Ranjit

  • बैठा हुआ था मैं निरुत्तर सा होकर,
    कि किसी की आवाज़ आई
    पूछा, तो कही, मैं हूँ “तन्हाई”
    आपका साथ निभाने को आई
    शून्यता सी होठों पे
    मुस्कुराहट ने धाक जमाई
    हँसी आई, कहा मैंने
    तुम तो खुद […]

  • कैसे होते हैं……!
    ———————————

    कोई पहचान वाले अनजान कैसे होते हैं
    जानबूझ कर कोई नादान कैसे होते हैं
    बदलता है मौसम वक़्त और’लम्हें सुना हेै–
    वक़्त पर बदल जाए–इंसान कैसे होते है […]

  • भारतीय हो-भारतीय रहो
    ———————————-

    भारतीय हो–भारतीय रहो
    सर ऊँचा कर भारतीय कहो
    मिट्टी यहाँ की,संस्कृति यहाँ की
    संस्कारों में पली-बढ़ी है
    शक़्ल-ओ-सूरत मनुष्य एक सा
    फिर,क […]

  • अब तो संभलो…!
    —————————-
    स्वार्थ के हर रंग मेें
    रंग गया है दिल…..देखो
    और मुस्कुराकर कह रहें हैं—
    ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!!

    “मतलब” के रस्से से अब […]

  • …..बढ़ रहा है क्यों–??
    —————————-
    प्यार दिखता नही,नफ़रत घटती नहीं
    तक़रार का अंगार बढ़ रहा है क्यों…?
    इंसानियत मिलती नहीं,हैवानियत मिटती नहीं
    संस्कारों का बिखराव बढ़ रहा है क्यों..?? […]

  • ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है
    —————————————-

    कोई एहसास दिल को छुआ है
    मुमकिन है,आपका आना हुआ है

    ख़्वाबों की धुन्ध छँटने लगी
    इक फ़साने का, हक़ीक़त होना हु […]

  • ज़िंदा हूँ,कि–मेरा प्यार तुम हो
    —————————————

    तेरे दिल में याद बनकर समां जाऊंगा
    तेरी आँखों में नशा बनकर छा जाऊंगा
    क़शिश की सरहद से दूर ना जा पाओगे–
    मैं खुशबू ब […]

  • नहीं थकती……।
    —————————-
    अश्रुपूरित नयन मेरे क्यों….?
    राह तुम्हारी ताकते नही थकती

    शून्यमात्र बिन तेरे-जीवन के पल
    “प्रीत”हमारी-कहते नही थकती

    मनुहार दिल की-सुने तेरा दिल भ […]

  • अश्क़
    ————
    बातों ही बातों में
    पलकों की दामन में-
    मोतियों से कुछ दिख पड़ते
    “अश्क़”हैं ये–बुलबुले अरमानों के

    कभी चहकती खुशियाँ
    कभी ख़्वाब लुटतें हैं
    चेहरे खिल जाते,कभी–
    भीग जाती पलकें हैं

    मुस्कु […]

  • नहीं थकती……।
    —————————-
    अश्रुपूरित नयन मेरे क्यों….?
    राह तुम्हारी ताकते नही थकती

    शून्यमात्र बिन तेरे-जीवन के पल
    “प्रीत”हमारी-कहते नही थकती

    मनुहार दिल की-सुने तेरा दिल भ […]

  • ग़रीब कौन है…?
    वो—
    जो कष्ट से जीवन जीता है
    मुफ़लिसी की घूंट पीता है
    कपड़े तन पे नहीं
    आनंद जीवन में नहीं
    सहमी मज़बूर ज़िन्दगी
    “पॉलीथिन”में ग़म डुबोने–
    की नाकाम कोशिश–और
    खुद ही मरती ज़िन्दग […]

  • Ranjit posted an update 6 months, 3 weeks ago

    Hi to all

  • Ranjit posted an update 7 months, 2 weeks ago

    Hi saawan team

  • Karke naadaani….
    Aaj khush ho rahe hain
    Jhelte pareshani-
    Aaj khush ho rahe hain

    Chhorr kar pehchan ki-
    Sabhi nishaniyaa
    Badh rahi hai naitikk baimaaniyaa
    Bannkarr ADHURE gyaani
    Aaj khush ho rahe […]

  • Ek waadaa phir Milne ka bs wada bhr rah jate hain
    Bah jata hai samay ka dariya wo udhar- hum idhar rah jate hain

    Nikal jate hai door bahut pichhe ojhal saare ho jate hai
    Prr jati hai dhul yaado pr khandahar […]

  • WO sitam karte-karte choor ho gye
    Hum sahte- sahte mashahoor ho gye

    Lgg gyi hai aadat sahne ki hame
    Ya apni aadat se wo mazboor ho gye

    Her taraf jo aalam tha— kaise kahe
    Apni zindgani se hum door ho […]

  • baithaa huaa thaa main
    niruttar sa hokarr–
    ki,kisi ki aawaaz aayee
    puchha — to kahaa
    main hu ” Tanhaai”—aapka sath
    nibhaane ko aayee
    shunytaa si hotho pe
    khillkhilaahat ne dhakk jamaaii
    hasi aayee— […]

  • SHRINGAAR KI EK RACHNAA
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    mera mehboob mera sanam hai…I
    —————————————————–
    saawan ka baadal——
    hai unke aankho […]

  • Chhtpataa rahi insaaniyat
    haivaaniyat ke quaid mei-
    sisak…rahaa bhaaichaaraa
    bddniyatee ke aeib mei.

    khoon ki qeemat nhi…(?)
    wo to, bss dikhne mei laal hai
    hrr koi ek-duze ko jhhpattne ki
    saazisho mei […]

  • Jaane kyu———–??
    logg yahaa pe
    hote betab,saath paane ko
    ye zindagi to hai
    kewal aane–jaane ko
    sunaa hai Maine buzurgo se
    padhaa hai Maine grantho mei
    aana–jaana akelaa hotaa hai
    phir,kis baat ka […]

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