Poems

“गुनाह” #2Liner-22

ღღ___तुझको पाने की कोशिश भी, तू जो कह दे तो ना करूँ;
.
पर पाने की आरजू रखना, तो कोई गुनाह नहीं !!………‪#‎अक्स‬

tujh jaise ko kabhi zindgi mein aane nahi deinge

Jb mile the tumse,

to socha tumhe kbhi khone nahi deinge….

Dheere dheere Jana tumhe, fir soch Nek Ho tu….

Jb dekha guroor tumhara,

to faisla kiya tujh jaise ko kbhi jindgi me aane nhi deingee….

कोई मेरा नहीं होगा !!#2Liner-21

ღღ__कुछ इस तरह से लिक्खा है, उस ख़ुदा ने मेरा नसीब;
.
कि मैं तो सबका हो जाऊंगा “साहब”, कोई मेरा नहीं होगा !!…….‪#‎अक्स

I’ll run away

One day
I’ll run away
To a place,
Where nobody can find me,
even me.

Away from nostalgia,
aroma of affection and,
water of eyes.
A place hidden in my dreams!

” किया गुनाह क्या “

साँसे चल रही हैँ , बिन उसके..

आने वाला ,  जीने में मज़ा क्या…

चाह लिया उसे , उसकी इजाज़त के बगैर …..

इसमें किया गुनाह क्या ….

मोहब्त हैं उनसे , तभी मांगती हैं  निगाहें दीदार ….

वो ही आकर बताएं …

इसमें क़ुसूर – ए – निग़ाह क्या ..

 

 

पंकजोम ” प्रेम “

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