Poems

उसी का शहर था उसी की अदालत।

उसी का शहर था उसी की अदालत।
वो ही था मुंसिफ उसी की वक़ालत।।
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फिर होना था वो ही होता है अक्सर।
हमी को सजाएं हमी से ख़िलाफ़त।।
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ये कैसा सहर है क्यू उजाला नहीं है।
अब अंधेरों से कैसे करेंगें हिफ़ाजत।।
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चिरागों का जलना आसान नहीं था।
हवाओं ने रखा है उनको सलामत।।
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तुमको फिक्र है न हमकों है फुरसत।
न है कोई मसला न कोई शिकायत।।
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साहिल भँवर में है जिंदा अभी तक।
ये उसका करम है उसी की इनायत।।

#रमेश

कविता:- सफर

जीवन के इस सफ़र में
प्रकृति ही है जीवन हमारा,
बढ़ती हुई आबादी में किंतु
हर मनुष्य फिर रहा मारा-मारा॥

मनुष्य इसको नष्ट कर रहा है
जिंदगी अपनी भ्रष्ट कर रहा है,
करके नशा देता भाषण
क्या नहीं जानता नशा नाश का कारण॥

मान प्रतिष्ठा या चाहे हो शोहरत
है निर्भर सब धन दौलत पर,
मान प्रतिष्ठा चाहे हो शोहरत
है निर्भर सब धन दौलत पर,
बनकर ब्रहमचारी सामने इस जग के
निगाहें रखता हर औरत पर॥

हर प्राणी ईश्वर की रचना
फिर भी प्राणी का प्राणी से बैर,
हर प्राणी ईश्वर की रचना
फिर भी प्राणी का प्राणी से बैर,
मतलब आने पर दुश्मन भी अपने
और मतलब जाने पर अपने भी गैर॥

मानव की है फितरत इतनी
दुनिया को बांटें धर्म का ज्ञान,
मानव की है फितरत इतनी
दुनिया को बांटें धर्म का ज्ञान,
मंदिर मस्जिद के नाम पे लेकिन
है लड़ता मरता हर इंसान
है लड़ता मरता हर इंसान॥॥॥

धन्यवाद॥॥

मुक्तक

मुक्तक

तेरी याद आज भी मुझको रुलाती है!
तेरी याद आज भी मुझको सताती है!
भूलना मुमकिन नहीं है तेरे प्यार को,
तेरी याद आज भी मुझको बुलाती है!

मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

मुक्तक

मुक्तक

हर शक्स जमाने में गुमनाम जैसा है!
दर्द और तन्हाई की शाम जैसा है!
जलता हुआ सफर है राहे-मंजिलों का,
जिन्दगी को ढूँढता पैगाम जैसा है!

मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

मुक्तक

मुक्तक

तेरी याद न आए तो फिर रात क्या हुई?
तेरा दर्द न आए तो फिर बात क्या हुई?
पलकों में अभी अश्क भी आए नहीं अगर,
तेरे ख्यालों से फिर मुलाकात क्या हुई?

मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

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