Poems

उसके क़दमों की चाप

उसके क़दमों की चाप
सनाटों को रौंद गई चुपचाप

नफरतें बेहिसाब

नफरतें बेहिसाब
पहने नक़ाब
निकलते जनाब

काश कोई पिंजरा ऐसा होता

काश कोई पिंजरा ऐसा होता
जो आसमा में टंगा होता

कौन आया

कौन आया
कौन गया
यही दुनिया

दिखते तो अब जो कभी

दिखते तो अब जो कभी
दिखाई देते पर  दिखने जैसे नहीं

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