Poems

spring poetry

वसंत की ताक में ….

spring poetry जाती हुई ठण्ड, पछिया हवा के थपेड़े,
किसी रूठी हुई प्रेमिका की तरह का दिन,
दोपहर जैसे खामोश और चिरचिरा,
न कुछ बोलता न कुछ सुनना ही चाहता !

वो दूर खेतों में मक्के मटरगस्ती करते,
जैसे दूर से हमें चिढ़ाते हुए देखते,
बिखरे बिखरे बालों पर जमी धुल,
जैसे उजड़ा हुआ सा घर कोई !

उबासी से ऊँघते हुए दिन,
जैसे कब आँख लग जाये,
वसंत की ताक में बैठे सब,
वो आये और रूठे को मनाये !

#SK

 

hope_inside_heaven__s_tears

Ise Benaam hee Rahne Do

इसे बेनाम ही रहने दो, कोई नाम न दो

वर्ना बेवजह दिल में कई सवाल उठेंगें

उन सवालों का जबाव हमारे पास नहीं

सिर्फ़ अहसास है हमारे पास,

जो लफ़्जों में ढलते ही नहीं

लफ्जों के सहारे दिल कुछ हल्का कर लेते है

गमों के घूंट, एक-दो पी लेते है

वर्ना इस दुनिया मे रखा ही क्या है

कुछ रखने को आखिर, बचा ही क्या है

इन अश्कों को ही आंखो में बचा के रखा है

कभी तुम मिल जाओगे इन्हे भी खर्च देंगें हम

मिल जाओ तुम अगर, लुट जाऐगें हम

मगर शायद लुट जाना हमारी किस्मत में नहीं

चंद कदमों का फ़ासला है, मगर पांव चलते ही नहीं

कई कारवां इसी फासले से गुजर जाऐगें

हम तो है यहीं, यहीं रह जाऐगें

बस अहसास हमारे, शायद तुम तक पहुंच जाऐगें

इन अहसासों के फासलों को अब मिट जाने दो

इसे बेनाम ही रहने दो, कोई नाम न दो

” कोई निशानी भेज दो “

मन बहलाने को कोई निशानी भेज दो

नींद नहीं आती कोई कहानी भेज दो …..

संजीदा रहूँ हमेशा तेरी यादों में

 मेहरबान बन कोई मेहरबानी भेज दो….

भा गया कुछ यूँ दिल को तेरा अपनापन

दीदार करने तस्वीर कोई पुरानी भेज दो ..

तड़प रहा हूँ कब से मिलने को

  उम्मीद तुम कोई पहचानी भेज दो …

जो दिलोँ – जान से हो सिर्फ मेरी

ख़ुदा ऐसी कोई दानी भेज दो..

महसूस होती हैं अक्सर दिल को तेरी सिसकिया

ख़त में मेरी सुखनवरी कोई दीवानी भेज दो….

हाल – ए – दिल सिर्फ तुम से हो बयां

मंजूरी अपनी ना सही कोई बेगानी भेज दो …..

ख़ामोश हैं सागर – ए – दिल – ए – पंकजोम “प्रेम ”


तुम ख्वाईशें कोई तूफ़ानी भेज दो …

तेरी बँदगी ने

तेरी बँदगी ने

तेरी बँदगी ने

ज़िन्दगी का फलसफा रोशन कर ,

जीने का रास्ता आसान कर दिया

हर शय में दिखा ख़ुद को ,

यूई का ख़ुद से खुदाई का सफर ,

इक पल में तमाम कर दिया

                                            …… यूई

“यादें” #1Liner-50 ….

ღღ__दिल तो करता है कभी-2, तेरी यादों को ज़हर दे दूँ साहब;
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फिर सोंचता हूँ, भला ये भी, कोई उम्र है ख़ुदकुशी करने की!!….‪#‎अक्स‬
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