Akash Singh

  • जो छूले मन कोई मेरा मुझे अभिमान हो जाये,
    क्या होती है हृदय धड़कन मुझे भी ज्ञान हो जाये,

    किसीकी बात सुनकर मैं भटक जाऊँ नमुमकिन है,
    वो दे आवाज़ तो मैं ज़िंदा हूँ मुझे भी भान हो जाये,

    आसमां से गिरा धर […]

  • दिलों को सिलने वाला कारीगर ढूंढ निकाला,
    हार कर जितने वाला बाज़ीगर ढूंढ निकाला,

  • होश में रहने वाले ही अक्सर बेहोश निकले,
    बिना पिए ही पीने वालों से मदहोश निकले,

    बोलने वालों की भीड़ का जायज़ा किया हमने,
    न बोलने से बोलने वाले ज्यादा ख़मोश निकले,

    जो बहाने बनाते र […]

  • एक मासूम सी ज़िन्दगी को यूँ दगा दे गई,
    उड़ाकर खुशियाँ सारी गमों को सजा दे गई,

    कहते हैं जो मरहम लगाने आई थी वो यारों,
    बेवजह वही ज़ख्मो को खुल के हवा दे गई,

    चाँद तारों भरी कायनात ने बताया मुझको,
    एक जुग […]

  • सच और झूठ के माईने बदल गए,
    ऐसा हुआ क्या के आईने बदल गए,

    साध के बनाई जब हाथों की लकीरें,
    तो राहों में लोग क्यों लाईने बदल गए,

    राही अंजाना

  • अपने दिल को दिमाग से हर रोज लड़ाता है,
    इंसान इंसानों के बीच रहके भी फड़फड़ाता है।।

    राही अंजाना

  • कौन कहता है के हम सब कुछ पल दो पल में कर लेंगे,
    हम तो मेहमाँ ही दो पल के पल दो पल में क्या कर लेंगे,

    रहने दो ज्यादा से ज्यादा थोड़ा तो उथल पुथल कर लेंगे,
    डूब समन्दर में जायेंगे और हम गंगा जल में घर कर ले […]

  • दिल अपना है मगर धकड़न पराई है,
    इस बात की खबर मैंने ही फैलाई है,

    नज़र वालों ने ही यहाँ नज़र चुराई है,
    इस बात में ढूँढो तो कितनी सच्चाई है,

    किसीने न सुनी मैंने सबसे जो छिपाई है,
    इस बात को दीवार के कान में स […]

  • तराजू के दोनों पलड़ों पर रखकर आंकते देखा,
    वजन प्यार का फिर भी मेरे कम भाँपते देखा,

    बन न पाया था किसी साँचे से जब आकार मेरा,
    के लेकर हाथों में फिर मिट्टी को नरम नापते देखा,

    ढूंढते थक हार […]

  • साथ निभाने के लोगों के तरीके अजीब हैं,
    अपनों से भी ज्यादा लोग गैरों के करीब हैं,

    मर चुके हैं एहसास यूँ दिल की हिफाज़त में,
    के धड़कन में नज़रबंद वो कितने अदीब हैं,

    गुमराह हैं नासमझ इशारे खुदा के ठुकर […]

  • वो दिल ओ दिमाग की पकड़ से बाहिर लगती है,
    सच यह बात उसके चेहरे से ही ज़ाहिर लगती है।।

    राही अंजाना

  • बहुत शोर मच रहा है बाहिर सुनो,
    शायद भीतर मेरे सब ख़ामोश हैं।।
    राही अंजाना

  • जब कभी भी मैं आईने को रूबरू देखता हूँ,
    सूरत और सीरत को खुद की हूबहू देखता हूँ।।

    राही अंजाना

  • वजन ईंटो का उठाकर भी हल्का लगने लगा,
    कन्धों पे जिम्मेदारी का जो हल्ला लगने लगा।।
    राही अंजाना

  • बच्चे की खातर माँ कितने ही दान निकाल देती है, M
    जिस्म से अपनी सौ बार जैसे जान निकाल देती है,

    भूख से बिलखता गर दिख भी जाये कोई मासूम तो,
    कुछ सोचे बिन दुपट्टे से सारा सामान निकाल देती है।।

    राही अंजाना

  • न जाने किस-किस का हसीन आशियाना हूँ मैं,
    लोग कहते हैं के खुले ज़माने का फ़साना हूँ मैं,

    जो उखाड़ने की जद्दोजहद में हैं जड़ों को मेरी,
    उनसे खुले दिल से कहता हूँ के कोई नामा हूँ मैं।।

    राही अंजाना
    नामा […]

  • ख्वाबों ख्यालों में किसी का कोई पहरा नज़र नहीं आता,
    जो नज़र में आता तो उसका कोई चहरा नज़र नहीं आता,

    घूमती गुमराह सी नज़र आती हैं जो खामोश राहें हमको,
    उन राहों पे ढूंढ़े से दूर तलक कोई ठहरा नज़र नहीं आता,

    राही अंजाना

  • तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ?
    मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ?
    अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन-
    मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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