अन्नदाता कहलाता हूं

अन्नदाता कहलाता हूं
पर भूखा मैं ही मरता हूं
कभी सेठ की सूद का
तो कभी गोदाम के किराये का
इंतजाम करता फिरता हूं

बच्चे भूखों मरते है
खेत प्यासे मरते है
अब किसकी व्यथा मैं दूर करूं
मैं ही हरपल मरता हूं
अन्नदाता कहलाता हूं

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6 Comments

  1. Narendra Singh - December 20, 2018, 4:48 pm

    सुन्दर। किसान पुत्र की ओर से साधुवाद

  2. Mithilesh Rai - December 20, 2018, 9:42 pm

    बहुत सुन्दर

  3. Nandkishor - December 21, 2018, 8:37 am

    BHUT ACHA

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