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  • Ekta Vyas posted an update 2 months, 3 weeks ago

    है द्वंद आज मन में उठा , है क्यों नारी की यह दशा।।
    अब और नहीं बस बहुत हुआ, यह भाव है मन में जगा।।
    इस भाव का प्रभाव है,कि हुई वह उठ खड़ी।।
    ज्वाला आंखों में दृढ़ता मन में भरी।।
    अन्याय रोकने वह फिर है काली बनी।।
    पापियों का अंत हो, इसलिए यह राह चुनी।।
    स्वयं के सम्मान के लिए नारी है अब लड़ने चली।।
    दुर्गा के रूप से चंडी अब बनने चली।।
    दुर्गा से चंडी का ये सफ़र, है शंखनाद नये आरंभ का।।
    अहं में डूबे हुओ, सुनो ये नाद है तुम्हारे अंत का।।