Manoj

  • वह मुझे बताता है  निरीह  निर्जन  निरवता वासी हूँ

    जब से मानव मानव न रहा मै बना हुआ वनवासी हूँ |

    अवतरण हुआ जब कुष्ठमनन कुंठा व्याप्त हुआ जग में

    तब विलग हो गया मै जग से अब एकांत का वासी हूँ ||

    मैं शुन […]

  • Manoj posted an update 2 years, 11 months ago

    समेटता हूँ बिखरते ख्वाब को सजाता हूँ
    रोज तकदीर को लिखता हूँ और मिटाता हूँ |
    जो मद में चूर हो भूले है अपने ओहदे को
    आईना देकर उन्हे उनकी जगह दिखाता हूँ ||
    हवा हूँ मैं खुला ये आसमा वतन है मेरा
    घरौदें फिर भी रोज रेत का बनाता हूँ |
    मै आसमां का एक टूटा हुआ सितारा हूँ
    वजूद कुछ भी नही है फिर भी जगमगाता हूँ ||
    उपाध्याय…

  • समेटता हूँ बिखरते ख्वाब को सजाता हूँ
    रोज तकदीर को लिखता हूँ और मिटाता हूँ |
    जो मद में चूर हो भूले है अपने ओहदे को
    आईना देकर उन्हे उनकी जगह दिखाता हूँ ||
    हवा हूँ मैं खुला ये आसमा वतन है मेरा
    घरौदें फिर भी […]

  • फिरे तो सरफिरे है आग ही लगा देंगे
    पाक नापाक का नामो निशां मिटा देंगे |
    हमें ना खौफ कोई तोप या संगीनों का
    लडे तो ईंट से फिर ईंट ही बजा देंगे ||
    भारत माता की जय
    उपाध्याय…

  • आज जज्बे का इम्तेहा होगा
    कल कदमों में ये जहाँ होगा |
    आज काश्मीर जीत लेना है
    कल कब्जे में पाकिस्तां होगा ||
    न धौंस दे मुझे ऐ दहशतगर्दी
    कल न तेरा नमो निशां होगा |
    जब भी इतिहास कोई देखेगा
    पाक नापाक […]

  • मेरा देश महान
    घनघोर घटा में अलख जगा कर देख रहा मतिहीन,
    जाग सका ना घन गर्जन पर जग सोने में लीन,
    इस निस्तब्ध रजनी में मै और मेरा स्वप्न महान,
    खोज रहा अधिगम जिससे जग सच को लेता जान !
    देह थकी तो बहुत जरू […]

  • Thanks Ankita ji

  • आभार जी…

  • “मुक्तक”

    आओ अतीत के हम झरोखो में झांक लें जरा
    उनके और अपने करम को हम आंक लें जरा |
    जो मर मिटे वतन पे हमे स्वाधीन करने के लिये
    आओ शहीदों को हम आज याद तो कर लें जरा ||
    उपाध्याय…

  • दिनांक-२०-७-२०१६

    विधा- गीत

    संदर्भ- स्वतंत्रता दीवस

    तर्ज- बहुत प्यार करते है तुझसे स […]

  • Manoj wrote a new post, कविता 3 years ago

    चलो चले …
    किसी नदी के किनारे
    किसी झरने के नीचें |
    जहाँ तुम कल कल बहना
    झर झर गिरना और…
    और मैं मंत्रमुग्ध हो झरनों की
    लहरों की अंतर्धव्नि से राग लेकर
    लिखता जाऊँगा |
    चलो चले…
    किसी उपवन में
    या का […]

  • मित्रता बड़ा अनमोल रतन
    मैं कर्ण और तु दूर्योधन |
    मैं बंधा हुआ एक अनुशासन
    तु परम् स्वतंत्र दु:शासन ||
    उपाध्याय…

  • विविध उलझनों में जीवन फंसा हुआ है
    किंचित ही दिखने में सुलझे हुए है लोग |
    स्वार्थ की पराकाष्ठा पर सांसे है चल रही
    अपने बुने जंजाल में उलझे हुए है लोग ||
    उपाध्याय…

  • विविध उलझनों में जीवन फंसा हुआ है
    किंचित ही दिखने में सुलझे हुए है लोग |
    स्वार्थ की पराकाष्ठा पर सांसे है चल रही
    अपने बुने जंजाल में उलझे हुए है लोग ||
    उपाध्याय…

  • जमीं वही है मगर लोग है पराये से
    जो मिल रहे है लग रहे है आजमाये से!
    शफक नही नकॉब में फरेब है मतिहीन
    सभी दिखते मुझे हमाम में नहाये से!!
    उपाध्याय…

  • Manoj wrote a new post, कविता 3 years ago

    मस्जिदों में काश की भगवान हो जायें
    मंदिरों में या खुदा आजान हो जाये !
    ईद में मिल के गले होली मना लेते
    काश दिवाली में भी रमजान हो जाये !!
    बाअदब मतिहीन मिलते मौलवी साहब
    पूरोहित पंडित का भी सम्मान हो जाये
    जुर्म […]

  • चुभेगा पांव में कांटा तो खुद ही जान जायेगा
    जो दिल में दर्द पालेगा तड़प पहचान जायेगा |
    किसी की आह चीखों को तवज्जो जो नही देता
    जलेगा जब कदम अपना तपन वह जान जायेगा ||
    उपाध्याय…

  • Manoj wrote a new post, Shayari 3 years ago

    दर्द है आह! है मोहब्बत में मजा भी तो है
    इश्क गुनाह है मुसीबत है सजा भी तो है !
    दो दो जिस्म में एक जान है रजा भी तो है
    जिन्दगी है यही फिर भी ये कजा भी तो है !!
    उपाध्याय…

  • थी मोहब्बत दिल में पहले हो गई नासूर अब
    पूछता न था कोई पर हो गई मशहूर अब !
    उसका दिल रखने हजारों दे दिया कुर्बानियाँ
    और ओ फितरत से अपने हो गई मगरूर अब !!
    उपाध्याय….

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