Poems

जो हूँ मैं – 2

जो हूँ मैं वह हूँ हवाओ में,

जो नहीं था मैं वह है चिताओ में

जो हूँ मैं वह है सब जगह,

जो नहीं मैं उसकी ना कोई जगह

जो हूँ मैं – 1

जो हूँ मैं वह है स्दीवि यहीं,

जो नहीं मैं वह था कभी नहीं

जो हूँ मैं बचा वह तो है असल,

जो नहीं बचा वह था नकल

पल – पल – 4

पल पल

बदलतीरचतीघटती इस दुनिया मॆं ,

मन कैसे कहे ,  तुझे पा ही लिया ,

है यूई जानता अब ,

था जो कल , है वोह आज नहीं ,

है जो आज , होगा वोह कल नहीं

पल – पल – 3

पल पल

घटता बहुत कुछ यहां ,

जो रिश्ते कल बुने , देखा उनका अंत आज यहीं ,

ख्वाब नये जो देख रहा , होगा उनका भी अंत यहीं

पल – पल – 2

पलपल

रचता यहां कुछ नया ,

जो था कल तक सच , जिंदा वोह आज नहीं ,

है लगता जो आज सच , मौत उसकी कल यहीं

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