Poems

तेरा सजदा – 3

तेरा सजदा – 3

 

कोई सर उठा कर करता सज़दा

कोई सर झुका कर करता सज़दा

                         

                                   ….. यूई

तेरा सजदा – 2

Sajda 2

तेरा सजदा – 1

Sajda 1

काश मैंने तुमको पहचाना होता

काश मैंने तुमको पहचाना होता!
मेरे नसीब में मेरा मुस्कुराना होता!
कभी बेवसी न होती हालात की मुझको,
ज़िन्दगी जीने का मुझको बहाना होता!

Composed By #महादेव

दरके आइनों को

दरके आइनों को नाज़ुकी की जरूरत है
गर आ जाएँ इल्ज़ाम यही तो उल्फत है

फासले वस्ल के यू सायें से बढ़े जाते है
ये कोई मिलना या तुम्हारी रुखसत है

हरसूँ बिखर गए तेरे पन्नें नसीब के
अब तो खाली जिल्द की हसरत है

वक़्त रूठा किसी बच्चे की माफिक
जिसकी जिद है या कोई शरारत है

अब किस और जहान जाएँ’अरमान’
जिस तरफ देखिये बस नफरत है

दरके आइनों को नाज़ुकी की जरूरत है
गर आ जाएँ इल्ज़ाम यही तो उल्फत है

राजेश’अरमान’

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