Shekhar

  • ऊपर से कुछ दिख न पाए , अंदर अंदर होता है
    गहराई में नप न पाए , प्रेम समंदर होता है
    लोगो ने है कितना लूटा प्रेम तो फिर भी पावन है
    जिसमे आंख से आंसू छलके, प्रेम वो सूंदर होता है
    प्रेम का देखो साधक बनकर, व्याकुल ब्यथ […]

  • किनारो के तलासी थे , मगर साहिल गँवा बैठे
    तेरे रस्ते पे आये हम ,मगर मंजिल गँवा बैठे
    आधे रस्ते ही रहगाई तुझे पाने की मेरी चाहत
    चैन खोया ,नींद खोई और ये दिल गँवा बैठे
    शेखर कुमार साहू

  • किनारो के तलासी थे , मगर साहिल गँवा बैठे
    तेरे रस्ते पे आये हम ,मगर मंजिल गँवा बैठे
    आधे रस्ते ही रहगाई तुझे पाने की मेरी चाहत
    चैन खोया ,नींद खोई और ये दिल गँवा बैठे
    शेखर कुमार साहू