Poems

” भूख ” (Poetry on Picture Contest)….

गरीबी ख़ुद के सिवा, औरों पे असरदार नहीं होती;

शायद इसीलिए भूखों की, कोई सरकार नहीं होती !!

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महज़ दो वक़्त की रोटी, और चन्द पैरहन तन पे;

फक़ीरों को इससे ज्यादा की, दरकार नहीं होती !!

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रोटियां फेंकने से बेहतर है, किसी गरीब को दे-दो;

किसी के खा लेने से, रोटी कभी बेकार नहीं होती !!

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भूख का दर्द “साहब”, हर एक दर्द से बढ़कर है;

गर ये दर्द ना हो तो, शायद कोई तकरार ना होती !!…..#अक्स

 

जब बन जाता है हमारा याराना

इक वक्त, इक रब्त जुड़ा था,   [रब्त = Relation]

वक्त गुजर गया, रब्त रह गया

कुछ लम्हो की दास्ता बनकर ये याराना

पक्के अल्फ़ाजों में ज़हन में छप गया

कुछ पल अजीज है बहुत,

कुछ लोग अजीज है

दूर हो कितने भी

अरसा गुजर जाने के बाद भी

करीब लगते है, अपने लगते है

जिंदगी इनके होने से ही

अपनी लगती है,

मुकम्मल लगती है, जिंदगी की दास्ता  [मुकम्मल  = Complete]

जब रब्त जुड़ता है

जब बन जाता है हमारा याराना

Happy B’day Bhaiji 🙂


 

दिल का गरूर

Dil Ka Garoor

भूखी दास्तां (Poetry on Picture Contest)

भूखी दास्तां (Poetry on Picture Contest)

वो आंखे आज तक चुभती है मुझको
एक दम खाली,
खाली कटोरे सी
जो पूछ रही हों,
कह रही हो अपनी भूखी दास्तां
लफ़्ज ही बेबस है,
नहीं समेट सकते दर्द को उनके
खाली है वो भी
उनके खाली पेट की तरह!

“शौक-ए-दीदार” #2Liner-59……

ღღ__इबादतगाह भी जाऊं तो, तुझे ही ढूँढती हैं नज़रें;
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शौक-ए-दीदार ने तेरे, मुझे काफ़िर बना दिया !!…..#अक्स
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