Shakun

  • देख लूँ एक बार इन आँखों से बारिश को,
    तो फिर इन आँखों से कोई काम नहीं लेना है,
    बंजर पडे मेरे ख़्वाबों की बस्ती भीग जाए एक बार,
    तो फिर इस बस्ती के सूखे हुए ख़्वाबों को कोई नाम नहीं देना है,
    चटकता सा खटकता ह […]

  • मैं हक़ीक़त में आजादी का एहसास करने ही लगा था के बस।
    फिर से मुझे ज़ंजीरों में जकड़ा जाने लगा।।

    आ ही गया था के वो लम्हा ए इमकान (सम्भावना) खुशनसीब,
    के बस यह एक ख़वाब है मेरा मुझे ये दिन रात जताया जाने लगा, […]

  • तलाशती ये ज़िंदगी कचरे के ढेर में रोटी.
    फेक देते हैं हम जो अनुपयोगी समझ के.

    कैसे करते गुजर बसर ये भी इंसान तो हैं
    जिंदगी ये पाकर मौत गले लगाये चल रहे.

    ज़हर भरे स्थानों में इन्हे अमृत की खोज है.
    ये ज […]

  • जब खुश होता हूँ ऐ ज़िन्दगी तो तुझे गोद में उठा लेता हूँ,

    हो जाऊं गर खफा तो तुझे जम के सुना लेता हूँ,

    मिलती नहीं है तू यूँही हर किसी को नसीब में,

    मेरे हिस्से में तू आई है ज़िन्दगी,

    तो खुल कर ख़ुशी मना लेता हूँ,

    सुना है ऐ ज़िन्दगी तू अपने रंग बदलती है,

    इस डर से मैं खुदपर तेरे ही रंग चड़ा लेता हूँ॥

    राही (अंजाना)