मुक्तक

तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ?
मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ?
अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन-
मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ?

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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