Kavi Sandeep Dwivedi

  • एक फूल लाया हूँ तुम्हारे लिए
    मेरे तुम्हारे प्यार के दरमियाँ था जो

    जो कुछ तुम्हारी ही तरह है
    लहरदार ,लचकदार
    खुशबु भी कुछ
    तुम्हारी खुशबु के मिठास जैसी ..

    लेकिन आज तूम्हे देने वजह कुछ और है
    इसकी भी उम्र थी
    हम दोनों के प्यार की तरह
    बस कुछ दिनों की
    देखो ,मुरझाने लगा है ये भी..!
    खैर ..रख लो
    जो पंखुडियां नीचे गिरी थी
    उन्हें भी कागज़…[Read more]