Mithilesh Rai

  • इश्तेहार सी हो गयी है ज़िंदगी मेरी
    जैसी दिखती है, होती नहीं कभी,

    सभी के हाथों में सुबह सवेरे पहुंच जाती है,
    मगर नज़रों में किसी के होती नहीं कभी,

    हर रोज पढ़े जाते है पन्ने इसके इस जहाँ में,
    मगर सुलह क […]

  • तेरा साया मेरे साये में कुछ ऐसे समा जायेगा,
    के तेरे चेहरे में मेरा चेहरा कोई ढूंढ नहीं पायेगा,
    जिस तरह रहती है हवा दरमियाँ हर किसी के,
    हमारा वजूद भी हर किसी के चेहरे से बयाँ हो जायेगा॥
    राही (अंजाना)

  • कभी जिन्दगी खुशी का पैगाम देती है!
    कभी जिन्दगी ख्वाबों का सलाम देती है!
    रस्म की जंजीरें हैं राहों में हरतरफ,
    ख्वाहिशों को जख्मों का ईनाम देती है!

    मुक्तककार- #महादेव’ (24)