Poems

ग़ुम हुए इंसा

ग़ुम हुए इंसा की तलाश क्या
ग़ुम ही रहेगा जहाँ रहेगा
राजेश’अरमान’

गिरगिट की सभा

गिरगिट की सभा
नया गुरु चुनने के लिए
कई बुजुर्ग गिरगिट ,
दावेदार बने
पर किसी पर न ,
बन सकी सहमति
युवा गिरगिटों की
मांग सूची में
पहली और आखरी मांग
आजकल रंग बदलने के
नए नए तरीके आ गए है
हम अब तक पुरानी
प्रथा चला रहे है
हमें गुरु ऐसा चाहिए
जो हमारे रंग बदलने का
आधुनिकीकरण करें
सब देखने लगे इधर उधर,
सभी युवा गिरगिटों ने
एक स्वर में कहा
अब हमें गुरु गिरगिट नहीं ,
इंसान चाहिए
राजेश’अरमान’

काफिलों के साथ साथ

काफिलों के साथ साथ चलते रहे
दुनिया के रंग में बस ढलते रहे
राजेश’अरमान’

पतंग आसमाँ में

पतंग आसमाँ में उड़ती भी है
और आसमाँ में कटती भी है
राजेश’अरमान’

खामख्वाह वो अपने अंदाज़

खामख्वाह वो अपने अंदाज़ सितम के बदलते है
पुराने अंदाज़ भी सितम के कम लाज़वाब न थे
राजेश’अरमान’

 
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