Poems

काश दिलासो की कश्तियों में

काश दिलासो की कश्तियों में
कोई छेद न होता
            राजेश’अरमान’

अक्सर हादसे सहते रहे

अक्सर हादसे सहते रहे
काश ख्वाब भी कोई हादसा होता
                राजेश’अरमान’

ख्वाब तो आफताब है

ख्वाब तो आफताब है
शाम होते ही ढल जाते है
             राजेश’अरमान’

हिचकोलों से भरी ज़िंदगी

हिचकोलों से भरी ज़िंदगी
ढूंढ़ती किनारा चुपचाप सा
          राजेश’अरमान’

वो ज़ज़्बा कहा खो गया

वो ज़ज़्बा कहा खो गया
जब इंसा सिर्फ इंसा था
          राजेश’अरमान’

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