Poems

मुक्तक

मुक्तक

तुमसे मुलाकात कभी जो हो जाती है!
जैसे दिल में अंगड़ाई रो जाती है!
मयकदों में ढूंढता हूँ यादों के निशां,
मेरी नींद पैमानों में खो जाती है!

रचनाकार-#मिथिलेश_राय
(#मात्रा_भार_23)

कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामना

तन को दीप बनाय के, मन में ज्योति जलाय
मोती हरि आरत करें, जीवन भोग लगाय

मोहक मन भावन छवि, मेघ वर्ण अति रूप
मृगी नयन कोमल बदन, लज्जित मदन अनूप

रूप राशि मुख चन्द्र सों, चकाचौंध चहुँ लोक
चकित होय चित्रवत खड़े, मोती मुदित बिलोक

किलकारी कान्हा सरस, सुन सुर मुदित अघाय
खिला बसंत ब्रज भूमि वन, जलद सरस चहुँ छाय

मुक्तक

मुक्तक

तेरे बगैर तन्हा जमाने में रह गया हूँ!
तेरी यादों के आशियाने में रह गया हूँ!
हरवक्त तड़पाती है मुझे तेरी बेरुख़ी,
तेरे ख्यालों के तहखाने में रह गया हूँ!

मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

जय जननी

जय हे भारत स्वर्ण भूमि जय
जय जननी, जय कर्म भूमि हे

गंगा यमुना ब्रह्म सरस्वती
पावन सतलज सिन्ध बहे

विन्ध्य हिमालय गिरी अरावली
मणि माणिक नवरत्न भरे

जलधि हिन्द बंगाल अरब जल
स्वर्ण भूमि नित अंक भरे

आर्य द्रविड़ मंगोल भूमि हे
हिन्दू इसाई यवन मातृ जय

जय हे भारत स्वर्ण भूमि जय
जय जननी, जय कर्म भूमि हे

वाल्मिक मुनि व्यास कालि कवि
तुलसी सूर कबीर संत स्वर

गूँजे धनुष टंकार राम की
गीता का उपदेश गूँजे

जय राणा जय शिवा गोविन्द सिंह
जय भारत संतान वीर हे

जय हे भारत स्वर्ण भूमि जय
जय जननी, जय कर्म भूमि हे

मुक्तक

मुक्तक

आरजू तेरी बुला रही है मुझे!
याद भी तुमसे मिला रही है मुझे!
किसतरह मैं रोकूँ दिल की तड़प को?
आग चाहत की जला रही है मुझे!

मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

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