Poems

Dard e dariya

Dard-e- Dariya h bhut bda,
ek muthi raat se iska kya hoga????

Wo Shaks

Wo shaks jo din bhar muskurati rhi……
aaaj royi bhut Raat bhr Muskurakar…

hui h nafrat is kadar unse…..

hui h nafrat is kadar unse
ki
ab to baddua k liye b dua na kru…

मुक्तक 5

जिंदगी बीत जाती है किसी को चाह कर कैसे? 
कोई  बतलाये  तो मुझको मैं जीना भूल बैठा हूँ…
अदा भी तुम ,कज़ा भी तुम ,मेरे दिल की सदा भी तुम,
तुम्ही  अब चैन हो मेरे ,मेरे दिल की दुआ भी तुम..
तुम्हारे प्यार की उल्फत मेरे दिल की ये तन्हाई,
तुम्हारे प्यार की आहट मुझे जब शाम को आई
सुबह तक सो न पाया मैं, बस यही याद थी दिल में,
कि मैं तूफ़ान में अटका ,नहीं हो तुम भी साहिल में…
…atr

मुक्तक 4

यहाँ हर शख्स है तेरा, वहां हर कब्र है मेरी,
जहाँ कैसा बनाया है खुद ने क्या इरादा था?

अब तो हालात भी मुझसे मिचौली आँख करते है,
को सपनो में आता है ,किसी को याद करते है.

मुझे है डर कहीं फिर से किसी हूरों की महफ़िल में,
उड़ाया फिर से न जाये ,ये कुचला जिगर मेरा..

…atr
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