Poems

मेरी आदत

मुझे अब भी हवाओं में तुम्हे सुनने की आदत है ,
मुझे अब भी निशाओं में तुम्हे चुनने की आदत है ..
मैं अब भी फ़िज़ाओं में तुम्हे महसूस करता हूँ ,
मुझे अब भी घटाओं में तुम्हे बुनने की आदत है …..

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मैं और वो

चन्दन मेरा वजूद है लिपटे हुए हैं सांप ,
बेबस की ये दवा है क्या मीर किया जाये ….

गुलजार करने आया था वो बागबान मानिंद ,
गुलसन उजाड़ कर फिर वो मीर चल दिया ..

…atr

घर याद आया .

फिर मुझको मेरा घर याद आया .
अकेला था मेरा मन जब ,
न था कोई भी जब साया .
फिर मुझको …..
मैं खाने जब भी जाता हूँ ,
तो माँ की याद आती है ,
अकेले सोचता हूँ जब,
मुझे पल पल रुलाती है .
कभी दुविधा में जब मैं था,
तो ईश्वर याद न आया .
कभी तबियत बिगड़ने पर ,
मैं माँ का नाम चिल्लाया .
फिर मुझको मेरा घर याद आया ……

…atr

 

आरज़ू

दबी जबान में चलो आज बात हो जाये , आँखों ही आँखों में अब मुलाकात हो जाये
जज्बातों में अब आबरू बची भी रहे , चलो फिर आज दिल से दिल की बात हो जाये ….

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दिल की बातें

दिल की बातें पु६कर पहुंची जहाँ दिलबर मेरा ,
राह में एक अजनबी ने सुन लिया वो रो पड़ा …

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