सीमा राठी

  • किसतरह तेरी यादों की रात जाएगी?
    किसतरह तेरे गम की सौगात जाएगी?
    जागे हुए हैं ख्वाब भी आँखों में कबसे,
    कब तेरी चाहत से मुलाकात जाएगी?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तेरी उम्र तन्हाई में गुजर न जाए कहीं!
    तेरी जिन्दगी अश्कों में बिखर न जाए कहीं!
    क्यों इसकदर मगरूर हो तुम अपने हुस्न पर?
    कोई गम कभी दामन में उतर न जाए कहीं!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आरजू हालात की मोहताज नहीं होती है!
    ख्वाहिशों में लफ्जों की आवाज नहीं होती है!
    जब रोक देती है कदमों को तकदीरे-मंजिल,
    हर आदमी की कोशिश आगाज नहीं होती है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आरजू हालात की मोहताज नहीं होती है!
    ख्वाहिशों में लफ्जों की आवाज नहीं होती है!
    जब रोक देती है कदमों को तकदीरे-मंजिल,
    हर आदमी की कोशिश आगाज नहीं होती है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जब हमारा किसी से रिश्ता टूट जाता है!
    प्यार का हाथों से गुलिस्ताँ छूट जाता है!
    हम खोजते हैं मंजिलें वफाओं की लेकिन,
    रास्तों में वक्त का फरिश्ता रूठ जाता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आज भी मुझको तेरा हसरत-ए-दीदार है!
    आज भी मेरी नजर को तेरा इंतजार है!
    जोड़ता रहता हूँ तेरी चाहतों की कड़ियाँ,
    आज भी मुझको तमन्ना तेरी बार बार है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मैं तेरी तमन्ना को छोड़कर आया हूँ!
    मैं दर्द की बंदिश को तोड़कर आया हूँ!
    मैं भूल गया हूँ मंजिलें राह-ए-इश्क की,
    अश्कों के तूफान को मोड़कर आया हूँ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • मेरा सकून तेरी मुलाकातों में है!
    तेरी तमन्ना दिल के जज्बातों में है!
    हरवक्त खींच लेती है तेरी जुस्तजू,
    तेरी यादों की खूशबू रातों में है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • जबसे तेरी चाहत में नाकाम हो गया हूँ!
    दर्द और तन्हाई का पैगाम हो गया हूँ!
    मैं ढूंढता रहता हूँ सब्र को पैमानों में,
    तेरी याद में भटकी हुई शाम हो गया हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जबसे तेरी चाहत में नाकाम हो गया हूँ!
    दर्द और तन्हाई का पैगाम हो गया हूँ!
    मैं ढूंढता रहता हूँ सब्र को पैमानों में,
    तेरी याद में भटकी हुई शाम हो गया हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जबसे तेरी चाहत में नाकाम हो गया हूँ!
    दर्द और तन्हाई का पैगाम हो गया हूँ!
    मैं ढूंढता रहता हूँ सब्र को पैमानों में,
    तेरी याद में भटकी हुई शाम हो गया हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • अभी रिश्ता दिलों का धड़कनों में चलने दो!
    अभी #शामे_तन्हाई को रात में ढलने दो!
    कभी तो मिलेगा हमें भी रास्ता मंजिल का,
    रोशनी उम्मीद की बेखौफ सा जलने दो!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • क्यों जिन्दगी में प्यार से डरे हुए हैं लोग?
    राहों में मददगार से डरे हुए हैं लोग!
    ठहरी सी परछाइयां हैं मंजिलें बनकर,
    गमों के कारोबार से डरे हुए हैं लोग!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • गुजरे हुए जमाने की तुम बात न करो!
    दर्द के अफसाने की तुम बात न करो!
    कुछ देर तलक होश में रहने दो अभी,
    जाम के पैमाने की तुम बात न करो!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • काश तुमसे चाहत को बोल पाता मैं भी!
    काश गाँठें लफ्जों की खोल पाता मैं भी!
    ठहरी हुई निगाहें हैं मेरी पत्थर सी,
    काश तेरी बाँहों में डोल पाता मैं भी!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

    • Panna replied 2 weeks ago

      ख़्वाहिशें मेरी उड़ती पतंग की तरह हे
      ख़यालों की हवा में बस उड़ती जाती हैंl

  • तुमको देखकर मेरा दिल मचलता है!
    तुमको सोचकर मेरा दिल बहलता है!
    कैसे मैं लगाऊँ जख्मों पर बंदिशें?
    मुझको गमें-ख्याल दिन रात कुचलता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • यूँ ही उम्र तन्हा गुजरती रहेगी!
    बस तेरा इंतजार करती रहेगी!
    चाहत तैरती है अश्कों में लेकिन,
    तेरी याद रगों में चलती रहेगी!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • यूँ ही उम्र तन्हा गुजरती रहेगी!
    बस तेरा इंतजार करती रहेगी!
    चाहत तैरती है अश्कों में लेकिन,
    तेरी याद रगों में चलती रहेगी!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

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