्टी याद आती है…
याद होती जाती है जवां बारिश के मौसम में तो, बचपन की वो कागज की नाव याद आती है…
सुलगते है शरीर चारदीवारी में रहकर, तो मां-पापा के स्वर्ग की छांव याद आती है…
~कविश कुमार
रसना =जीभ -
नजर नहीं आये
शहर छोड़ गये हो सोचा मैंने, जब से तुम नजर नही आये…
अजीब हो तुम भी शहर में होकर भी, तुम हमारे शहर नही आये…
जो तुम न दिखते हो पास तो, अल्फाजों की निंदा कर देता हूँ मैं…
कागजों और अल्फाजों को प्रताड़ित करके, इन्हें शर्मिंदा कर देता हूँ मैं…
जो तुम दिख जाते हो पास तो, नयी कोशिश चुनिंदा कर लेता हूं मैं…
दोनों की सुलह करवा कर, नए अल्फाज़ जिंदा कर लेता हूँ मैं…
गीले कागज हुए थे आब-ए-चश्म से मेरे, तुम्हें क्यूं ये नजर नही आये…
गलियों की गली में जिस गली से गुजरे, उस गली में तुम कभी नजर नहीं आये…
~कविश कुमार
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उनके मुस्कुराने से आ गयी मुस्कान
उनके मुस्कुराने से आ गयी मुस्कान हमारे चेहरे पर
वरना किसी गम में डूबी जा रही थी जिंदगी मेरी -
मुक्तक
हरवक्त मैं तुमसे बात किया करता हूँ!
यादों से मैं मुलाकात किया करता हूँ!
हर ख्वाब बेइंतहाँ जलाता है लेकिन,
तुमसे गुफ्तगूँ हर रात किया करता हूँ!मुक्तककार- #महादेव’
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भगवान
यह डगर है अनजान ,सफर भी लम्बा बड़ा,
गंतव्य की खोज में, तू यहाँ अकेला खड़ा
पीछे हैं तिमिर के बादल ,आगे संसार पड़ा ,
रुक न पलभर को राही , हिम्मत के कदम बड़ा ई
विजन हैं राहें तेरी , कोई न तेरे संग है
तूफ़ान में तेरी कश्ती है , तू ही साहिल की तरंग है
न दर अगर कठिन राह हो , राही तू मलंग है
तू ही जाएं का रंगसाज़ है, तू ही कुदरत का रंग है
मंज़िल तेरी एक है , लेकिन एक पथ है
सिर्फ एक सही राह है , बाकी सब विपथ है,
उस राह को न छोड़ तू , वाही राह विजयपथ है
हिम्मत न हार राही , हिम्मत ही तेरा रथ है
पलभर की अँधेरी रात है , फिर दिवस महान है,
क्षितिज की गोद से निकलता , एक नया आहाँ है
एक नई रौशनी के लिए लिए, तेरा आज कुर्बान है ,
न रुक अगर दीवारें हो खड़ी , तू एक बड़ी चट्टान है
शिखर की ओर बड़ चले कदम , अब उन्हें न थाम दे,
मंज़िल तेरी पास है , अब न सफर को विराम दे ई
हौंसलों की दीवार हिल पड़े , पलभर को न आराम दे ,
भूल जा सारे दुःख अपने , अपने दर्द को ख़ुशी का नाम दे
शिखर पर खड़ा तू, लहराता विजयध्वज विशाल है,
अम्बर से बरस रहा है अमृत , मिट रहा अकाल है ,
तेरी मंज़िल चरणों में है , लेकिन विजयपथ लहू से लाल है ,
आरम्भ है नए संसार का, मगर तेरा अंतकाल है
हर नए ज़माने को जनम कुछ मस्ताने दे जाते हैं,
उनके बलिदान , उनके कर्म ही अफ़साने लिख जाते हैं
कुछ नहीं ले जाते जहां से , सभी को जीवनदान दे जाते हैं ,
इन्हीं वीरों को याद करते हैं , जिन्हे हम भगवान बुलाते हैं
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मुक्तक
शामे-आलम में तेरी प्यास चली आती है!
लहर ख्वाहिशों की मेरे पास चली आती है!
दर्द की दीवारों से टकराती है जिन्द़गी,
ख्वाबों की तस्वीर बदहवास चली आती है!मुक्तककार-#महादेव’
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दिल के रिश्ते
असल में बंध जाते हैं….
नशे में घुल जाते हैं….
ये दिल के रिश्ते….
