Poems

प्यार की नाव

अगर बैठना हैं,
महोबत की
नाव मे,
तो एक बार हर किनारे से रिस्ते-नाते
तोड़ने होंगे..
#devil

मुक्तक

तेरा ख्याल मुझको तड़पाकर चला गया!
अश्कों को निगाहों में लाकर चला गया!
नींद भी आती नहीं है तेरी याद में,
करवटों में दर्द को जगाकर चला गया!

मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

सार्थक भाव विक्षेप

अवसाद का विक्षोभ नीरव, चपल मन का क्लांत कलरव
देखता पीछे चला है लगा मर्मित स्वरों के पर ।

शुष्क हिम सा विकल मरु मन, भासता गतिशील सा अब,
भाव ऊष्मा जो समेटे बह चला कल कल हो निर्झर।

विगत कल में था जो मन मरु और अस्तु प्रस्तर,
विकलता का अमिय पी फूटा था अंकुर।

हूँ अचंभित आज मै खुद, पा वो खोया अन्तः का धन,
धन की जो था विस्मृत सा, मन विपिन में लुट गया था,
स्वार्थ और संकीर्णता के चोर डाकू ले उड़े थे।

आज लौटाया उन्हीनें हो शुचित उस विकलता मन्दाकिनी में डूबकर फिर….

दृष्टि ये धुल सी गई है, सामने सृष्टि नई है,
जगत सारा मित्र है अब, शत्रु अब कोई नहीं है ।

अधर पर मुस्कान है अब, ना कोई अनजान है अब,
विगत कल की स्वार्थपरता आज का अज्ञान है अब।

विसम दृष्टित भाव जो थे सघन गुम्फित वेदना पुष्पावली के सघन भीतर
वस्तुतः संचित किये सम्भाव्य विधि के अनकहे स्वर ।

अस्तु आवश्यक विकलता खोजने निज वास्तविक मन,
वरन खो देंगे खुद ही को, बना कृत्रिम शुष्क जीवन,

मन विटप का तृषित चातक पा गया क्षण स्वाति का जल…..

डूबकर देख लिया

डूबकर
देख लिया ,
जिस घड़ी
से ,
तेरी आँखों में ।

नहीं अब
डूबने से ,
जरा सा भी ,
डर हमें लगता ।

जानकी प्रसाद विवश

प्यारे मित्रो .
सवेरे की गुनगुनी अनुभूतियों का
सपरिवारसहर्ष
हार्दिक अभिवादन.,
हर पल मंगलकामनाएँ
स्वीकार करें ।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

Raakh

kon yaad rakhta hai raakh ko
jismo ke sab diwaane hai

iss janam mai nibha na sake
saat janmo ki baat karte hai

@@ SAGAR @@

Page 3 of 99412345»