Poems

Civil engineer

Being a civil engineer,for all civil engineers…hahahaha..

गुजारी है ज़िन्दगी मैंने , सीमेंट और रेत मिलाने में

कैसे भला कोई इश्क़ करे, हम मजदूरों के घराने में

अब खुद के सपनों का घर बसाने की हम क्या सोचें

उम्र कट रही है पूरी, दूसरों का मकाँ बनाने में

Only for fun…😊😊

बिखरा हूँ

टूट कर ही जुड़ा हूँ यूँही नहीं बना हूँ मैं,
गिरा हूँ सौ बार फिर सौ बार उठा हूँ,
यूँही नहीं सीधा खड़ा हूँ मैं,
बिखरा हूँ कभी सूखे पत्तों की तरह,
तो काटों सा किसी को चुभा हूँ मैं,
लहर नदिया संग बहा हूँ फिर भी प्यासा रहा हूँ मैं,
डर कर सहमा सा छुपा था कहीं,
आज की भीड़ में भी डटा हूँ मैं॥
राही (अंजाना)

Dear Saavan Team,

I wanted to take a moment to extend my most sincere thanks for choosing my poem first in martyr contest. I received a message regarding 2.2k like on my poem. I want to assure all of you there is full transparency. I am research scholar in BHU where approx 35k studetns.So it is possible. Hope you understand it.

I also extend my thanks to all BHU students and others for liking and sharing my poem.

 

Gratefully

Nitesh Chaurasia

Research Scholar,

IIT BHU, Varanasi

 

 

इश्कबाज

इश्कबाज पसंद है मुझे,

चाहे इश्क़ में ना पड़ा हूँ कभी,

अल्फाज बह जाते है आशिकी देखकर

चाहे आशिक़ ना बना हूँ कभी

#पंकज

तुमको ही आता है….

भ्रमर कितना ही फैलाएं पर,

उड़ना तो बस तितलियों को आता है

चुप रहकर भी सब कुछ कहना,

इनकी कत्थई अँखियों को आता है

और नादान थे, नादान ही रहेंगे लड़के,

जवान होना तो बस लड़कियों को आता है

 

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