Poems

पंछी

भटकते फिर रहे हैं जंगलों में शांति के पंछी,
इन्हें दो आसरा मत व्यर्थ में बातें बनाओ तुम,

सरकते जा रहे इन पेड़ों के घरोंदों से ये पंछी,
इन्हें दो सहारा मत अर्थ की रातेँ बनाओ तुम,

हो चुकी कैद ऐ बा-मुशक्क्त की सज़ा पूरी पंछी,
इन्हें दो किनारा मत स्वार्थ ही गाके सुनाओ तुम।।

राही अंजाना

दिल की बातें …

कभी दिल से दिल मिलाकर तो देखो
उस के लिए अपने अरमान जगाकर तो देखो
जालिम आंखों से तो हर कोइ मुमुस्कुरा लेता है
लेकिन कभी मोहब्बत की राहो मे आकर तो देखो

जो बात खामोसी मे है वो बात लब्ज़ों में कहा
दिल के अरमान की खबर सबके आंखों में कहा
केह कर प्यार नहीं करते जनाब हम
हमारी यह बाते आपके दिल की किताबों में कहा

ना जाने क्यूँ हवाएँ आज मुझसे कुछ कह रही है
तुम्हारे पास होने का एक हसीं लम्हा मुझे दे रही है
वो आंखे वो होठ और वो जुल्फें बस यही कहती है
जेसे तेरे प्यार की कहानी इन वादियों में बेह रही है……

आप

ये झुकी हई आंखों से मानो सुनहरी शाम सी लगती हो
ये हसीन चेहरा एक खिलता गुलाब सी लगती हो
किसी की जान न ले लेना आपकी मुसकान की तलवार से
हर मेहखाना का कभी न उतरने वाला शराब सी लगती हो

वो कौन है……

ये प्यारी मुस्कान आपकी पहचान बन जाए
खिलता चेहरा लोगो के लिए ये शराब बन जाए
ये होठ ये पलकें और ये गाल मानो मुझसे यह कह रहे हैं
की खोजा इन सब में और तू मेरा गुलाम बन जाए

ये झरने ये परिंदे और हवा के झोंके,
सब तेरे साथ चलने लगेंगे
तुझसे मेरी दोस्ती देख ये जमाने वाले
मुझसे जलने लगेंगे
बस तू कभी खफ़ा होने की बात न
करना मेरी दिल-ए-धड़कन
वरना तेरे साथ बिताए वो हसीं पल,
मेरे दिल को चीरने लगेंगे

दिल देने की हद हो तो ये दिल खोल के रख दूं
रूह रूह प्यासी है मेरी कहो तो जहां मे बयां कर दूं
मेरी दोस्ती का प्यार कबूल कर ए हुस्न-ए-मलिका
हस कर कह दो तो ये दुनिया तेरे नाम लिख दूं

मेरे गीत की वो मेहक कौन है
मुसकान से कत्ल की चहक कौन है
मेरी कलम की न जाने वह मोहब्बत है
फिर क्यूँ वह सवाल है ,कि वो कौन है ……..

पतंगा

पतंगे को दीपक की आहोशी में जाकर अच्छा लगा,
ज़िन्दगी को मौत की मदहोशी में आकर अच्छा लगा,

बन्द रही थी सर्द रातों में कहीं वीराने में जो मोहब्बत,
आज खुलेआम उसे गर्मजोशी में आकर अच्छा लगा,

टोकते रहे सभी मेरी खुली आवाज़ को लेकर अक्सर,
और मुझ अंधे को रौशन खामोशी में आकर अच्छा लगा।।

राही अंजाना

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