मुक्तक

टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं!
चाहत की शमा के परवाने बहुत से हैं!
एक तू ही नहीं है आशिक पैमानों का,
जामे‍‌-मयकशी के दीवाने बहुत से हैं!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

2 Comments

  1. Neha - May 24, 2018, 7:42 pm

    Superb sir

  2. राही अंजाना - May 27, 2018, 11:47 am

    Super

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