Poems

सको तो चलो………..

हमारे साथ कदम से कदम मिला चल सको तो चलो
के इस इश्क़ में कुछ देर ठहर सको तो चलो

बहुत ही हौसला चाहिए, इस दिल की निगेबानी करने को
अगर तुम इसकी पहरेदारी कर सको तो चलो

सफर लंबा है ज़रा, मंज़िल-ऐ-वाम तक का
बे-सरो-सामान निकल सको तो चलो

यादों से लवरेज़ है दिल मेरा, खता मेरी नहीं
तुम इसकी हर बात समझ सको तो चलो

रात की ख़ामोशी और अजीब सा सन्नाटा भी
तुम इन सब से निकल सको तो चलो

सफर-ऐ-आम नहीं ये, औरो की तरह
खुद को गुमनाम कर सको तो चलो

इस सफर में कुछ दुश्मनो से भी मुखातिभ होंगे
तुम ये ख़ंज़र रख सको तो चलो

है पता है हमको बहुत से सवाल है तुम्हारे ज़हन में
इन सब के जवाब अगर तुम सुन सको तो चलो

कदम-कदम पर सबब-ऐ-परेशानी का मंज़र है
तुम संभल-संभल कर गर चल सको तो चलो

वादा किया है तुमने साथ निभाने का
गर साथ सही से निभा सको तो चलो……………….!!

D K

वक़्त तो लगता है…….

किसी को भूल जाने मे वक़्त तो लगता है
के आँखों के आंसू मिटाने में वक़्त तो लगता है

जब बैठे हो चाहत-ऐ-किस्ती मे, तो सब्र करो
इसको साहिल तक पहुचाने में वक़्त तो लगता है

क्यों रोते हो अब अपने ही किये हुए उस काम पर
गमो के दिन बिताने में वक़्त तो लगता है

धीरे-धीरे भरेंगे, के ये गम और आंसू से बने है
जख्म को भर जाने में वक़्त तो लगता है

ए दिल ज़रा ठहर जा, ज़रा तस्सली रख
किसी शहर जाने में वक़्त तो लगता है

चलो मान लिया ये दरिया गहरा है लेकिन
किसी की गहराई नापने में वक़्त तो लगता है

तुम्ही ने कहा था एक दिन उसको मोहोब्बत जरूर होगी
के किसी के दिल में जगह बनाने में वक़्त तो लगता है

लौट जाऊँगा में भी इस शहर से लेकिन
खुद को तालुक सब से करने में वक़्त तो लगता है

इतनी जल्दी कहा ख़ाक होता है कोई
खुद को जलने में वक़्त तो लगता है

ये दिल भी एक कच्ची बस्ती है लोगो
बस्तियां बसने में वक़्त तो लगता है………………!!

D K

सामने तो आ

शब्दों में नहीं तो खामोशी ही सही,
किसी ज़ुबां में तो तू निकल कर सामने आ,
कब तलक छुपता रहेगा तू राज़ अब दिल में,
खुल कर अब किसी सच सा तू निकल कर सामने आ,
खेल हैं कई और खिलौने भी बहुत हैं ज़माने में,
छोड़ कर बचपना तू अब हकीकत में निकल कर सामने आ॥
राही (अंजाना)

सब पीछे छूट रहा है

देख रहा हूँ

रात में जगमगाती लाइट्स

इन अंजान रास्तो पर,

ज्यों जीवन धबकता है शहरो के दिल में।

एक तसल्ली रहती है मन में

कि हम जिन्दा है।

लेकिन चलती कार के साथ

वो सब पीछे छूट रहा है।

बिलकुल मेरी जिंदगी की तरह…

तलाश

न दिल तलाश कर न धड़कन तलाश कर,
जो रूह में घर कर जाए वो दरिया तलाश कर,
झुकता नहीं है आज कोई सर किसी के आगे,
जहाँ हर आदमी झुक जाए वो चौखट तलाश कर,
शर्म के तकिये पर अब कोई सिमटता कहाँ हैं,
जो हर सिलबट मिटा दे वो बिस्तर तलाश कर॥
राही (अंजाना)

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