Poems

मुक्तक

मेरी तन्हाई में जब भी गुजर होती है!
मेरे ख्यालों में ख्वाबों की सहर होती है!
दर्द की कड़ियों से जुड़ जाती है जिन्दगी,
यादों की दिल में चुभती सी लहर होती है!

मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

मुक्तक

मेरी तन्हाई में जब भी गुजर होती है!
मेरे ख्यालों में ख्वाबों की सहर होती है!
दर्द की कड़ियों से जुड़ जाती है जिन्दगी,
यादों की दिल में चुभती सी लहर होती है!

मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

Manzil

Sun lo bhaiya kehti hoon
Man ki baat main sachhi
Koi aata thal pe
Koi vayu koi jal
Koi chalta chaal kachhue ki
Koi ude mast malang
Manzil sabki ek hi bhaiya
Woh manzil hai masti

Maano na tum baat meri
Padho santo muniyo ke chhand
Sabka kehna ek hi bhaiya
Vaastav mein jeevan hai
Anand hi anand

Sadak

Khudi sadak par khud Gaye he aaate Armaan mere
Chala tha aasmaan ki taraf, khude Gadde me for pade

मुक्तक

मेरे गम को मेरा ठिकाना मिल जाता है!
तेरे ख्यालों का आशियाना मिल जाता है!
जब दिल को सताती है प्यास तमन्नाओं की,
मेरी तिश्नगी को मयखाना मिल जाता है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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