खामोश किसान

खामोश किसान

जवाब देने में हाज़िरजवाब बताये गए हम,
के अपने ही घर में खामोश कराये गए हम,

ज़िन्दगी बनाने को कितनी ही जगाये गए हम,
के अपनी ही चन्द सांसों से दूर कराये गये हम,

हर मौसम से क्यों सामने से भिड़ाये गये हम,
के सूखी धरती पे ही सूली पर चढ़ाये गए हम।।
राही (अंजाना)

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6 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - December 18, 2018, 3:00 pm

    उत्तम प्रयास

  2. ashmita - December 19, 2018, 9:12 am

    सराहनीय

  3. Mithilesh Rai - December 20, 2018, 9:47 pm

    बहुत खूब

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