Poems

आज फिर याद में….

आज फिर याद में उनके आँशू बहे ,
वो सलामत रहे ,हम रहें न रहें .

अब तो दिन रात रहती है आँखे सज़ल ,
अब तो कटती है राते यूँ सुनकर ग़ज़ल .
है यही आरज़ू ये ग़ज़ल का सफर ,
यूँ ही चलता रहे, दिन गुजरता रहे.
आज फिर याद में उनके आँशू बहे ….

दर्द के गीत में प्यासे संगीत में,
तुमको गाते रहे , गुनगुनाते रहे
आज फिर याद में उनके आँशू बहे…

मैं कहीं भी गया तुम मेरे साथ थे,
जब अकेला था , तुम याद आते रहे..
आज फिर याद में……

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तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है
तुझसे एक बार मैं कह दू, तू मेरी जुस्तजु है

भॅवरा बनकर भटकता रहा महोब्बत ए मधुवन में
चमन में चारो तरफ फैली जो तेरी खुशबु है

जल जाता है परवाना होकर पागल
जानता है जिंदगी दो पल की गुफ्तगु है

दर्द–ए–दिल–ए–दास्ता कैसे कहे तुझसे
नहीं खबर मुझे कहां मैं और कहां तू है

शायर- ए- ग़म तो मैं नहीं हूं मगर
मेरे दिल से निकली हर गज़ल में बस तू है

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें जब मेरे शानों पे बिखरती है
सुलझ सी जाती है मेरी उलझी हुई जिंदगी

न उस रात चांदनी होती

न उस रात चांदनी होती

न उस रात चांदनी होती
न वो चांद सा चेहरा दिखता
न मासूम मोहब्बत होती
न नादान दिला ताउम्र तडपता

मैं तो सन्नाटा हूं

ये तो मुमकिन नही यूं ही फ़ना हो जाऊं
मैं तो सन्नाटा हूं फैलूं तो सदा हो जाऊं

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