Poems

उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई……

मिले थे फिर से तो, पर बात न होने पाई

उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई।

बुझ गए थे सभी चिराग मगर इक न बुझा

तो हवा जा के आंधियों को साथ ले आई।

जंहा से दूर निकल आये थे, वहीं पहुंचे

मेरे सफर में हर इक बार उसकी राह आई।

अपने हालात पे खुद रोये और खुद ही हंसे

हमीं तमाशा थे और हम ही थे तमाशाई।

मेरे हर दर्द से वाकिफ है आस्मां कितना

हम न रोये थे तो बरसात भी नहीं आई।

जिंदगी भर उनकी हर याद संभाले रक्खी

उम्र भर इस तरह हम उनके रहे कर्जाई।

~~~~~~~~सतीश कसेरा

जो आँख देख ले उसे

जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती है
देखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती है

फ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभर
उसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती है

महकते फूल भी उससे आजकल जलते है
तसव्वुर से उसके फिजा सारी महक जाती है

मदहोश हो जाता है मोसम लहराए जो आचॅल उसका
जुल्फें जो खोल दे वो तो घटाऍ बरस जाती है

तनहाइयों में जब सोचता हूं उनको
शब्द ओ शायरी खुद ब खुद सज जाती है

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ख्वाब मत बुन बावरी…………!

रिश्ते के स्वेटर के

प्यार की सलाई से

ख्वाब मत बुन बावरी!

शुरु में बड़ी आसान लगेगी

लेकिन दिल तक आते-आते

कभी टूटेगी ऊन

पडऩे लगेंगी गांठे

टकरायेंगी सलाईयां

कभी गलत होंगे फंदे

समझ नहीं पाओगी

कहां पर गलत हुई?

खींचतान कर गले तक पहुंचोगी

तो कई सलाई और आ जायेंगी

सारे फंदे खींच जायेंगे

सलाईयां आपस में टकरायेंगी

तुम बेबस होकर देखोगी

कि इसी बीच

कोई जाता हुआ लम्हा

रिश्ते के स्वेटर की ऊन का

एक सिरा खींच कर ले जायेगा

और ख्वाबों की बुनाई

सर्र….से खुलती चली जायेगी

रह जायेगा बस

यादों का एक उलझा हुआ गुच्छा।

जिसका भी उलझा

आज तक न सुलझा।

———————सतीश कसेरा

कौन न छला गया……….

किस लिये रो रही हो

नूर अपना खो रही हो

एक ऐसे के लिये जो

छोड़कर चला गया……….

वो था धोखा

पा के मौका

आके तेरे दिल में जो

आग सी लगा गया……….

प्यार कैसा प्रीत कैसी

बन गई है रीत ऐसी

देख इसको, देख उसको

कौन न छला गया……….

————–सतीश कसेरा

वरना कौन अपनी नाव देता है………………

पत्ता-पत्ता हिसाब लेता है

तब कहीं पेड़ छांव देता है।

भीड़ में शहर की न खो जाना
ये दुआ सबका गांव देता है।

हम भी तो डूबने ही निकले थे
वरना कौन अपनी नाव देता है।

किसी उंगली में जख्म देकर ही
कोई कांटा गुलाब देता है।

जहां बिकेगा बेच देंगे ईमां
कौन मुहमांगा भाव देता है।

जान देने का हौंसला हो अगर
फिर समंदर भी राह देता है।

जिंदगी दे के ले के आया हूं
कौन यूं ही शराब देता है।

प्यार खिलता है बाद में जाकर
पहले तो गहरा घाव देता है।
~~~~~~~~~~~~~~–सतीश कसेरा

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