Lucky

  • जो छूले मन कोई मेरा मुझे अभिमान हो जाये,
    क्या होती है हृदय धड़कन मुझे भी ज्ञान हो जाये,

    किसीकी बात सुनकर मैं भटक जाऊँ नमुमकिन है,
    वो दे आवाज़ तो मैं ज़िंदा हूँ मुझे भी भान हो जाये,

    आसमां से गिरा धर […]

  • दिलों को सिलने वाला कारीगर ढूंढ निकाला,
    हार कर जितने वाला बाज़ीगर ढूंढ निकाला,

  • जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं
    की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं

  • कोई क्या कहता है परवाह किसे है
    आंखे जब मुहब्बत से रोशन है
    तो रातो दिन की फिक्र किसे है

  • ashmita posted an update 1 week, 2 days ago

    @rajneesh-2
    सर्वश्रेष्ठ कवि बनाने के लिए शुभकामनाएं- वैसे कोशिश तो हमने भी बहुत की थी

  • होश में रहने वाले ही अक्सर बेहोश निकले,
    बिना पिए ही पीने वालों से मदहोश निकले,

    बोलने वालों की भीड़ का जायज़ा किया हमने,
    न बोलने से बोलने वाले ज्यादा ख़मोश निकले,

    जो बहाने बनाते र […]

  • वह दर्द बीनती है
    टूटे खपरैलों से, फटी बिवाई से
    राह तकती झुर्रियों से
    चूल्हा फूँकती साँसों से
    फुनगियों पर लटके सपनों से
    न जाने कहाँ कहाँ से
    और सजा देती है करीने से
    अगल बगल …
    हर दर्द को उलट […]

  • हमारे हर लम्हे की कोशिश तुम्हारी रूह तक जाने की थी
    मगर अफ़सोस आप ही इससे अनजाने थे

  • मुझे बारिश में भीगना पसंद था,
    तम्हें बारिश से बचना…
    तुम चुप्पे थे, चुप रह कर भी बहुत कुछ कह जाने वाले।
    मैं बक-बक करती रहती।
    बस! वही नहीं कह पाती जो कहना होता।
    तुम्हें चाँद पसंद था, मुझे उगता सू […]

  • जब चलते-चलते थक जाओ तो कुछ देर ही सही
    थाम लेना पैरोँ के पहिए..

    बहाने से उतर जाना पल दो पल ज़िन्दगी की साइकल से..

    देखना ग़ौर से मुड़कर
    कहीँ बहुत पीछे तो नहीँ छूट गया ना..

    धूल मेँ लिपटा माज़ी….

  • प्रेम कवितासबने प्रेम पर
    जाने क्या-क्या लिखा
    फ़िर भी अधूरी ही रही
    हर प्रेम कविता

  • एक मासूम सी ज़िन्दगी को यूँ दगा दे गई,
    उड़ाकर खुशियाँ सारी गमों को सजा दे गई,

    कहते हैं जो मरहम लगाने आई थी वो यारों,
    बेवजह वही ज़ख्मो को खुल के हवा दे गई,

    चाँद तारों भरी कायनात ने बताया मुझको,
    एक जुग […]

  • सच और झूठ के माईने बदल गए,
    ऐसा हुआ क्या के आईने बदल गए,

    साध के बनाई जब हाथों की लकीरें,
    तो राहों में लोग क्यों लाईने बदल गए,

    राही अंजाना

  • बहुत दिनों बाद सावन के द्वार आया
    पहले की तरह इसको अपना ही पाया
    सभी कवि लोगों को नमस्कार है
    सावन की आयी जो बहार है

  • बदरा घिर घिर आयी देखो अम्बर के अंसुअन बरसे है
    कोई न जाने पीर ह्रदय की पी के मिलन को हिय तरसे है
    यह मधुमास यूँ बीत न जाये नैनों से झरता सावन है
    जब से पत्र तुम्हारा आया भीगा भीगा सा तन मन है

  • और एक दिन
    दे दिये शब्द सारी व्यथाओं को
    लिख डाली एक कविता
    अपनी पहली कविता …

  • समंदर के किनारे बैठे
    कभी लहरों को गौर से देखा है
    एक दूसरे से होड़ लगाते हुए ..
    हर लहर तेज़ी से बढ़कर …
    कोई छोर छूने की पुरजोर कोशिश करती
    फेनिल सपनों के निशाँ छोड़ –
    लौट आती –
    और आती हुई लहर दू […]

  • लफ्ज़ो को बढ़े करीने से सजाया है
    इस नज़्म में नूर ए इश्क़ को बहाया है
    कुछ समन लाकर रख दिये है इसके करीब
    अपने होठों से हमने इसे गाया है

  • अपने दिल को दिमाग से हर रोज लड़ाता है,
    इंसान इंसानों के बीच रहके भी फड़फड़ाता है।।

    राही अंजाना

  • कौन कहता है के हम सब कुछ पल दो पल में कर लेंगे,
    हम तो मेहमाँ ही दो पल के पल दो पल में क्या कर लेंगे,

    रहने दो ज्यादा से ज्यादा थोड़ा तो उथल पुथल कर लेंगे,
    डूब समन्दर में जायेंगे और हम गंगा जल में घर कर ले […]

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