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  • Pankaj Garg posted an update in the group Group logo of हिंदी कवितायेंहिंदी कवितायें 7 months ago

    # शहीद-ए-आजम #

    कुछ मेरी औकात नहीं , कि तुझ पर कलाम चलाऊं मैं
    कुर्बानी तेरी करे बयां , वो शब्द कहाँ से लाऊं मैं
    नाम जुबां पर लूँ तेरा तो पलकों को झपकाउं मैं
    मुड़े हुए पन्नों को हर्फ़ों से आज सजाऊँ मैं
    जब भारत माँ का आँचल था लगा चीर-चीर होने
    गोरे बसने आये जैसे नागिन आयी हो डसने
    काले मेघों का साया जब भारत पर मंडराया था
    लुटती देख आबरू माँ का दिल भी जब घबराया था
    जब भारत का सूरज भी त्राहि- त्राहिमाम चीखा था
    तब खटकड़ में एक सिंहनी कोख से सूरज चमका था
    भारत माँ की उम्मीदों में तू उत्सव बन कर आया था
    जैसे बरसों बाद कहीं बादल ने पानी बरसाया था
    भारत माँ बोली कि मैं गद्दारों पर शर्मिंदा हूँ
    चीख पड़ा सरदार कहा माँ अभी तलक मैं जिन्दा हूँ
    अंग्रेजों को घाट घाट का पानी उसने पिला दिया
    अंग्रेजी सत्ता का तख़्त-ओ -ताज पूरा हिला दिया
    आजादी के हवन कुंड में वो तो अग्निचेतन था
    अंग्रजों के सीने का तीरों के जैसे भेदन था
    लेकिन मृत्यु दुल्हन को तो वो नवयुवक भाया था
    सहमा होगा काल भी इक पल जब उसको लेने आया था
    तुझे गले लगा कर तो वो फांसी भी रोई होगी
    झूलते देख लाडला फांसी, धरती की चुनर धानी रोई होगी
    रोया होगा इंकलाब का भी वो बासंती चोला
    चूमा जब फांसी को तूने अम्बर भी होगा डोला
    तड़प गयी होंगी लहरे तो सागर भी रोया होगा
    फांसी वाले आँगन का पत्थर पत्थर रोया होगा
    दूर कही अम्बर में भी कोई तारा टूटा होगा
    आँखों में जब तेरी खून का लावा फूटा होगा
    तूने आजादी के मंदिर की बुनियाद खड़ी की थी
    इंकलाब की बलीवेदी पर अपनी शाख बड़ी की थी
    हर इक हर्फ़ उबलता है,जब कोई तुझ पर लिखता है
    तेरी मूरत का पत्थर भी हरदम आग उगलता है
    तेरी कुर्बानी का अब ये क्या अहसान चुकाएंगे
    अरे गांधीजी के बन्दर है बस कुर्सी कुर्सी चिल्लायेंगे
    याद तुम्हे नवम्बर 14 , नहीं भूले 2 अक्टूबर को
    30 जनवरी याद रही , पर भूले भारत के बेटों को
    23 मार्च को याद जरा उन शहीदों को भी कर लो
    आँखों में भर लो पानी सीने से चिंगारी उगलो
    तेरी पूजा में तो बस मैं इतना ही कह जाऊँगा
    तेरी छोटी आयु को सदियों से लंबी कह जाऊँगा
    शत शत बार नमन तुझको और तेरी वीर जवानी को
    दोहरायेगा इतिहास बार-2 तेरी अमर कहानी को
    तू शहीदों का आजम, तेरी ख्याति सबसे बढ़कर है
    मैं सजदा कर लूँ उस फांसी का,जो तीरथ से बढ़कर है ।।