Poems

jee liye

!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!

tere hi hontho se sun kar naam kisi aur ka
maine apne honth si liye

marne ko tau dil ne bahut chaha magar
na jaane kaise jee liye

ab taras aata hai uss insaan par
jiske liye tumne mujhe chor diya

bahut bari galti karte gar mar jaate
achha hi kiya jo jee liye…

@@ SAGAR @@
23/12/15 :: 9:33 PM

naakam mohbbat

!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

itne mash’hoor ho gaye hum
nakam jo hue mohabat main

ki hum se hamari hi dastaan
bayaan kar gaya ik ajnabi

@@ SAGAR @@
24/12/15 :: 2:00 PM

… और मैं खुश रहता हूं

PRINTING PLATE3

मर्जी उसकी

marji usaki compressed

मैं आंसू बटोर लाता हूं

सैकड़ों आंसू …. , यूं ही नहीं …. खज़ाने में मेरे ,

जब भी कोई रोता है , उसके आंसू बटोर लाता हूं .

किसके हैं … , कब गिरे थे … वज़ह …… बता सकता हूं .

उंगलियों के पोरों पर रख …
गिरने का…. वक़्त बता सकता हूं .
सफर अनज़ान ही सही .. पर खत्म किस जगह …
वो मंज़िल बता सकता हूं
आंसूओं से मिलान आसूओं का कर ..
फ़र्क़ बता सकता हूं
आंखों के….. मज़हब से …..नहीं वास्ता इनका ,
नमक क्यूं घुला… आंखों से निकलकर …
वो दर्द बता सकता हूं .
झूठी शान का है ……या भूखे पेट से टपका
चख के खारापन ……
इनका फर्क़ बता सकता हूं
मैं हर आंसू का किमिया बता सकता हूं ॥
कुछ खास आंसू भी रखें हैं , मेरे खज़ाने में ,
ज़िंदगी के दौड़ में नाक़ाम …..
और “ हासिल” से नाखुश
कई दुख के आंसू …..
बिकते ज़िस्म के भीतर . … मौजूद
पाकीज़ा रुह के .. आंसू
फिर भी …. समेट नहीं पाता हूं
एक़्वेरियम में कैद —
शीशे से झांकती
मायूस आंखों के आंसू ..
जो निकलते ही घुल जाते हैं ,
अपने ही संस्कारों के पानी में .
आसान नहीं है , हर आंख को इंसाफ़ दिला पाना
थक कर सोचता हूं , छोड़ दूं ये काम अपना
पर क्या करुं….
काम मन का हो तो , छोड़ा नहीं जाता
लाख चाह के भी मुंह मोड़ा नहीं जाता
अरे सुनी है … ये सिसकी .. अभी तुमने …
जाना होगा… मुझे ….
गिरने से पहले जमीं पर… थामना होगा उन्हें
क्या करूं , मैं हूं ही ऐसा …
शामिल .. उन चंद लोगों में….
जो बेज़ुबानों के बोल जानते हैं ,
जो उनके आंसूओं का मोल जानते हैं . ॥
………………..रविकान्त राऊत 
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