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  • शकुन सक्सेना posted an update 1 year, 4 months ago

    गरीब की प्याली में लो पुलाव आ गया,
    फिर से शहर में चुनाव आ गया,

    चौराहे पर लगी है अलाव ए आग,
    फिर सर्द हवाओं को लगता है खुमार आ गया,

    चुप कर खामोशी से बैठे थे छिपकर जो नेता,
    आज फिर लगता है उनको बुखार आ गया,
    फिर से शहर में चुनाव आ गया।।

    लड़ाते रहे बड़े सियासी मोहरों को बिसात पर,
    आज प्यादों का फिर से लो काम आ गया,
    फिर से शहर में चुनाव आ गया॥
    राही (अंजाना)