Poems

ढूंढते क्या हो हमें अब……..

ढूंढते क्या हो हमें अब, इन वीरान कूचों मे
मिलने की खुवाईश हो, तो हमारे कब्र पर चले आना…………!!

D K

आँखों से आंसू गिर पड़े……

आँखों से आंसू गिर पड़े आज, इस यकीन लव्ज़ को सुन कर
के कभी हमने कहा था उस से मोहोब्बत यकीन का दूसरा नाम है………….!!

D K

शख्शियत…..

इस चाँद की शख्शियत भी कुछ काम नहीं तुझ से ज़ालिम
जब भी मन करता है देखने को, कम्बख्क्त ये नज़र नहीं आता……………!!

D K

मुझे भी शौख हुआ था………

मुझे भी शौख हुआ था इस मोहोब्बत का साहिब
जब गए इसको खरीदने, तो पूरी ज़िन्दगी ही बैचनी पड़ी……………!!

D K

तस्वीर……

न जाने कैसे और कब इस घर की तस्वीर बदल गई
के कभी मरीज़-ऐ-मोहोब्बतो का यहाँ जमघट लगा करता था………….!!

D K

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