Poems

एक मुलाकात की तमन्ना मे

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे
एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे

आप हमारी हकीकत तो बन न सके
ख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे

आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल का
बिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे

सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम में
हम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे

जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस में
एक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे

sign

Belief

Belief in God

Belief in Values

Belief in Duties

Belief in Principles

Herein lies true belief

That our ancestors stood for

 

Todays youth

Literate though

More or little

Nevermind that

Uneducated still

Listless wanderers

Lost in useless thoughts

And idle gossip

Live like vagabonds

Proud of some silly

Westernized concepts

Handed down by a tribe

That was orignally pirates in the vast sea

 

The youth today

Believe in no God

Have no Values

Have forgotten Duties

And stand for no Principles

 

They have no morality

They have no credibility

They are lost in themselves

Always having a puzzled look

A slow, unwilling and confused gait

Listless about today

Living in some distant past

Fearing unsettled future.

 

 

 

 

ना जाने कब सुबह आएगी

किसी की आह में हम खोए हैं

ना जाने कब वो नज़र आएगी

एक रात की पनाह में सोये हैं

ना जाने कब सुबह आएगी

पूछो तो सासों के सुर बता सकता हूं

ना रूप, ना रंग, ना हाल बता सकता हूं

ना नाम, ना पता बता सकता हूं

मगर पूछो तो धडकन क़ी ताल बता सकता हूं

अहसास का अहसास …!

अहसास  का  अहसास  …!

मुझे   अहसास  हो  रहा  है,

कि  मेरा  दिल  मेरे  काबू  मेंना मेरे  पास,

भटक  रहा  हैजाने  क्या  आस  लिए

तेरे  ही  आसपास.…….

मुझे  अहसास  हो  रहा  है.

कि  ये  दुनिया  कितनी  सुंदर  और सुनहरी है,

और  ये मेरी  जिंदगी  कितनी  प्यारी  और हसीन  है,

वक्त  की  भी  कुछ  कमी  नहीं  है,

फिर  भी  मेरे  दिल  को  तड़पने  की  ही  है  चाह,

जाने  क्या  है  इसकी  कमी

किसकी  है  इसको  तलाश …..

एक  अजब  सा  अहसास,

मेरे  ही  अहसास  पर,

जो  मुझे  उलझन  मे  डाल  जाता  है,

कि  सबकुछ  है  पासफिर  भी,

हर  खुशी  है  साथफिर  भी,

ये  दिल  क्यूँ  अक्सर  हो जाता , प्यासा  प्यासा,

निशब्द  और  उदास…..

मुझे  अहसास  हो  रहा  है,

मानो  अब  विश्वास  ही  हो  गया  है,

कि  मेरा  दिल  रहेगा  मेरे  काबू  मे,   ना  मेरे  पास,

भटकता  ही  रहेगाजाने  क्या  आस  लिए,

तेरे  ही  आसपास,

जिसकी    मुझे  पहचान  है,  

पता  भी  है  पास….

 

 

 

                      “विश्व नन्द

ये चली कैसी हवा ….!

ये  चली  कैसी  हवा ….!

सोचा  था  खरीदार  बन,

आया  हूँ  इस  जहाँ  मे  मैं,

ये  चली  कैसी  हवा, कि  बिकता  ही  चला  हूँ  मैं…..….   ! .

जाना  था  मुझको  कहाँ, और,

आ  गया  किस  मोड़  पर,

अपनी  चाहतों  को  दूर  ही कहीं  पे  छोड़  कर,

कि  अपना  कहने  को  ख़ुद  ही  को,

ख़ुद  से  ही  डरता  हूँ  मैं, ये  चली  कैसी  हवा,

कि  बिकता  ही  चला  हूँ  मैं …..…!. .

 

पास  है  सबकुछ  मेरे, पर  फ़िर  भी  जाने  क्या  कमी,

भाग  दौड़  के  भंवर  में, सूझता  भी  कुछ  नहीं,

क्या  मुझे  पाना  है, जिससे  बेचता  हूँ  ख़ुद  को  मैं…

ये  चली  कैसी  हवा, कि  बिकता  ही  चला  हूँ  मैं ……..….   ! .

 

उलझने  दिल  की  न  सुलझीं, कोशिशें कितनी थी कीं,

दिल  कहीं  है  और,

ख़ुद  को  ढूँढता  हूँ  मैं  कहीं, बाट  तू  मुझको  दिखाए,

बाट  ही  तकता  हूँ  मैं…..

ये  चली  कैसी  हवा, कि  बिकता  ही  चला  हूँ  मैं………! .

सोचा  था  खरीदार  बन, आया  हूँ  इस  जहाँ  मे  मैं ….? .

 

“ विश्व नन्द ”

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