saundaryanidhi1

  • वो है बेखबर,
    शायद न हो उसे खबर!
    कैसे हुआ ये इश्क़ मुझे न पता चला,
    इन दिनों इश्क़ इतने करीब से गुजरा की लगा बस हो गया।
    आते जाते उसे देख खुद में मुस्क़ुरती हूँ।
    पाने की चाह किसे है,
    बस उसे जी भर देखना च […]

  • एक प्रश्न है मुझे,
    ये इंसान क्या हो गया है तुझे?
    क्यों कर रहा है ऐसे काम,
    जिससे हो रहे हो बदनाम।
    क्या हक़ है तुझे,
    कर रहा इस सृष्टि को नष्ट,
    ये इंसान होगा तुझे ही कष्ट।
    मैंने तम्हे बनया ह […]

  • तुम शान थी मेरी ,
    तुम मान थी मेरी ,
    तुम अभिमान थी मेरी ,
    इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी !
    जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने ,
    परिवार में बेटो के चाह में पागल ,
    पर […]

  • हाँ, नहीं हो तुम साथ मेरे ,
    पर क्यों लगता है तुम पास हो मेरे !
    हर घड़ी हर पहर जिंदिगी लगाती है अब ज़हर,
    तेरी ये नाराज़गी, और कहर लगती है धुप की दोपहर!
    तो क्या हुआ तुम ने छोड़ दिया साथ मेरा ,
    अब मान लिया […]

  • saundaryanidhi1 posted an update 2 months ago

    मेरी पहली कविता
    बेनाम बच्चे
    एक सुबह , स्कूल की सैर,
    उस दिन रुक गये मेरे पैर।
    देखा कुछ ऐसा,
    विश्वास नहीं हुआ वैसा।
    छोटे – छोटे हाथों में बड़े – बड़े प्याले,
    खोटे सिक्कों से भरे हुए थाले।
    आखों में झलकती पेट की भूख,
    परिवार के जिम्मेदारी में निभाते सुख – दुख।
    ऐसे बच्चें जिनके शौक नहीं होते,
    हां, हां वहीं बच्चे…[Read more]