Poems

मुक्तक 25

ख़ुदा ने क्या दिया तुमको, ख़ुदा ने क्या दिया हमको,

की तू है हुस्न की मल्लिका , औ मुझको आशिकी दे दी ..

 

 

…atr

 

मैं प्यार दूंगा .

भुला सकोगे न तुम कभी भी ,

की  तुमको इतना मैं प्यार दूंगा .

जो होगा चुलमन वो  होंगी  आँखे ,

उसी से तुमको निहार लूंगा .

मगर रहे याद तुम्हे सदा ये,

 उसी में नज़रें उतार लूंगा .

तू मेरा साकी मैं रिन्द तेरा, 

ये मयकदा ही तेरा बसेरा ,

पिला कभी तो मेरे हमनफ़स ,

तुम्हारे दर पे खड़ा हु बेबश ,

नज़र न फेरो , पिला के जाओ,

कसम है दिल में उतार लूंगा ..

भुला सकोगे न तुम कभी भी,

की तुमको इतना मैं प्यार दूंगा..

…atr

दिल का धुंआ भी तो देखा जाये….

 

कोई तो रंग मिलाया जाये

दिल का धुंआ भी तो देखा जाये।

बेबसी ये कि रोक भी न सको

और कोई पास से चला जाये।

जहां सेे भूले थे घर का रस्ता

फिर उसी मोड़ पे जाया जाये।

आईने और कितने बदलोगे

अक्स अपना कभी बदला जाये।

जिदंगी की किताब देखें जरा

कोई तो लफ्ज समझ में आये।

वक्त की तरह मिला हूं उनसे

क्या पता लौटकर न हम आये।

…………सतीश कसेरा

कौन किस्मत से भला जीता है……

कौन किस्मत से भला जीता है……….

ये उसके खेल का तरीका है

कौन किस्मत से भला जीता है।

पहुंच न पाते कभी मंजिल तक

रास्तों को भी साथ खींचा है।

सुबह दिल खूब लहलहायेगा

रात भर अश्क से जो सींचा है।

कोई दुआ या बद्दुआ तो नहीं

कौन करता ये मेरा पीछा है।

सुबह उठ जाये वो ऐसे-कैसे

रात भर बैठ कर तो पीता है।

लकीरें हाथ की न गिर जाएं

कस के मुट्ठी को जरा भींचा है।

………………सतीश कसेरा

 

Colourblind

In search of an existence, 
that’d almost sublimed, 
the true meaning of my innerself 
is still to be defined.

don’t you be prejudice about me, 
atleast for this mankind
although I am colour, but for humanity’s sake 
its better to be a colourblind.

neither restrict me within those borders 
nor into your minds, 
just as yours, even my birth is possible, 
together when my blend got binds.

neither conclude any pessimistic implication of mine 
as it can’t be named, 
nor fill me in your pictures of hatred 
as the same couldn’t be framed.

do not search hatred, into my 
different hue and shades, 
recognize my true character 
before the colour of humanity fades.


I do not belong to any religion, 
nor I do own any race
I am boundless like that sky 
that do not have a defined face.


do not classify me into violent names, 
that cause mankind to extirpate
leave me with my unbound existence, 
before I appear as a reason to hate.


paint your hearts with me 
but not your discriminative minds, 
so what I am colour but for humanity’s sake 
its better to be a colourblind. 

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