Poems

ख्वाब – 5

ख्वाब मेरे दुश्मन तो नही

पर तब वोह मुझको चुभते हैँ

जब रूह तड़प कर उठती है

वोह जलता है कुछ अन्दर से

 

                            …… यूई

तेरी आरजू में मुझे जुदाई ही मिली है

तेरी आरजू में मुझे जुदाई ही मिली है!
जुदा हालात में मुझे तन्हाई ही मिली है!
अब नाकाम हो चुकी हैं मेरी मंजिलें सभी,
वफा की राह पर मुझे रूसवाई ही मिली है!

Composed By #महादेव

पैसा ही ईमान

पाप पुण्य कुछ भी नही, ऐसा हुआ जहान!
पैसा ही भगवान है पैसा ही ईमान !!

ख्वाब – 4

कुछ ख्वाब कभी रुक जाते हैँ

ता-उमर बना घर पलकों तले

हां बाहर से वोह दिखते नही

अन्दर से पल पल तड़पाते है

                                      …… यूई

ख्वाब – 3

दिन के ख्वाब रातों में

रातों के ख्वाब दिन में

गर ना दिलाएँ याद अपनी

तो ज़िन्दगी हो जाए अपनी

…… यूई

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