Poems

जब होगा दीदार रब का

जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं
की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं

कोई क्या कहता है

कोई क्या कहता है परवाह किसे है
आंखे जब मुहब्बत से रोशन है
तो रातो दिन की फिक्र किसे है

गुरुर

इतना गुरुर ना कर अपनी खुबसुरती पड़
यह तोह उम्र के साथ चला जायेगा
जितना उस खुदा ने प्यार और शिद्दत ने तुझे बनाया
काश उतना अच्छा दिल दिया होता
तोह इतनी ज़िंदगियां बर्बाद ना होती

मैं क्यों कन्हैया ?

(I)

मैया, ओ मेरी मैया!

क्यूँ कहती मुझे कन्हैया?

कृष्ण और मैं —

वो द्वापर का दुलारा,

मैं कलयुग का मारा।

वो नयनों का तारा,

मैं दिलों से हारा।

वो जगत में सबसे न्यारा,

मैं तो किसी को भी नही प्यारा।।

बता मेरी मैया,

क्यूँ बोले है तू मुझे कन्हैया?

(II)

ओ मेरे लाल,

मेरे बाल गोपाल —

कृष्ण और तू ?

कृष्ण देख यशोदा मुस्काये,

तोहे देख मोरा मन रिझाये।

वो दिल और माखन चुराये,

तू भी मेरा नींद चैन ले जाये।

वो यशोदा के घर में खुशियां लाये,

मैं भी धन्य हूँ, जो तोहे पाये।।

ओ मेरे लल्ला,

मैं तेरी यशोदा, तू मेरा कन्हैया।।

फिर मैं बोला —-

सारा काम तू करावे चाहत हो मैया,

इसलिए, तू कहे मोहे तेरो कन्हैया।।

मदहोश

होश में रहने वाले ही अक्सर बेहोश निकले,
बिना पिए ही पीने वालों से मदहोश निकले,

बोलने वालों की भीड़ का जायज़ा किया हमने,
न बोलने से बोलने वाले ज्यादा ख़मोश निकले,

जो बहाने बनाते रहे साथ हैं हम तुम्हारे कहके,
बगल में रहने वालों से ज़्यादा सरगोश निकले।।

राही अंजाना

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