Poems

मुक्तक 26

तेरी आँखों से पीनी है, मुझे अब रात भर साकी ,

ज़रा अब फिर पिला दे न , तमन्ना अब भी है बाक़ी.

…atr

मुक्तक 25

ख़ुदा ने क्या दिया तुमको, ख़ुदा ने क्या दिया हमको,

की तू है हुस्न की मल्लिका , औ मुझको आशिकी दे दी ..

 

 

…atr

 

मैं प्यार दूंगा .

भुला सकोगे न तुम कभी भी ,

की  तुमको इतना मैं प्यार दूंगा .

जो होगा चुलमन वो  होंगी  आँखे ,

उसी से तुमको निहार लूंगा .

मगर रहे याद तुम्हे सदा ये,

 उसी में नज़रें उतार लूंगा .

तू मेरा साकी मैं रिन्द तेरा, 

ये मयकदा ही तेरा बसेरा ,

पिला कभी तो मेरे हमनफ़स ,

तुम्हारे दर पे खड़ा हु बेबश ,

नज़र न फेरो , पिला के जाओ,

कसम है दिल में उतार लूंगा ..

भुला सकोगे न तुम कभी भी,

की तुमको इतना मैं प्यार दूंगा..

…atr

दिल का धुंआ भी तो देखा जाये….

 

कोई तो रंग मिलाया जाये

दिल का धुंआ भी तो देखा जाये।

बेबसी ये कि रोक भी न सको

और कोई पास से चला जाये।

जहां सेे भूले थे घर का रस्ता

फिर उसी मोड़ पे जाया जाये।

आईने और कितने बदलोगे

अक्स अपना कभी बदला जाये।

जिदंगी की किताब देखें जरा

कोई तो लफ्ज समझ में आये।

वक्त की तरह मिला हूं उनसे

क्या पता लौटकर न हम आये।

…………सतीश कसेरा

कौन किस्मत से भला जीता है……

कौन किस्मत से भला जीता है……….

ये उसके खेल का तरीका है

कौन किस्मत से भला जीता है।

पहुंच न पाते कभी मंजिल तक

रास्तों को भी साथ खींचा है।

सुबह दिल खूब लहलहायेगा

रात भर अश्क से जो सींचा है।

कोई दुआ या बद्दुआ तो नहीं

कौन करता ये मेरा पीछा है।

सुबह उठ जाये वो ऐसे-कैसे

रात भर बैठ कर तो पीता है।

लकीरें हाथ की न गिर जाएं

कस के मुट्ठी को जरा भींचा है।

………………सतीश कसेरा

 

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