Poems

अजैविक गम

अजैविक गम की खाद से
ख़ुशी हो गई बोन्साई
राजेश’अरमान’

होठों पे

होठों पे ख़ामोशी की लहरें
ढूंढ़ती है लफ़्ज़ों के समुन्दर
राजेश’अरमान’

कुछ तो बात है तेरे शहर की

कुछ तो बात है तेरे शहर की
ये ज़ख्मों को भी तन्हा नहीं रखते
राजेश’अरमान’

Desire:The cause of sorrow

What if the Sun desires not to shine?
What if the birds desire not to chirp?
What if the flowers desire not to bloom?
What if the rivers desire not to flow?
What if the crops desire not to grow?
What if the Earth desires not to sustain life?
What if the Almighty desires not to bless?Desire

सलीका

वो खफा है अब इस बात पर
आता नहीं सलीका गम उठाने का
राजेश ‘अरमान’

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