Rakesh

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  • Shakun Saxena - "कभी यूँ भी आ मेरे ख़्वाबों में के मुझे खबर ही न हो, मैं सोता रहूँ रात भर और सहर ही न हो। कभी दिन की कड़ी धूम कभी साँझ की छाया में बैठा रहूँ, तू किसी साये सी मेरे साथ रहे और मेरा इंतज़ार खत्म न हो। तू छुप […]"View
    active 1 month, 1 week ago