Poems

प्यास तेरी चाहत की बेशुमार आजकल है

प्यास तेरी चाहत की बेशुमार आजकल है!
मेरी नजर में हरपल आती तेरी शकल है!
खामोश़ हो गया हूँ गम-ए-जुदाई से मगऱ,
साँसों’ में तेरी दौड़ती तस्वीर की नकल है!

Composed By #महादेव

“रंग” #2Liner-79

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ღღ__क्यूँ उड़ा-उड़ा सा लगता है, तुम्हारे चेहरे का रंग “साहब”;
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सब लोग तो कर रहे हैं, कि रंगों का त्यौहार आया है !!…..‪#‎अक्स‬
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ek sher

हंस देते अगर कभी हँसना सीखा होता
हाथ थामे रही शाम-ए-उल्फ़त हमारा
बता देते धुप क्या है
अगर सेहर में आफताब को देखा होता

-सत्य ‘प्रिय’ खन्ना

उसने ख़ामोशी को भी चीखते

उसने  ख़ामोशी को  भी चीखते देखा  
रंजिश हुई जब क़ल्ब के शोर से
                 राजेश’अरमान’

मेरी कलम में तो कोई बात न थी

मेरी   कलम में  तो कोई बात न थी
तेरे तजुर्बों ने मुझे कलमकार बना दिया
                     राजेश’अरमान’

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