तनहा-तनहा सा है, बिखरा-बिखरा सा

तनहा-तनहा सा है, बिखरा-बिखरा सा

 

ये गुलाब थोड़ा तनहा-तनहा सा है
ये गुलाब थोड़ा बिखरा-बिखरा सा है

छूटा है ये शायद किसी के हाथों से
ये गुलाब थोड़ा सहमा-सहमा सा है

रहता है काँटों के साथ है कर, खुसी से
ये गुलाब थोड़ा सेहता-सेहता सा है

सुंदरता इसकी क्या कहे हम तुम से
ये गुलाब थोड़ा जवा-जवा सा है

अभी नहीं निकली है जान इसकी
ये गुलाब थोड़ा हरा-हरा सा है

कोई कमी नहीं दिखती है हमको इस मैं
ये गुलाब थोड़ा भरा-भरा सा है

मनमोहक सी अदा जान पड़ती है इस मैं
ये गुलाब थोड़ा रंगा-रंगा सा है

क्यों फैकते है लोग इस को यूँ ही
ये गुलाब थोड़ा भला-भला सा है

ये गुलाब थोड़ा तनहा-तनहा सा है
ये गुलाब थोड़ा बिखरा-बिखरा सा है …………………………….!!

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