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  • Kavi Sandeep Dwivedi posted an update 3 weeks, 5 days ago

    एक फूल लाया हूँ तुम्हारे लिए
    मेरे तुम्हारे प्यार के दरमियाँ था जो

    जो कुछ तुम्हारी ही तरह है
    लहरदार ,लचकदार
    खुशबु भी कुछ
    तुम्हारी खुशबु के मिठास जैसी ..

    लेकिन आज तूम्हे देने वजह कुछ और है
    इसकी भी उम्र थी
    हम दोनों के प्यार की तरह
    बस कुछ दिनों की
    देखो ,मुरझाने लगा है ये भी..!
    खैर ..रख लो
    जो पंखुडियां नीचे गिरी थी
    उन्हें भी कागज़ में समेटा है
    देख लेना वो कागज़ भी जरा
    मैंने तो कुछ नही लिखा पर
    शायद, कहीं पंखड़ियों ने कहीं कुछ लिख न दिया हो
    मेरी तुम्हारी बीती हुई दास्तान..

    चलो, मिलकर बाँट लेते हैं
    खुशबुयें तुम रख लो
    टहनियां मेरे पास सूखने दो..

    वैसे भी क्या फर्क पड़ता है
    सूख तो दोनों ही गए हैं
    पंखुडियां भी..
    और टहनियां भी …!!!
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