बेटी से सौभाग्य

बेटी है लक्ष्मी का रुप,
मिलतीं है सौभाग्य से,
घर का आंगन खिल जाता है,
उसकी पायल की झन्कार से।
बेटी ही तो मां बनकर,
हमको देती नया जनम,
सम्मान करें हर बेटी का,
यह है हर मानव का धरम,
जनम न दोगे बेटी को तो,
संसार ये रुक जाएगा,
बिन बेटी के, बेटे वालो,
बेटा न हो पाएगा।

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4 Comments

  1. ashmita - December 16, 2018, 4:20 pm

    बहुत प्यारी कविता

  2. राही अंजाना - December 16, 2018, 10:02 pm

    बढ़िया

  3. देवेश साखरे 'देव' - December 17, 2018, 4:04 pm

    सुंदर रचना

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