Poems

विकार

कान्हा ओ कान्हा,
मेरा भी माखन चुरा ले

माखन चुरा के कान्हा प्यारे,
चित भी मेरा चुरा ले

जो हो मन में मेरे विकार,
इनको भी तू चुरा ले

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

कान्हा

प्रेम की डोरी से,यशोदा की लोरी से
बंध गए नन्द किशोर

छल कीन्हे बड़े कान्हा,प्यारी मईया से,
बहुत प्रेम है इनको, ग्वाल औ गैया से

माखन चोरी से,ब्रज की होरी से
बंध गए नन्द किशोर

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

पर्वत

ऊँचे ऊँचे पर्वत ,
पर्वत पर ये रास्ते

किसने बनाये ये सब,
और बनाये किसके वास्ते

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

क्रांति

जल उठी क्रांति मशाल,
क्रांति के तुम दूत बनो

मातृ भूमि से प्यार है तो,
भारत माँ के दूत बनो

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

मातृ भूमि

अर्पण तन मन धन कर दो,
स्व मातृ भूमि के लिए

रहे वर्चश्व स्व का सदा,
ना हो बंधन,मुक्ति के लिए

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Page 2 of 12541234»