Poems

खत-४……….

खत-४……….

खत-३……

खत-३……

खत-२……

खत-२……

खत…….

खत…….

खबर ए लापता

सबके ज़हन में आने की ये तरकीब निकाली हमने,
के खुद ही के लापता होने की खबर फैला डाली हमने,

बिक गया जब हर ज़रा ज़मी पर कुछ खाली न बचा,
छोड़ कर ज़मी चाँद पर ही अपनी खोली बना डाली हमने॥
राही (अंजाना)

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