Abhishek kant pandey

  • बिजली चले जाने पर हम
    रात चांद के तले बिताते हैं
    क्रंक्रीट की छत पर
    बैठ हम प्रकृति को कोसते हैं
    हवाओं से मिन्नते करते
    शहरों की छतों पर
    तपती गरमी में नई सभ्यता रचते
    दौड़ जाती हमारी आवेषों में बिजली
    कंदराओं क […]

  • चंद वक्त ले लो
    दुनिया भी बदल लो।
    एक एहसान करो
    तुम ही बदल जाओ
    आजकल में
    चीखों को सुनो
    फिर सोचो
    क्या तुम काबिल हो।
    एक बार तुम घर में बैठ जाओ
    देखों लोग कैसे बदलते हैं- जमाना।
    बस तुम चले जाओ
    देखो क […]

  • Abhishek kant pandey became a registered member 1 month, 3 weeks ago