अनसुलझी पहेली “रहस्य “देवरिया

अनसुलझी पहेली “रहस्य “देवरिया

Dosto गोरखपुर में हो रहे मासूम बच्चों की मौत बहुत ही दूखद हैं मेरे चार शब्द उन बच्चों नाम (( plz god sef the all children’s ))

एक एक कर जिन्दगीया निगलती जा रही हैं ये ,
एक अनसुलझी पहेली बनती जा रही हैं ये ,,


खिले थै बड़ी मन्नतो से जिनके ऑगन में फूल,
उन माँओ की गोद सूना करती जा रही हैं ये ,


रहा करती थी हर पल खुशियाँ जिनके घरों में ,
वाहा गमों का सागर भरती जा रही हैं ये ,,


माँ बाप मजबूर हैं गरीबी इस काल के आगे ,
हर दवा दुआ को बेअसर करती जा रही हैं ये ,,


एक एक कर जिन्दगीया निगलती जा रही हैं ये /

” रहस्य ” देवरिया

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