Poems

सरस

कुछ कहे बिना ही बहुत कुछ कह गया,
ख़ामोश बादल यूँही बरस कर रह गया,

बनाया आशियाना बड़ी उम्मीदों से हमनें,
ज़रा सी हुई हरकत तो परस कर रह गया,

कैद ऐ मोहब्बत की गिरफ्त से छूट कर,
राही अंजाना सबसे सरस कर रह गया।।

राही अंजाना
परस- स्पर्श
सरस – रसीला, स्वादिष्ट

आँचल

सर पर आँचल तो लाजमीं है न..!!
जमीन-ए-हिन्द से जो हूँ ..!!!😊
@Chandani

Teri yade

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी ,
हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी ,
नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी ,
तेरे सिवा किसी को नहीं देखती हैं आंखें मेरी ,
अब चले भी आओ कि सूनी है आंखें मेरी ,
इन हवाओं से कह दो ना रास्ता रोके तेरी ,
यह दुनिया विरान है बस तुझ बिन मेरी…..

Tery yade

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी ,
हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी ,
नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी ,
तेरे सिवा किसी को नहीं देखती हैं आंखें मेरी ,
अब चले भी आओ कि सूनी है आंखें मेरी ,
इन हवाओं से कह दो ना रास्ता रोके तेरी ,
यह दुनिया बिरान है बस तुझ बिन मेरी…..

मैं ऐसा होता काश…..

सोचता हूं, मैं पानी होता काश,
तुम्हारे प्यासे होठों की बुझाता प्यास।
सोचता हूं, मैं हवा होता काश,
हर पल अपने स्पर्श का दिलाता एहसास।
सोचता हूं, मैं खुशबू होता काश,
तुम्हारे तन को महकाता मैं बेतहाश।
सोचता हूं, मैं खुशी होता काश,
ना होने देता तुम्हें कभी उदास।
सोचता हूं, मैं उम्मीद होता काश,
आंखें बंद कर मुझ पर करती विश्वास।
सोचता हूं, मैं मंजिल होता काश,
तो खत्म मुझ पर होती तुम्हारी तलाश।
सोचता हूं, मैं ख्वाब होता काश,
तुम्हारी नींदों में, होता तुम्हारे पास।
सोचता हूं मैं, नहीं कुछ भी, फिर भी,
तुम्हें पाने के बाद ना रही और कोई आस।

देवेश साखरे ‘देव’

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