Poems

गया चंद लफ़्जों में आज

सिमट गया चंद लफ़्जों में आज

सिमट गया चंद लफ़्जों में आज
ढल गये अहसास कुछ अश्कों मे आज
कहने को तमाम जिंदगी का तजूर्बा है मेरे पास
सुनने वाला कोई भी नही है आज |

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अधूरे ख्वाब

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Glasses-of-wine-002

मेरे साकी

तुम्हारी चाह ही मंज़िल हमारी ए मेरे साकी,
ज़रा अब तो पिला दे न , तमन्ना अब भी है बाक़ी.
मेरे साकी तेरे आँखों की मदिरा क्या बताऊँ मैं,
फ़क़त आँखों से चढ़ती है ,मगर दिल तक उतरती है ,
उतरना फिर भी वाज़िब था मगर अब ये लगा है कि,
उतरकर भी ये चढ़ती है , और चढ़ के फिर उतरती है .

 

…atrGlasses-of-wine-002

hope_inside_heaven__s_tears

पलकों पर आंसू रहते है

पलकों पर आंसू रहते है
दिल में जज्बात रहते है
कलम है जो कुछ कुछ लिख देती है
वरना होठ तो हमेशा खामोश रहते है

आंखो मे आसमां रहते है
पांव बादलों पर रहते है
लेकिन चंद लम्हों के लिये भी उड नहीं पाते
किसी की यादों मे हम कैद रहते है

क्या करें नादान है

क्या करें नादान है

ऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां
दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान है

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