Sabera

मान लिया था हमने हर सबेरा है अपना,
फिर कुछ यूँ हुआ के कभी रात हि ना गुजरी…
—विद्या भारती —

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1 Comment

  1. राही अंजाना - July 30, 2018, 7:51 pm

    Waah

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