दिल को ही समझ आते हैं…. -
संकल्प
है कुछ करना भी मुझे कुछ नया सा कुछ अलग
की मैं न बस रहूँ एक धूमिल खंडित नग——(१)
तोड़के बंधन सभी, छोड़के सब व्याधियां
लो चला मैं देख लो नव सृजन करने अभी——-(२)
आज मेरे हौंसले चट्टान से भी सख्त हैं
मेरे मन में हैं भरे वन उल्लास के ना मायूसी के दरख़्त हैं ——-(३)
आज उठ कर हम सभी संकल्प क्यों ना ये करें
तोड़ देंगे हम सभी उन खरपतवारी नियमो को———(४)
जिनके कारण एक दुसरे के मन में भरी घृणा रहे
फिर हमारी मुस्कुराहटों से प्यार का पौधा हरे ———-(५)
– कुलदीप
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आया खत मेरे इश्क का आज
आया खत मेरे इश्क का आज
सिर्फ़ पता था मेरा, और कुछ नहीं| -
जिक्र तो बहुत दफ़ा हुआ मिरा उनकी महफ़िल में
जिक्र तो बहुत दफ़ा हुआ मिरा उनकी महफ़िल में
मगर मुस्कुराये वो एक भी दफ़ा नहीं, मेरी मुस्कुराहट पे| -
कुछ यादें
न जाने क्यों कुछ यादें अटक सी जाती है दिल में
बार बार दोहराती रहती है खुद को अधूरे लफ्जों में| -
लम्हे
अगर लम्हों की क़ीमत जान जाएँ
हर इक लम्हे में पोशीदा सदी है -
कैसे पढ़ूँ तेरा ख़त अँधेरा बहुत है
कैसे पढ़ूँ तेरा ख़त अँधेरा बहुत है,
अपनी आहट से इसे रोशन कर दे… -
ग़ज़ल
बंधु !
शक्ति–स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना के अकल्पनीय दिवस और अंतत: वैभव एवं विजय के पर्व ‘दशहरा’ पर मन–मानस में व्याप्त ‘लोभ–मोह–आघात’ के प्रतीक “रावण” का दहन । आप सभी का हार्दिक अभिनंदन एवं मंगल–कामनाएँ ।गोयाकि ; ग़ज़ल है ! [A03.E004] ग़ज़ल ———–: अनुपम त्रिपाठी
वो ख़्वाब में जो अक्सर दिखाई देता है ।
कौन है जो मुझको हरजाई कहता है ॥अपने गमों पे खुलकर दीवानगी है हँसना ।
गैरों के लिए रोना रूसवाई कहता है ॥वो फ़र्द आख़िरी था ‘कल रात’ जो गया ।
फ़िर भी ज़माना हमको तमाशाई कहता है ॥सब आईनों के अंदर ढूंढें अज़ीब दुनिया ।
है ‘रू…ह’ ‘रू-ब-रू’ तो परछाई कहता है ॥
#anupamtripathi #anupamtripathiG
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फ़र्द/आदमी -
शिकवा करूँ क्या अपने उस महेरबान से
शिकवा करूँ क्या अपने उस महेरबान से,
आशिक़ हूँ जनाब कोई फरयादी नही
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जब कभी
सपने में भी जब कभी तुम्हारा ख्याल आता है-
तो दर्द से तड़फ कर जाग जाता हूँ मै .
जब अंधेरों के सिवा कुछ मिलता नहीं वहां-
तो खुद ही खुद से घबरा जाता हूँ मै .
कभी गैर आ कर रुला जाते है मुझको –
तो कभी खुद की ही हरकतों से परेशां हों जाता हूँ मै .
जिसको भी चाहता हूँ कि भूल जाऊं –
रह रह कर उसे ही याद कर जाता हूँ मै .
आती नहीं जब कभी नींद रात में –
खुद ही खुद को थपकियाँ देकर सुलाता हूँ मै .
-अनिल कुमार भ्रमर
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अफ़सोस
इस बात का गम नहीँ की तु मुझे मिल ना पाया।
अफ़सोस है की जिसे तुमने चाहा उसके जैसा बन ना पाया।●Follow Me At Instagram @Officialman4u
●Send Fb Request At Fb.Com/Manmohansingh.shekhawat -
तस्वीरों में।
सब कुछ मिलकर लगे जैसे कुछ ना मिला हो
कैसी कमी नज़र आती है हाथों की लकीरों में
जिनसे मिलते थे हम अक्सर सब-ओ-रोज़
आज सिर्फ यादें ही मिला करती है तस्वीरों में -
तो यह है मामला
क्या हुस्न अदा,कैसा शिक़वा गिला
किस्मत में ना था प्यार
इसलिए ही ना मिला
खुदा जानता है मेरा दिल झरने के पानी की तरह साफ़ है
पर यह भी सच है की कमल कभी भी साफ़ पानी में ना खिला -
अंदर से ज़िंदा।
ना नजरों में नज़ाकत रहती है
ना दिल में कोई आहट रहती है
हाँ पहले था ‘मन’ अंदर से ज़िंदा
अब तो उसकी दिखावट रहती है -
यह सच है।
कोई और बात ना करे चलता है
पर तू ना करे तो दिल जलता है
तू ही तो है मेरे हर नगमे मेरी नज़्म
तुझसे दिन शुरू तुझी से ढलता है




