Dhananjay Pathak

  • दर्द इतना है कि कराह रहा हूँ ।
    जतन खूब किए मगर हार रहा हूँ ।
    गम करना था अपने हालातों पर मुझे ।
    मगर मेरी जुर्रत तो देखो, मुस्कुरा रहा हूँ ।।

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