Neetika sarsar

  • मै जब से तेरी एक तस्वीर बनाने में वयस्त हूँ,
    मैं तब से अपने ही ख्यालों में वयस्त हूँ,

    रंग तो बहुत हैं ज़माने में मगर,
    मैं इंद्रधनुष के रंग छुड़ाने में वयस्त हूँ,

    चाँद है सितारे हैं आसमाँ रौशन है मगर […]

  • बातों में से बात निकलती है,
    चुप रहता हूँ आवाज़ निकलती है,
    शब्दों का ही खेल है मानो,
    जैसे समन्दर से सौगात निकलती है।

  • सड़कों पर खेल खुलेआम खेले जाते थे,
    होकर मिट्टी के रंग हम घर चले जाते थे,

    पिता की डाँट जब पड़ती थी अक्सर,
    माँ के आँचल में चुपके से हम छिप जाते थे,

    मुँह मोड़ लेते हैं जहाँ आज ज़रा सी बात पर,
    वहीं दोस् […]

  • तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे,

    तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे,

    साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी,

    रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा करते थे,

    एक तुम तकिये पर सर […]

  • मैं प्यादा हूँ मुझे प्यादा ही रहने दो,
    यूँ हाथी और घोड़ों से न भिड़ाओ तुम,
    मैं तो शतरंज का खिलाड़ी हूँ दोस्त,
    मुझे सांप सीढ़ी में न उलझाओ तुम।।
    राही (अंजाना)

  • जब तुमने मिलना छोड़ दिया,
    दिल ने धकड़ना छोड़ दिया,

    राह फ़िज़ाओं ने बदली
    पुष्पों ने खिलना छोड़ दिया,

    बहक उठा मन का पंछी
    कदमों ने लहकना छोड़ दिया,

    जब से रुस्वा हुई मन्ज़िंल
    “राही” ने मचलना छोड़ दिया।।

    राही (अंजाना)

  • तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे,

    तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे,

    साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी,

    रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा करते थे,

    एक तुम तकिये पर सर […]

  • लड़ते लड़ते ज़माने की रीतिरिवाजों से थक गया हूँ,
    मगर कमाल ये ही की मैं अब भी किताब पढ़ता हूँ।।
    राही (अंजाना)

  • सोंचता हूँ अपनी एक नई दुनियाँ बना लूँ,
    जिसमे अपनी ही मनचाही तस्वीरें लगा लूँ,
    खुशियों के बिस्तर बिछा लूँ और दुखों को अपने घर का रस्ता भुला दूँ,
    सूरज चँदा को अपनी छत पर लटकाकर,
    जब चाहे ब […]

  • न दिन खरीद पाओगे न रात बेच पाओगे,

    इन हाथों में न तुम अपने हालात बेच पाओगे,

    खरीदने की चाहत जो तुम दिल में सजाये हो,

    इन आँखों से तुम न ये ख्वाब बेच पाओगे,

    खरीद लो सरे बाजार तुम मेरी यादें मगर,

    मेरे […]

  • अपनी मोहब्बत की इन्तहा तुम्हें क्या बताऊँ,
    गर हवा भी तुम्हें छूकर गुजरे तो शोले भड़कते हैं।।
    राही (अनजाना)

  • आँखों की पहुंच से बाहर देखना होगा,
    एक बार तो समन्दर पार देखना होगा,
    मेरे आईने में वो मुझे नज़र नहीं आती,
    उसके आईने में मुझे यार देखना होगा,
    राही (अंजाना)

  • छोटी सी ख़ता पे दोस्ती तोड़ दे,
    रिश्तों के समन्दर का जो मुँख मोड़ दे,
    उम्मीदों पर टिकी हुई दुनियाँ छोड़ दे,
    वो सम्बन्ध ही क्या जो बन्धन छोड़ दे।।
    RAAHI

  • कल्पनाओं की कलम से जो चित्र बनाये वो कवि,
    खामोश आवाजों को सुन कर जो अल्फ़ाज़ बनाये वो कवि,
    समन्दर को बाहों में समेट कर जो दिखाए वो कवि,
    कलम को शमशीर से भी तेज चलाये वो कवि,
    हर मौसम के मन-भाव जो पढ़ जाए वो क […]

  • सरहद के आर पार देखती हैं नज़रें उसकी,

    ज़िगर के आर पार देखती हैं नज़रें उसकी,

    खामोश दिखती हैं मगर बहुत बोलती हैं नज़रें उसकी,

    दिल में मोहब्बत का रंग घोलती हैं नज़रें उसकी।।
    राही (अंजाना)

  • वो न दिन देखती है न रात देखती है,
    वो बस एक मुझसे मिलने की बाट देखती है।।
    राही (अंजाना)

  • कोई पानी पीकर अपने तन को जेसे तैसे भर लेता है,
    और मन को देखो खुद ब खुद ही ये अपने घर को भर लेता है।।

  • अपनी यादों को मिटाना बहुत कठिन है।
    अपने गम को भूल जाना बहुत कठिन है।
    जब राहे-मयखानों पर चलते हैं कदम,
    होश में लौट कर आना बहुत कठिन है।

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • अपनी यादों को मिटाना बहुत कठिन है।
    अपने गम को भूल जाना बहुत कठिन है।
    जब राहे-मयखानों पर चलते हैं कदम,
    होश में लौट कर आना बहुत कठिन है।

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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