Poems

माँ

तुम शान थी मेरी ,
तुम मान थी मेरी ,
तुम अभिमान थी मेरी ,
इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी !
जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने ,
परिवार में बेटो के चाह में पागल ,
पर मैं बेटो से कम नहीं यह स्थान दिलाया तमने !
बचपन से बेटो बेटियों की भेद भाव की सीडी देख बड़ी हुई ,
पर तुम हर सीडी के बिच खड़ी हुई ,
मेरी बेटी बेटो से कम नहीं इस बात पे तुम अड़ी रही !
आज भी याद है माँ स्कूल का वो पहला दिन
कैसे कटे थे हर घड़ी माँ तेरे बिन !
उस कड़कती धूप में , वो बरसती सावन में
माँ तमने मेरा साथ दिया हर उस उत्सव पवन में !
चाँद सितारों से हस्ती खेलती वो गलिया,
कितनी प्यारी थी ना माँ हमारी वो दुनिया !
कैसे गुज़रे वो हसीन से पल ,
आज लगता है बचपन तो था कल !
माँ की बिटिया आज सायानी हो गयी ,
छोड़ अपना घर किसी की बहुरानी हो गयी !
आज समझ आया कैसे कर लेती थी माँ इतना काम ,
घर , आंगन की मालकिन पाती जग का सम्मान !
हर पथ पे साथ दिया माँ तमने मेरा ,
फिर क्यों जा रही छोड़ साथ मेरा !
फिर क्यों आ रही माँ हर बात याद तेरी ,
वो प्यारी मुश्कान तेरी, वो बिटया रानी कहना मेरी!
लगता है उस खुदा की प्यारी हो माँ ,
जिसने इतनी जल्दी बुला लिया तम्हे आसमां !
उस रब से मेरी है ये दुआएँ ,
मेरी माँ की झोली में खुशिया ही सदा बरसाए !
भूल नहीं सकती माँ तेरे करम को जब तक हु ,पूजा करुँगी तेरी चरण को !
ये खुदा एक छोटी सी मेरी है तमन्ना ,
जब ,जब दुनिया में आउ उसकी आखो से ही देखु जमाना !

…………..सौंदर्य निधि ……………………

वो साथ तेरा

हाँ, नहीं हो तुम साथ मेरे ,
पर क्यों लगता है तुम पास हो मेरे !
हर घड़ी हर पहर जिंदिगी लगाती है अब ज़हर,
तेरी ये नाराज़गी, और कहर लगती है धुप की दोपहर!
तो क्या हुआ तुम ने छोड़ दिया साथ मेरा ,
अब मान लिया मैने नहीं है मेरा सबेरा l
गुज़र गए वो दिन गुज़र गए वो राते,
कितनी प्यारी थी तेरी साथ की बरसाते l
वो बारिश की बूँदे, वो शाम की चाय,
जो लम्हे तेरे साथ बीतये!
वो हाथ में हाथ डाल कर घूमना
वो माथे पे तेरा चूमना!
वो घंटो बातें करना,
दुनिया से मेरे लिए लड़ना,
याद है तम्हे वो रातो में जागना
और छोटी – छोटी बातो पे झगडना,
तो क्या हुआ भूल चुके हो तुम साथ
मेरा,
पर मैं कैसे भूलू वो मेरे लिए प्यार तेरा!
वो छोटे छोटे बातो पे मेरा रूठना,
और तेरा प्यार से मुझे चूमना!
दिल करता था तुम मानते रहो जिंदिगी भर,
और रूठती राहु मैं पल – भर।
तो क्या हुआ जो मैंने रूठना छोड़ दिया,
मैंने तेरी बेवफाई को ख़ुशी से जिया।
तेरे साथ मे बिताए वो पल लगता था अब ना होगी कल,
सही भी था, किसे फ़िक्र थी कल की जब साथ थी मैं
अपने दिल की!
तो क्या हुआ वो दिल ना रहा अब,
मुझे पता ना हुआ, हुआ ये कब!
तेरे उस झूठे प्यार को मैंने तो सच्चा माना,
खुश हु मैं, आज जो हसंता है मुझपे जमाना l
मुझे नहीं शिकायत है तुझसे
ना उस जिंदिगी से,
तो क्या हुआ अब वो जिंदिगी ना रही उस मोड़ पे,
उसने भी छोड़ दिया मेरा साथ तेरा साथ छोड़ते!

सौन्दर्या नीधि

HOPE

No matter what you do , not even how you do .
Life always has a clue , to let your sky blue.

All matters are the days ,when soul and mind says .
To burn the life thine, and let the world shine .

Day night you may frown ,life always has a crown.
Questing for you king ,and let your lark sing

Get up! dear friend ,and let this gloom end .
You have a dawn ahead, before you go to bed.

Nari ki akansha

मैं नन्ही प्यारी बच्ची थी , दिलो दिमाग से सच्ची थी।

दो लड़के मेरे साथी थे ,
मेरे दीपक के बाती थे।

पायल मै खनकाती थी,
संग उनके नाचती गाती थी।

संग उनका रास ही आता था , समाज का भय ना सताता था।

उमर बढ़ी जवानी अाई,
मॉ आकर मुझको समझाई।
“देख !अब तू जवान हुई ,
घर वालों का मान हुई ।”

तू लड़की वे लड़के हैं ,
जीवन में अभी कच्चे हैं।

“बंद करो ये आना जाना ,
बहुत हुआ ये नाच गाना ।”

बीता वक़्त बजी सेहनाई, समाज जा चुनरी ले अाई।

अब तुम जो मुझे समझते हो , क्या एक इच्छा पूरी करते हो।

बस उन दोनों से मिलवा दो,
फिर लुका-चुप्पी खिलवा दो ।

ना मुझे चाहिए सोना हीरा,
ना महलों का रैन बसैरा।

वे मेरे हीरे मोती थे ,
वे राजमहल वे कोठी थे ।

बस कर दो मेरी आकांक्षा पूरी, उनके बिना ये जीवन अधूरी

अधूरा

हमेशा किसी की तलाश रहती है मुझे
लगता है जो कुछ है वो अधूरा है
अल्फ़ाजों में कहां समाता है
जो जहन में गूंजता है वो ही पूरा है

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