बेटा बेटी पर कविता

बेटी से सौभाग्य

बेटी है लक्ष्मी का रुप, मिलतीं है सौभाग्य से, घर का आंगन खिल जाता है, उसकी पायल की झन्कार से। बेटी ही तो मां बनकर, हमको देती नया जनम, सम्मान करें हर बेटी का, यह है हर मानव का धरम, जनम न दोगे बेटी को तो, संसार ये रुक जाएगा, बिन बेटी के, बेटे वालो, बेटा न हो पाएगा। »

बेटी घर की रौनक होती है

बेटी घर की रौनक होती है बाप के दिल की खनक होती है माँ के अरमानों की महक होती है फिर भी उसको नकारा जाता है भेदभाव का पुतला उसे बनाया जाता है आओ इस रीत को बदलते है एक बार फिर उसका स्वागत करते है »

माँ

तुम शान थी मेरी , तुम मान थी मेरी , तुम अभिमान थी मेरी , इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी ! जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने , परिवार में बेटो के चाह में पागल , पर मैं बेटो से कम नहीं यह स्थान दिलाया तमने ! बचपन से बेटो बेटियों की भेद भाव की सीडी देख बड़ी हुई , पर तुम हर सीडी के बिच खड़ी हुई , मेरी बेटी बेटो से कम नहीं इस बात पे तुम अड़ी रही ! आज भी याद है माँ स्कूल का वो पह... »

यादें

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने जो आईं थीं। दबे पाँव गुपचुप, न आहट ही की कोई, कनखियों से देखा, फिर नज़रें मिलाईं थीं। मेरा काम रोका, हर उलझन को टोका, मेरे साथ वक्त बिताने जो आईं थीं। भूले हुए किस्से, कुछ टुकड़े, कुछ हिस्से यहाँ से, वहाँ से बटोर के ले आईं थीं। हल्की सी मुस्कान को हँसी में बदल गईं मेरे... »

बहाना

उसको समझना बड़ा मुश्किल होने लगा, कोई भी बहाना न उस पर चलने लगा, छोटी से न जाने कब बड़ी हुई मेरी बेटी, के अब चिंता में ये बाप हर दम डरने लगा।। राही (अंजाना) »

मेरी बेटी

मेरी शान है बेटी अभिमान है बेटी हर मुश्किल में साथ है बेटी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

बेटी

पायल की खनक रुनझुन सुखद एहसास करती है आंगन में बेटी जब छन छन करती आती है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

बहु

उस पल को तो आना ही था, तुझको विदा हो जाना ही था, ये रीती रिवाजों की ज़ंज़ीर थी, जिसमे तुझे बन्ध जाना ही था, बेटी रही तू मेरी जान से प्यारी, तुझको बहु बन जाना ही था।। राही (अंजाना) »

अजन्मी बेटी की पुकार

माँ मुझे भी इस दुनिया में ले आओ न इस जग की लीला मुझे भी दिखलाओ न खुले आसमान के नीचे मुझको घुमाओ न अपनी ममतामई गोद में खिलाओ न पढ़ा लिखा कर मुझे भी अफसर बनाओ न गर्व से करूंगी नाम रोशन आप सबका माँ मान और सम्मान सब दिलवाऊँगी माँ पापा का भी हाथ मैं बटाऊँगी माँ न मारो मुझको यूं तोड़ कर माँ मौका तो दो कुछ कर गुजरने का माँ।। »

चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ देती ।।

चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ देती ।।

सब कुछ चाहिए जुबाएँ ना साथ देती, जब आती है रिश्ते शादी की जुबाएँ पर मिठास होती, देख अच्छे से ऐसी — वैसी बात होती– चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ होती। बात बन जाती तब होती बात समाधी की तब लम्बी–लम्बी बात होती, चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ होती, पहले बार मे लेने देने की बात नही होती, दुसरे बार मे फरमाइस होती, चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ देती।। आ जाता जब दिन नजदीक शादी की पड़ोसी का धर भरा ... »

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